जम्मू कश्मीर रियासत का भारत में विलय | Instrument of Accession (Jammu and Kashmir)

जम्मू कश्मीर रियासत का भारत में विलय | Instrument of Accession (Jammu and Kashmir)

Jammu and Kashmir An instrument of Accession, Merger of Jammu and Kashmir : कश्मीर औपनिवेशिक भारत की सबसे महत्वपूर्ण रियासत थी. न केवल इसका क्षेत्रफल सबसे बड़ा था अपितु इस भौगोलिक स्थति भी सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण थी. जम्मू कश्मीर की सीमाएं अफगानिस्तान, चीन और तिब्बत से मिलती थी. जम्मू कश्मीर रियासत के मुख्यत चार भाग थे. जम्मू क्षेत्र जो पंजाब से लगा हुआ था, जो अपेक्षाकृत अधिक मैदानी है. कश्मीर घाटी, लद्दाख की ऊँची चोटियों और लद्दाख के पश्चिम में बहुत कम आबादी का इलाका गिलगित और बलूचिस्तान. एक नजर जम्मू कश्मीर रियासत का भारत में विलय एवं इसके विवाद व इतिहास पर.जम्मू कश्मीर रियासत

जम्मू कश्मीर रियासत का इतिहास व स्थिति (History and status of the state of Jammu and Kashmir In Hindi)

रियासतकालीन जम्मू कश्मीर के इन दूर दराज इलाकों को एक छतरी के नीचे लाने का कार्य डोगरा राजपूत घराने ने किया. जिसने 1830 के दशक में लद्दाख जीत लिया और 1840 के दशक में अंग्रेजों से कश्मीर घाटी हासिल कर ली.

आजादी के समय जम्मू कश्मीर रियासत भारत पाक की सीमा पर स्थित होने के कारण राजनितिक रूप से महत्वपूर्ण थी. कश्मीर पर 1925 ईस्वी से महाराजा हरिसिंह का शासन था. 1932 में जम्मू कश्मीर में मुस्लिम कांफ्रेस का गठन हुआ.

मुस्लिम कांफ्रेस ने जम्मू कश्मीर में महाराजा के खिलाफ असंतोष पैदा करने का कार्य किया. बाद में इसका नाम नेशनल कांफ्रेस कर दिया और शेख अब्दुल्ला इसके बड़े नेता बने.

भारत पाक विभाजन एवं जम्मू कश्मीर विवाद (India-Pak partition and J & K dispute in hindi)

15 अगस्त 1947 तक महाराजा हरिसिंह ने अपनी रियासत के बारे में कोई फैसला नही लिया. उधर पाकिस्तान येन केन प्रकारेण जम्मू कश्मीर रियासत का अपने में विलय चाहता था. उसने महाराजा को अनेक लोभ व प्रलोभन देने के प्रयास किये, लेकिन उसे सफलता प्राप्त नही हुई.

ऐसे में स्वतंत्रता के तुरंत बाद पाकिस्तान ने सितम्बर 1947 से ही घुसपैठियों के वश में अपनी सेना की कश्मीर में घुसपैठ प्रारम्भ करवा दी.

अक्टूबर के अंत में पाकिस्तानी सेना श्रीनगर के करीब तक पहुच गई. 26 अक्टूबर 1947 को कश्मीर की स्थति को लेकर नई दिल्ली में बैठक हुई, जिसमे कश्मीर के प्रधानमंत्री मेहरचंद महाजन व नेशनल कांफ्रेस के शेख अब्दुल्ला शामिल थे.

जम्मू कश्मीर रियासत का भारत में विलय (Merger of Jammu and Kashmir principality in India)

महाजन और शेख दोनों ने भारत सरकार से अपील की कि जम्मू कश्मीर रियासत में सेना भेजकर पाकिस्तानी हमलावरों को खदेड़ा जाए. 26 अक्तूबर 1947 को महाराजा हरिसिंह ने भारतवर्ष में जम्मू कश्मीर का विलय उसी विलय पत्र के आधार पर कर लिया.

जिस विलय पत्र से दूसरी रियासतों का विलय हुआ. महाराजा ने कहा था ” मै एतद्द्वारा इस विलय पत्र को स्वीकार करता हु” भारतीय स्वाधीनता अधिनियम 1947 के अनुसार शासक द्वारा विलय पत्र पर हस्ताक्षर करने के उपरांत आपत्ति करने का अधिकार स्वयं हस्ताक्षरकर्ता सहित किसी को नही था.

इस प्रकार जम्मू कश्मीर रियासत का भारत में विलय हुआ तथा 1950 में भारत के संविधान की पहली अनुसूची में भाग ख राज्य में जम्मू कश्मीर को शामिल किया गया.

आजादी के बाद जम्मू कश्मीर (history of jammu and kashmir after 1947 in hindi)

सन 1951 में जम्मू कश्मीर राज्य की संविधान सभा के चुनाव हुए. 75 सदस्यीय संविधान सभा ने 6 फरवरी 1954 को जम्मू कश्मीर राज्य के भारत में विलय की पुष्टि की.

जम्मू कश्मीर के संविधान की धारा 3 के अनुसार ”जम्मू & कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है. और रहेगा तथा इस धारा में कभी कोई संशोधन नही हो सकेगा. इस प्रकार तत्कालीन महाराजा हरिसिंह ने विलय पत्र तथा जम्मू कश्मीर की संविधान सभा की घोषणा से जम्मू-कश्मीर का भारत में पूर्ण विलय हुआ व भारत का अभिन्न अंग बना.

भारत सरकार ने अपने राज्य जम्मू और कश्मीर को पाकिस्तानी कबाइली हमले से बचाने के लिए अपनी सेना कश्मीर भेजी. नवम्बर के अंत तक भारतीय सेना ने अपना काफी बड़ा भू-भाग पाकिस्तान से वापिस जब्त कर लिया.

जम्मू कश्मीर विवाद और संयुक्त राष्ट्र संघ (Jammu Kashmir dispute and UNO In Hindi)

यदपि जम्मू-कश्मीर के कुल भाग का एक तिहाई हिस्सा अब भी पाकिस्तान के अधीन ही है. तब वर्ष 1948 में भारत ने लार्ड माउंटबेटन के आग्रह पर कश्मीर के सवाल को संयुक्त राष्ट्र संघ में ले जाना तय किया.

संयुक्त राष्ट्र संघ ने एक आयोग का गठन कर दोनों में युद्ध विराम करवा दिया. परिणामस्वरूप आज भी जम्मू कश्मीर का एक तिहाई भाग पाकिस्तान के पास ही है, जिसे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (pok) कहा जाता है.

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