अरब बसन्त 2010-2013 का क्षेत्र कारण स्वरूप और परिणाम | Arab Spring In Hindi

अरब बसन्त 2010-2013 का क्षेत्र कारण स्वरूप और परिणाम | Arab Spring In Hindi:

अरब स्प्रिंग क्या है (What is the Arab spring)- अरब देशों में 2010 से 2013 तक प्रजातंत्र स्वतंत्र चुनाव, मानव अधिकार, बेरोजगारी एवं शासन परिवर्तन के लिए प्रदर्शन, विरोध, उप्द्र्व व जन आंदोलन की क्रन्तिकारी लहर चल पड़ी थी. ये आंदोलन अरब देशों में एक अच्छे उदेश्य को लेकर किया गया था. इसलिए विद्वानों ने इसे अरब बसंत की संज्ञा दी. अरब बसंत नाम का प्रयोग प्रथम बार 6 जून 2011 को अमेरिका के जर्नल फारेन पालिसी में मार्क लिंच ने ने अपने लेख में किया था. इससे पूर्व यूरोप में 1848 की क्रांति के बाद भी स्प्रिंग टाइम ऑफ नेशन नाम का प्रयोग हुआ था.

अरब बसन्त 2010-2013 का क्षेत्र कारण स्वरूप और परिणाम | Arab Spring In Hindi

अरब बसंत का क्षेत्र (Area of the Arab Spring)

अरब देशों के लिए यह आन्दोलन जनता द्वारा अच्छे दिन आये उद्देश्य को लेकर किया था. इसलिए इसे अरब बसंत की श्रेणी में रखा गया. इस आंदोलन की शुरुआत ट्यूनीशिया की क्रांति से हुई और शीघ्र ही यह आंदोलन अरब लीग के देशों और उसके आस-पास के क्षेत्रों में फ़ैल गया.

अरब बसंत जिन क्षेत्रों में फैला उनमे ट्यूनीशिया, मिश्र, लीबिया, यमन, बहरीन, सीरिया, अल्जीरिया, ईराक, जोर्डन, मोरक्को, सूडान, ओमान, सऊदी अरब आदि प्रमुख थे.

अरब बसंत के कारण (Arab Spring Its Causes And Consequences)

  1. अरब देशों में राजनैतिक भ्रष्टाचार में अत्यधिक वृद्धि हो गई थी. अतः देश के विकास के लिए इसे मिटाना जरुरी था.
  2. मानव अधिकारों का उल्लघन एवं शोषण के कारण व्यवस्था के विरुद्ध विरोध उत्पन्न हुआ.
  3. तानाशाही शासकों के विरुद्ध असंतोष की भावना उत्पन्न होना.
  4. शासकों की सम्राज्यवादी प्रवृति ने भी आम लोगों में असंतोष पैदा किया.
  5. अरब देशों में बेरोजगारी में वृद्धि से युवकों में असंतोष की भावना उत्पन्न हुई.
  6. आय के स्तर में भी काफी अंतर हो गया. कुछ लोग और अधिक सम्पन्न बनते जा रहे थे, जबकि समाज का सामान्य वर्ग अत्यधिक गरीब था.
  7. प्रशासन में नौकरशाही और अधिक हावी हो रही थी. लोगों के कार्य नही हो रहे थे. इससे असंतोष की भावना उत्पन्न हुई.
  8. प्रजातंत्रिक व्यवस्था स्थापित करने की भावना को प्रोत्साहन मिलना.

अरब बसंत के उद्देश्य और स्वरूप (Purpose and nature of the Arab Spring)

अरब देशों में चल रही तत्कालीन प्रशासन व्यवस्था एवं सरकार में बदलाव लाना, अरब बसंत का मुख्य उद्देश्य था. इससे मानव अधिकारों की सुरक्षा, स्वतंत्र चुनाव की व्यवस्था, बेरोजगारी दूर करना एवं इस्लामीकरण आदि अरब बसंत के मुख्य उद्देश्य थे.

अरब आन्दोलनकारियों ने विरोध के लिए अहिंसात्मक और हिंसात्मक दोनों तरीके अपनाए. विरोध के तरीकों में सविनय अवज्ञा, सविनय विरोध करना, धरना, प्रदर्शन, हड़ताल, इंटरनेट पर सक्रिय रहना, हिंसक प्रदर्शन एवं शांतिपूर्ण विरोध आदि सभी तरीकों का अरब बसंत में प्रयोग किया गया. प्रदर्शनकारियों का नारा था- ” जनता चाहती है कि प्रचलित शासन पद्दति को गिराओं”

अरब बसंत- महत्व एवं परिणाम (Arab Bsnt- importance and results)

अरब बसंत के माध्यम से अरब देशों में प्रजातंत्र और सुधारों की ऐसी क्रांतिकारी लहर चली, जिससे सम्पूर्ण विश्व का ध्यान आकृष्ट हुआ. वर्षो से चली आ रही तानाशाही सरकारों का अंत हुआ एवं सभी अरब देशों में सुधारात्मक दृष्टिकोण की ओर ध्यान दिया जाने लगा.

  • ट्यूनीशिया के जेनुअल आब्दीन अली, मिश्र के हास्नी मुबारक, लीबिया के कर्नल गद्दाफी एवं यमन के शाह अली अब्दुल्ला का तख्ता पलट दिया गया एवं उन्हें अपदस्थ कर नई सरकारे बनी.
  • कुवैत लेबनान ओमान व बहरीन ने भी अरब बसंत के भारी विरोध को देखते हुए अपने प्रशासन कर कई तरह के सुधार किये.
  • मोरक्को एवं जार्डन में सवैधानिक सुधारों की क्रियान्विति की गई.
  • अल्जीरिया में 19 वर्ष पूर्व लागू की गई आपातकालीन स्थति को हटाया गया.
  • अरब बसंत में 1,70,000 से अधिक लोगों की जाने गई, अरब बसंत ने यह स्पष्ट कर दिया कि प्रशासनिक अराजकता एवं तानाशाही को जनता अधिक दिन तक सहन नही कर सकती. अरब बसंत के शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले एवं विरोध करने की ओर विश्व का भी ध्यान आकृष्ट हुआ. ऐसें कुछ विरोधकर्ताओं के नाम नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किये गये.

यमन के तवकोल करमान को 2011 का नोबेल पुरस्कार “अरब बसंत” में शांतिपूर्ण विरोध के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए संयुक्त रूप से दिया गया. अरब बसंत के प्रभाव से ही कुछ शासकों ने दुबारा चुनाव लड़ने से मना कर दिया और कुछ ने त्याग पत्र दे दिया.

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