चन्द्रगुप्त मौर्य इतिहास व जीवन परिचय | | Chandragupta Maurya History in hindi

चन्द्रगुप्त मौर्य इतिहास व जीवन परिचय | | Chandragupta Maurya History in hindi: चन्द्रगुप्त मोर्य में बाल्यावस्था से ही नेतृत्व का गुण था वह अपने मित्रों के साथ खेल खेलते समय नेतृत्व करना पसंद करता था आचार्य सानक्य ने चन्द्रगुप्त मौर्य के इस गुण की पहचान कर उसे भारतवर्ष का सम्राट बनाने का निर्णय किया था चन्द्रगुप्त मौर्य 322 ई पूर्व नंदवंश के शासक घनानन्द को परास्त कर मगध का शासक बना था तत्पश्चात चंद्रगुप्त मौर्य ने छोटे -छोटे राज्यों को हराकर एक विशाल सम्राज्य की स्थापना की था तत्पश्चात चन्द्रगुप्त मौर्य ने सिकन्दर के उतराधिकारी सेल्यूकस को बुरी तरह से परास्त किया.

चन्द्रगुप्त मौर्य इतिहास व जीवन परिचयचन्द्रगुप्त मौर्य

Chandragupta Maurya History in hindi

क्रमांक जीवन परिचय बिंदु चन्द्रगुप्त जीवन परिचय
1. पूरा नाम चन्द्रगुप्त मौर्य
2. जन्म 340 ईसा पूर्व
3. जन्म स्थान पाटलीपुत्र , बिहार
4. उतराधिकारी बिन्दुसार
5. पत्नी दुर्धरा
6. बेटे बिंदुसार अशोका सुसीम, विताशोका

chandragupta maurya in hindi- चन्द्रगुप्त मौर्य को सेल्यूकस से कंधार ,काबुल ,हैरात प्रदेश एंव बलूचिस्तान का कुछ प्राप्त हुआ साथ ही सेल्यूकस की पुत्री का विवाह चन्द्रगुप्त मौर्य से हुआ सेल्यूकस ने मेगस्थनीज को चन्द्रगुप्त के दरबार में अपना राजदूत बनाकर भेजा ,जो मगध की राजधानी पाटलिपुत्र में कई वर्षो तक रहा मेगस्थनीज ने ‘इडिका ‘नामक पुस्तक भी लिखी ,जिसमे मौर्यकालीन शासन व्यवस्था की जानकारी प्राप्त होती है वर्तमान में इंडिका हमे अपने वास्तविक रूप में नही मिलती है ,परन्तु यूनानी लेखको ने इंडिका की कुछ घटनाओ को अपने साहित्य में स्थान दिया है.

चन्द्रगुप्त मौर्य ने जीवन के अंतिम काल में अपने पुत्र बिन्दुसार को राज्य सौंप दिया और जेन ग्रहण क्र लिया चन्द्रगुप्त ने भद्रबाहु को श्रवणबेलगोला में अपना गुरु बनाया एंव तप का मार्ग अपनाया.

  • बिन्दुसार– चन्द्रगुप्त के उतराधिकारी बिन्दुसार ने मौर्य साम्राज्य की प्रतिष्ठा को बनाये रखा बिन्दुसार को अमित्रघात के नाम से जाना जाता था. आचार्य चाणक्य उसके दरबार में प्रधानमंत्री थी. बिन्दुसार में 272 ई.पू. तक विशाल सम्राज्य पर शासन किया. बिन्दुसार की मृत्यु के बाद मौर्य सम्राज्य की बागडौर उसके सुयोग्य पुत्र सम्राट अशोक के हाथ में आ गई.

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