कन्यादान पर 200 शब्दों में हिन्दी निबंध

कन्यादान पर निबंध- 

ऐसा मालूम होता है मौनोगेमी (स्त्रीव्रत) का नियम जो, उन लोगों की स्मृतियों और राज नियमों में पाया जाता है. उस समय बनाया गया था जब कन्यादान आध्यात्मिक तरीके से वहां होता था. और गृहस्थों का जीवन सुखमय था.

भला सच्चे कन्यादान के यज्ञ के लिए कौन सा मनुष्य ह्रद्य इतना नीच और पापी हो सकता है जो हवन हुई कन्या के सिवा किसी अन्य स्त्री को बुरी द्रष्टि से देखे. उस कुर्बान हुई कन्या की खातिर कुल जगत की स्त्री जाति से उस पुरुष कस पवित्र सम्बन्ध हो जाता है. स्त्री जाति की रक्षा करना और उसे आदर देना उसके धर्म का अंग हो जाता है.

स्त्री जाति में से एक स्त्री ने इस पुरुष के प्रेम में अपने ह्रद्य की इसलिए आहुति दी. कि उसके ह्रद्य में स्त्री जाति की पूजा करने के लिए पवित्र भाव उत्पन्न हो. ताकि उसके लिए कुलीन स्त्रियाँ माता समान, भागिनी समान, पुत्री समान, देवी समान हो जाए.

एक ही ने ऐसा अद्भुत काम किया कि कुल जगत की बहनों को इस पुरुष के दिल की डोरी दे दी. इसी कारण उन देशों में मौनोगेमी(स्त्री व्रत) का नियम चला. परन्तु आज कल उस कानून की पुरे तौर पर पाबंदी नही होती है.

देखिये स्वार्थ परायणता के वश होकर थोड़े से तुच्छ भोगो की खातिर सदा के लिए कुवारापन धारण करना क्या इस कानून को तोड़ना नही है. लोगों के दिल जरुर बिगड़ रहे है ज्यो ज्यो सौभाग्यमय गृहस्थ जीवन का सुख घटता जा रहा है. त्यों त्यों मुल्की और इखलाकी बैचेनी बढ़ती जा रही है.

ऐसा मालूम होता है कि यूरोप की कन्याएं भी दिल देने के भाव को बहुत कुछ भूल गई है. इसी से अलबेली भोली कुमारिकाएँ पार्ल्यामेंट के झगड़ों में पड़ना चाहती है. तलवार और बंदूक लटकाकर मरने लड़ने को तैयार है.

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