गोडावण : राजस्थान का राज्य पक्षी

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड कहा जाने वाला मै गोडावण हु. राजस्थान का राज्य पक्षी होने का सम्मान मुझे प्राप्त हैं. उड़ने वाले पक्षियों में मेरा शरीर सबसे वजनदार हैं. राजस्थान के पश्चिमी जिलों और पाकिस्तान में मेरा रेन बसेरा हैं. मै गोडावण हु और मेरी कहानी आपकों बता रहा हु.

गोडावण पर निबंध

अरे, आप मेरी हुम,हुम .. सुनकर चौको मत. मै ही हु गोडावण. धोरो की धरती का प्यारा गोडावण.

मित्रो ! मै अपने मुह से मिया मिट्ठू नही बनना चाहता हु, पर लोग मुझे सुंदर पक्षी मानते हैं. वे मुझे सोहन चिड़िया कहकर पुकारते हैं. कुछ लोग मुझे हुकना पक्षी भी कहते हैं. मुझे मराठी भाषा में मालढोक कहा जाता हैं. मै लगभग एक मीटर ऊँचा जीव हु, मेरी चौच हलके पीले रंग की होती हैं. और गर्दन व पेट सफेद.

मेरे सिर पर काली टोपी और सीने पर काला मोटा दुपट्टा होता हैं. मेरा शरीर भूरा होता हैं. पंख काले भूरे और सफेद बिन्दुदार होते हैं. हाँ मेरे पैर पीले जरुर होते हैं. और पंजे सपाट होते हैं. मेरा वजन पन्द्रह किलों के आस-पास होता हैं. मादा कद में थोड़ी छोटी और वजन में कम होती हैं. यदि हम साथ हो तो आप हमे आसानी से पहचान सकते हो.

मै सेवण घास से भरे मैदान में रहता हु, जैसलमेर में मेरे घर को राष्ट्रिय मरु उद्यान कहते हैं. जिसे नॅशनल डेजर्ट पार्क भी कहा जाता हैं. यहाँ हमारा बड़ा परिवार हैं.मै शौकलिया, सारसेन में भी पाया जाता हु, किसी जमाने में मेरे पूर्वज शोलापुर, नलिया तथा रोलापद्दू में भी रहा करते थे. वर्तमान में पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में रहता हु.

गोडावण के बारे में इतिहास कहानी आप hihindi.कॉम पर पढ़ रहे हैं.

मै सर्वाहारी प्राणी हु. किट पतंगे, बिच्छु, मकड़ी, टिड्डी, छिपकली, गिरगिट छोटे सांप आदि खाना मुझे बहुत पसंद हैं. मुझे ज्वार, चना, तुअर, मुगफली, आदि खाना अच्छा लगता हैं. आपकों यह जानकार आश्चर्य होगा कि मै बिना पानी के भी सेवण घास के मैदानों और रेतीले प्रदेश में कई दिन प्यासा रह सकता हु.

वर्षा त्रतु के आगमन पर मै फुला नही समाता हु. मै उड़-उड़कर हूम हूम की आवाज करता हु, मादा गोडावण को यह आवाज बहुत लुभाती हैं. जब मै यह आवाज करता हु, उस समय मेरे गले के निचे एक थैली अपने आप ही उभरकर लटकती हैं. स्वभाव से मै बहुत शर्मिला पक्षी हु. पर आलसी नही. मै अपने रहने के लिए खुद घर बनाता हु, हम घौसला नही बनाते हैं. सेवण घास में या अन्य ऊँचे स्थान पर मादा गोडावण अंडा देती हैं.

वह भी एक बार में एक ही अंडा, इन अंडो को सांप और बिलाव से बचाकर रखना होता हैं.कई लोग हमारा शिकार कर लेते हैं. इन दिनों हमारी संख्या में बहुत कमी आ गईं हैं. मै बहुत चिंतित हु, ख़ुशी की बात यह हैं कि, हमारी सुरक्षा के लिए बहुत लोग आगे आ रहे हैं. सरकार ने भी जंगली जानवरों की रक्षा के लिए बहुत कानून बनाए हैं.

दोस्तों फिर भी मुझे खेद हैं कि हमारी संख्या घट रही हैं, खेती में कीटनाशको का प्रयोग होने से जहरीला दाना मुझे खाने को मिलता हैं. पत्थरों की खुदाई के लिए खदानों में होने वाले ब्लास्ट से मुझे बहुत डर लगता हैं. आप ही बताओ में मै क्या करू ? मै भयभीत हु, राजस्थान सरकार ने मुझे ‘ राज्य पक्षी ‘ का दर्जा दिया हैं.केंद्र सरकार ने मेरे सम्मान में डाक टिकट जारी किया हैं.

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