कोयला | इसके प्रकार और विशेषताएं

Coal/कोयला :-कोयला अवसादी चटानो में पाया जाता है. यह एक खनिज और जीवाश्म इंधन है. कोयले की गुणवता का निर्धारण उसमे उपलब्ध मात्रा में कार्बन के आधार पर श्रेणीबद्ध किया जाता है. कोयले के विभिन्न प्रकार में कार्बन की मात्रा जलाने पर ताप राख और उत्पन्न धुए के आधार पर इसे तीन भागों में बाटा गया है. सर्वोतम क्वालिटी का कोयला एन्थ्रेसाईट माना जाता है. जिनमे कार्बन (c) की सबसे अधिक मात्रा और जलने पर कम धुए और राख के साथ अधिक मात्रा में ऊष्मा देता है.

Information About Coal in Hindi Language :

कोयला के प्रकार (types of coal in hindi)

  1. पीट- यह कोयला निर्माण की प्रथम अवस्था है. इसका रंग हल्का भूरा होता है. इसमे उपस्थित कार्बन की मात्रा लगभग 60 प्रतिशत तक होती है. इसे जलाने पर अधिक मात्रा में धुआ और राख देता है. तथा कम मात्रा में ताप देता है. इस कारण यह एक घटिया किस्म का कोयला माना जाता है.
  2. लिग्नाईट कोयला-कोयले के निर्माण की यह दूसरी अवस्था मानी जाती है. यह भूरे रंग का होता है. इस कोयले का उपयोग थर्मल पावर में बिजली उत्पन्न करने के लिए किया जाता है. इसमे लगभग 67 प्रतिशत कार्बन पाया जाता है. यह पीट से अधिक मात्रा में ऊष्मा और कम धुआ और राख देता है.
  3. बिटुमनी- संसार में सबसे अधिक मात्रा में पाए जाने वाले कोयले का प्रकार है. यह कार्बन से कोयला निर्माण की तीसरी अवस्था है. इस प्रकार के कोयले में लगभग 87 प्रतिशत तक कार्बन की मात्रा पाई जाती है. यह रंग में काला तथा चमकीला होता है. इसका उपयोग घरों में तथा रेलवे इंजन और विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में प्रयुक्त किया जाता है. यह कोयला पीली ज्वाला के साथ जलता है. अधिक ताप और कम धुँआ और राख देता है.
  4. एन्थ्रेसाईट- यह कोयले के निर्माण की चौथी और अंतिम अवस्था है. इसमे सबसे अधिक कार्बन की मात्रा 90 से 98 प्रतिशत तक पाई जाती है. यह कोयले कठोर तथा भंगुर होता है. इसे जलाना कठिन है जलने के बाद यह नीली ज्वाला के साथ तीव्र ऊष्मा प्रदान करता है. यह सभी प्रकार के कोयले में उत्तम श्रेणी का तथा कम धुए और राख के साथ सबसे अधिक मात्रा में ऊष्मा प्रदान करता है.
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