डाकन दासी व अन्य प्रथाएं

डाकन दासी व अन्य प्रथाएं :राजस्थान में और कई ऐसी प्रथाएं थी जिन्होंने स्त्री जीवन को अभिशाप बना दिया था. इनमें से कतिपय कुप्रथाओं के विवेचन के बिना स्त्रियों की स्थिति का दृश्य हमारे सामने अधूरा रहेगा. डाकन दासी व अन्य प्रथाएं

डाकन दासी व अन्य प्रथाएं

राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में भील मीणा तथा निम्न जातियों में स्त्रियों पर डाकन होने का आरोप लगाकर उन्हें मार दिया जाता अथवा पेड़ से लटकाकर जिन्दा जला दिया जाता था.

डाकन प्रथा क्या है

यदि गाँव में कोई महिला या बच्चा बीमार होता तो भोपा से पूछ होने पर डाकन स्त्री के झपेट में आने का अंदेशा होता था. और फिर इसके लिए यातनाएं देकर मार दिया जाता था. स्वयं उसके रिश्तेदार भी इस दंड का अनुमोदन करते थे. अंधविश्वास पर आधारित यह क्रूर प्रथा आज भी राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में यदा कदा समाचार पत्रों की खबर बन जाती हैं.

राजस्थान में दासी प्रथा का इतिहास

राजस्थान में दास प्रथा का प्रचलन, सामंत एवं सम्पन्न परिवारों में था. युद्ध बन्दियो को दास या दासी बना दिया जाता था. कुछ लोग गरीबी के कारण ही सम्पन्न लोगों की दासता स्वीकार करते थे. इन्हें बाई, दासी, डावरी, गोली आदि नामों से पुकारा जाता था.

ये दासियाँ न केवल घरेलू काम करती थी बल्कि स्वामी इन्हें अपनी बेटी से विवाह में दहेज़ भी देता था. गलती करने पर इन्हें कोड़े मारे जाते थे. दास तथा गोला की लड़कियाँ जब विवाह योग्य होती थी तो उन्हें शासक के सम्मुख उपस्थित किया जाता था, जिसे पसंद आने पर वह अपने अन्तःपुर में भी रख सकता था, मानो वह इन्सान नहीं उपभोग की सामग्री हो.

ऐतिहासिक राजस्थान में एक और घ्रणित वृत्ति वैश्यावृति रही हैं, जिसे प्रोत्साहन देने वाला राज दरबार और दरबारी वर्ग रहा हैं. ये वेश्याएं राजदरबारों, उत्सवों तथा धार्मिक अवसरों पर नाचने गाने का काम भी करती थी, लेकिन इससे समाज में अनियंत्रित तथा अनैतिक आचरण में वृद्धि हुई.

यह भी पढ़े-

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *