Essay On Cow In Hindi गाय पर निबंध : गौ संरक्षण से ग्राम विकास

Essay On Cow In Hindi-भारतीय परम्परा में गाय को माँ का दर्जा दिया गया हैं. एक पालतू पशु होने के बावजूद करोड़ो लोगों की रोजी रोटी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ गाय को ही माना जाता हैं. सर्वगुणसंपन्न गोऊ के महत्व और उनके बारे हमारे इतिहास में दिए गये सम्मान पर आधारित इस गाय पर निबंध में आपकों सरल और स्पष्ट हिंदी भाषा में यह लेख प्रस्तुत हैं.

गाय पर निबंध (एस्से काऊ )

This Artical Wriiten To Each Guy Which Want To Detail, About Essay On Cow In Hindi. Most Important For Our Student Friends Class 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10,11 And For 12th Student Can Use This  Essay For Speech OR Discovery Details About Indian Cow.

अपने ऋषि मुनियों ने गहन चिन्तन के बाद यह उद्घोष किया हैं- ” गावो विश्वस्य मातर:”

भारतवर्ष में सदियों से गाय धन और धान्य की दात्री अर्थात एक उपयोगी पशु मात्र न मानकर यहाँ के लोगों ने उसे पवित्र और पूजनीय मानकर गाय के प्रति अत्यंत श्रद्धा का भाव रखते हैं. गोधन के प्रति आदर भाव हमारी पुरातन संस्क्रति का अटूट हिस्सा रहा हैं. द्वापर काल में गोपाल नाम से विख्यात यदुकुल तिलक श्री कृष्ण स्वय ग्वाला बनकर गोसेवा करते द्रष्टिगोचर होती हैं, तो मध्य काल में हमे अकबर के राज्य काल में गोरक्षा की अच्छी व्यवस्था के उल्लेख दिखाई देते हैं.

भारतीय जनजीवन में गाय का अपना विशेष महत्व हैं. गाय चौपाया प्राणी हैं और उसे माँ के बराबर आदर दिया गया हैं. हमारी पारिवारिक व कृषि संस्कृति की आधार रही हैं. गाय को गोधन कहा जाता हैं.पौराणिक काल में जिसके पास अधिक गाये , वह उतना ही अधिक धनी माना जाता था. अतएव गायों की सुरक्षा को एक मानवीय कर्तव्यो के रूप में माना गया हैं. गाय को वेदों में रक्षणीय, सुरक्षा के योग्य इसी अर्थ में स्वीकारा गया हैं कि वे सर्वोपरि धन हैं. गायों के जाए बेलों ने कृषि कार्य में इतना सहयोग किया कि वे गाय के साथ पूजे जाने योग्य भी माने गए.

गाय पर निबंध ( कक्षा 1,2,3,4,5,6 के लिए)

मौर्य सम्राट अशोक ने अपने स्तम्भों पर सिंह और अश्व के साथ बैलो का भी अंकन करवाया, यह बैल की शक्ति के महत्व का परिचायक हैं. बैलों को बलिवर्द और वृषभ भी कहा जाता हैं और वह शिव की सवारी हैं.

भारत में गोसेवा की अनेक कहानियाँ प्रचलित हैं. गोधन के महत्व को स्वीकार कर श्री कृष्ण ने लोगों इसके पालन की सीख दी. महाराजा दिलीप ने जीवन गाय की सेवा को महत्व दिया. उन्होंने नन्दिनी गाय की सेवा से जीवन को सार्थक किया. ऋषि वशिष्ट द्वारा कामधेनु की रक्षा की कहानी रामायण में आई हैं और पांड्वो द्वारा गायों की सेवा का प्रसंग महाभारत में विस्तार से मिलता हैं.

गोधन के सरक्षण में मुगल शासक अकबर ने भी रूचि ली. आईने-ए-अकबरी में लिखा हैं कि उस काल में गाये प्राय 20 सेर दूध देती थी और बैल 24 घंटे में 120 मील तक की दुरी तय कर सकते थे. अकबर ने गायों से भरे पुरे ब्रज और अन्य क्षेत्रो में चारागाह की व्यवस्था करवाई थी. इससे पूर्व भी गायों के चरने के लिए गाँव-गाँव में चारागाह भूमि रखे जाने की परम्परा थी.

गाय पर निबंध ( कक्षा 7,8,9,10 के लिए)

घर-घर गाए और गाँव-गाँव गोठां की मान्यता के मूल में यह विचार रहा हैं,कि गाये प्रत्येक घर में हो और प्रत्येक गाँव में गौशाला और गोष्ठ हों. शास्त्रों में गोशाला के निर्माण को पुण्य कार्य कहा गया हैं. इसका सीधा सम्बन्ध हमारे निरोगी जीवन से रहा हैं. ऋषियों ने बहुत पहले जान लिया था कि गाय धन हमे सुख, समर्धि और स्वास्थ्य दे सकता हैं. वैज्ञानिको ने गायों पर जो अनुसन्धान किये हैं, वे बताते हैं कि मानव जीवन के साथ गाय का सम्बन्ध परस्पर पोषक हेतु हैं. गाय से प्राप्त द्रव्य पंचगव्य के नाम से जाने जाते हैं. आचार्यो ने पंचगव्य से सिंचित विष के नष्ट होने का विचार दिया हैं.

पेट में कीड़े, ह्रदय रोग, जलोदर, कैंसर, बवासीर के रोगी गोमूत्र से ठीक हुए हैं. गाय के गोबर में सोलह तत्व पाए जाते हैं और गोमूत्र में चौबीस. गोमूत्र असाध्य रोगों के उपचार में भी उपयोगी हैं. सामान्यत एक अच्छी गाय रोजाना 10 से लेकर 15 लीटर दूध देती हैं. गाय के दूध में भी लगभग सारे गुण होते हैं जो माँ के दूध में होते हैं. कई प्रकार की मिठाइयाँ गाय के दूध से बनती हैं. दूध और छाछ भी उसी से मिलते हैं. गाय के घी का महत्व आयुर्वेद में तो विशेष है ही, अग्निहोत्र पर शोध करने वालों ने भी इसे महत्वपूर्ण माना हैं. पर्यावरण की शुद्धी की क्षमता गाय के घी से हवन करने में हैं. यह ओजोन परत के छेद को पाटने में भी उपयोगी हैं.
आज भी गाय हमारी अर्थव्यवस्था का आधार सिद्ध हो सकती हैं. गोपालन से परिवार का भरण-पोषण का अधिकांश गुजारा गोधन से प्राप्त दूध,दही, छाछ, घी जैसे पोषक पदार्थो से हो जाता हैं. खेती में सहायक बैल सामान ढोने में सहायक बन सकते हैं, महंगे पेंट्रोलियम पदार्थो से मुक्त ग्रामीण पर्यावरण में संतुलन भी बनाते हैं. गोधन का गोबर ईधन बचाने व उर्जा उत्पादन कर आत्मनिर्भरता को मजबूत बनाता हैं. गोपालक की दिनचर्या अनुशासन के धागे में पिरोई जाती हैं कि वह स्वस्थ जीवन को सबलन प्रदान करती हैं. गोमय और उससे प्राप्त मीथेन गैस का उपयोग भोजन बनाने में हो सकता हैं.

गाय पर निबंध (कक्षा 11,12 के लिए)

गाय की रक्षा का अर्थ हमारी अर्थव्यवस्था को बचाना हैं. गांधीजी ने इसलिए कहा था- गाय बचेगी तो मनुष्य बचेगा, वह नष्ट हुई तो उसके साथ हम सभी यानि प्रकृति, पशु-पक्षी, पर्यावरण, हमारी सभ्यता भी नष्ट हो जाएगी. भारतीय गायों में जो गुण पाए जाते है ,वे विदेशी प्रजाति की गायों में नही मिलते| क्योकि भारतीय गाय स्थानीय एव भौगोलिक परिरिथतियो से अनुकूल स्थापित करने में सक्षम होती है |

भारतीय गायों में गीर, साहीवाल, थारपारकर, राठी, हरियाणवी आदि प्रमुख नस्ले हैं. गुजरात में अनेक जगहों पर 120 लीटर रोजाना दूध देने वाली भारतीय गाय हैं. इजराइल देश गीर नस्ल की भारतीय गाय से 120 लीटर दूध रोजाना उत्पादन कर दुनियाँ को बता दिया. कि भारतीय गाय दूध देने की द्रष्टि से सर्वश्रेष्ट हैं. साधारणतया देशी गाये हरी घास और उत्तम पोषण आहार मिलने पर 10 से 25 लीटर तक दूध प्रतिदिन दे सकती हैं. भारतीय जन-जनजीवन में गाय के प्रति श्रद्धा का भाव, उसके पौराणिक महत्व एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार होने से वर्तमान समय में गाय का सरक्षण एवं सवर्धन आज की महतीं आवश्यकता हैं.

हमे पालती हैं गाये– प्राय: कहा जाता हैं कि गाय हम पालते हैं जबकि सच तो ये हैं कि गाए मे पालती हैं. हमारे देश को कृषि के लिए अधिकांश उर्जा आज गोवंश से मिल रही हैं. देश में जितना दूध पैदा होता हैं. उसका अधिकांश गायों से मिलता हैं. कार्बोहाइड्रेट, वसा, अल्बूमिनाइड, क्षार तथा विटामिन होने के कारण गाय का दूध प्रौढ़ और बालकों के लिए सम्पूर्ण आहार हैं. गाय के घी से होने वाले हवन का धुआ जहाँ-जहाँ फैलता हैं, वहां कीटाणु अथवा बैक्टीरिया नही रहते हैं. रूस में एक अध्ययन से यह सिद्ध हुआ हैं.
गाय के दूध में क्या कितना
प्रोटीन्स- 4.0 प्रतिशत
कार्बोहाइड्रेट- 4.0 प्रतिशत
उर्जा (कैलोरी) – 6.5 प्रतिशत
पानी- 87.3 प्रतिशत
वसा- 4.0 प्रतिशत
खनिज( मिनरल्स)- 0.7 प्रतिशत

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