तरुण | देशभक्ति पर सर्वश्रेष्ठ कविता

तरुण | देशभक्ति पर सर्वश्रेष्ठ कविता

उठे राष्ट्र तेरे कंधे पर
बढ़े प्रगति के प्रागण में,
पृथ्वी को रख दिया उठाकर
तूने नभ के आँगन में

तेरे प्राणों के ज्वार पर
लहराते है देश सभी
चाहे इसे इधर कर दे तू
चाहे जिसे उधर क्षण में

विजय वैजयन्ति फहरी जो
जग के कोने कोने में
उनमे तेरा नाम लिखा है
जीने में बलि होने में

घहरे रन घनघोर बढ़ी
सेनाएं तेरा बल पाकर
सवर्ण मुकुट आ गये चरण तल
तेरे सशत्र सजाने में

तेरे बाहुदंड में वह बल
जो केहरि कटी तोड़ सके
तेरे दृढ स्कन्ध में यह बल
जो गिरी से ले होड़ सके.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *