गुरु पूर्णिमा पर निबंध 2018- Guru Purnima Essay in Hindi

Essay On Guru Purnima 2018: 27 जुलाई 2018 इस साल का बहुत बड़ा दिन, जी हाँ इस आषाढ़ पूर्णिमा के दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व भारत में मनाया जा रहा हैं. भारतीय संस्कृति के इतिहास को उठाकर देख लीजिए, हर युग में अनेक आदर्श गुरुओं ने मार्गदर्शन दिया हैं. महाभारत के रचयिता एवं आदि गुरु वेद व्यास जी की जयंती को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता हैं. यह न केवल हिन्दू धर्म में आस्था रखने वालों के लिए अहम दिन हैं बल्कि बौद्ध एवं जैन धर्म के लोगों का भी यह महत्वपूर्ण दिन हैं. गुरुपूर्णिमा के दिन विद्यार्थी (शिष्य) अपने गुरुजनों, अध्यापकों अथवा आदर्श व्यक्ति का सम्मान कर इस दिन उनके मंगल जीवन की कामना करते हैं. गुरु पूर्णिमा २०१८, गुरु पूर्णिमा कब हैं 2018 में, गुरु पूर्णिमा का इतिहास, गुरु पूर्णिमा पर निबंध, गुरु पूर्णिमा पर भाषण (स्पीच), गुरु पूर्णिमा निबंध इन हिंदी, इंग्लिश, पंजाबी, मराठी, उर्दू, तमिल, तेलगू गुरु पूर्णिमा पर निबंध 2018- Guru Purnima Essay in Hindi में उपलब्ध करवा रहे हैं. इस लेख को आप गुरु पूर्णिमा 2018 पर कविता भाषण, लेख, निबंध के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं.गुरु पूर्णिमा पर निबंध 2018- Guru Purnima Essay in Hindi

गुरु पूर्णिमा निबंध 2018

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Guru Purnima Essay in Hindi

भारतीय आध्यात्म जगत में गुरु का विशेष महत्व हैं, इसी लिहाज से उनके आदर सत्कार करने का यह पूरे देश में धूमधाम के साथ मनाया जाता हैं, ठीक ही कहा गया हैं गुरु बिन ज्ञान नहीं रे, अंधकार बस तब तक ही है, जब तक है दिनमान नहीं रे. जब तक आपकों एक सच्चे गुरु का सानिध्य प्राप्त नही हैं तब तक आप सच्चा ज्ञान नही प्राप्त कर सकते, भले ही आप रात दिन किताबों के महल में बैठे रहे.

गुरु की महानता का परिचायक उनका त्याग हैं. सबसे बड़ा त्याग तथा सेवाभाव आप एक गुरु के जीवन में देख सकते हैं. वह विकट से विकट परिस्थतियों में भी अपने विद्यार्थियों को नियमित रूप से प्रमाणित व सच्चा ज्ञान प्रदान करता हैं, यह सच हैं जो अध्यापक अर्थात गुरु स्वयं किसी बड़े ओहदे तक भले ही नही पहुच पाए हो, मगर अध्ययनचित अपने हजारों छात्रों को वह प्रशिक्षण देकर प्रशासन व अन्य सेवाओं के योग्य बनाता हैं. वह अपने अनुभव तथा वर्तमान परिस्थतियों के बिच तालमेल बिठाकर अपने शिष्य को अधिक से अधिक ज्ञान रुपी दान देने का यत्न करता हैं. बहुत से लोग आज के समय में शिक्षा को बाजारू बनाने अपने ग्राहक या स्ट्रेथ बढ़ाने के चक्कर में ट्रिक्स, फोर्मुले, व अध्ययन की सीमा से आगे बढ़ते हुए विद्यार्थियों को दिन रात रटाने पर लगे रहते हैं.

ऐसे लोग हमारी शिक्षा प्रणाली को आगे ले जाने का दावा करते हैं, मगर परिणामस्वरूप उनके पढ़ाएं शिष्य मात्र एक रटंत प्राणी बनकर रह जाते हैं. दूसरी तरह योग्य एवं प्रशिक्षित गुरु अपने अनुभव का पूरा लाभ अपने शिष्यों को देते हैं., एक आदर्श शिक्षक के पास अपने विषय पर पूर्ण नियंत्रण उनकी पहली खूबी होती हैं, जो आज के इन फेकू गुरुओं में बहुत कम देखने को मिलती हैं. ऐसा नही हैं कि सारा शिक्षक जगत ज्ञान को बेचने का साधन बना रहा हैं. लगनशील शिक्षक आज भी अपने विद्यालयों में बच्चों को गुणवत्ता पूर्वक शिक्षा देकर विभिन्न क्षेत्रों में देश का गौरव बढ़ा रहे हैं.

गुरु पूर्णिमा पर निबंध

Guru Purnima is one of the most important festivals held in India. It is a festival for Buddhists. Guru Purnima is basically a way through which students show love and gratitude to their teacher or teacher.

This festival is celebrated according to the Hindu calendar, which is on the first full moon day of the month or month of July according to the English calendar. According to Indian science, the word “guru” refers to the two Sanskrit words “Gu” and “Ru”, which means that the former means ignorance and one person has darkness and the latter means which means that the guru means a person, according to Hindu religion, the festival of Guru Purnima is celebrated on the occasion of Guru Vyas. Is there. Guru Vyasa is a person who has written 4 Vedas, 18 Puranas and Mahabharata.

The celebration of Jupiter Purnima is something that can be seen by the people. There are many schools that traditionally celebrate this festival by washing the feet of Jupiter, in which the word Hanu is called “Padpuja”.

Thereafter, there are many programs organized by the disciples, including the reading of classical songs, dances, havans, kirtan and gaias. Various gifts in the form of flowers and “Uttariya” (a kind of theft) given to the guru On the other hand, Buddhists celebrate this day in honor of their leader Lord Buddha. They contemplate on this day and read the teachings of Lord Buddha. They also follow “Upaosta”, which is a Buddhist cult this day.

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