दशहरा पर निबंध | Dussehra Essay In Hindi

हमारे यहाँ पर साल भर तीज त्यौहार मनाए जाते हैं, जिनमे कुछ तीज और कुछ महत्वपूर्ण फेस्टिवल होते हैं. दशहरा हिन्दू धर्म का महत्वपूर्ण त्यौहार हैं. जिन्हें विजयादशमी भी कहते हैं. दशहरा पर निबंध (Dussehra Essay) में हम जानेगे आखिर यह पर्व क्यों मनाया जाता है, तथा दशहरा कब हैं. सरल भाषा में लिखे इस हिंदी निबंध लेखन को आप अपने विद्यालय के कार्यक्रम में भी प्रस्तुत कर सकते हैं.

दशहरा पर निबंध | Dussehra Essay In Hindi

हमारा देश त्योहारों का देश हैं. होली दीपावली, रक्षाबंधन, ईद, क्रिसमस, दशहरा आदि त्यौहार सम्पूर्ण भारत में आनन्द और उल्लास के साथ मनाए जाते हैं.

दशहरा हमारे देश का प्रसिद्ध त्यौहार हैं. यह त्यौहार आशिवन माह में शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता हैं. यह वर्षा की समाप्ति और शरद के आगमन का प्रतीक हैं.दशहरे से पहले नों दिन की अवधि को नवरात्र कहते हैं. ये शारदीय नवरात्र कहलाते है. इन नों दिनों में बड़ी धूमधाम से माँ दुर्गा के नों रूपों की सेवा पूजा की जाती हैं.

नवरात्र का प्रथम दिन कलश स्थापना का होता हैं एवं अंतिम दिन अर्थात दसवां दिन विजयादशमी के रूप में मनाया जाता हैं. हमारे देश में विजयादशमी (दशहरा) का इतिहास बहुत साल पुराना हैं. निश्चयपूर्वक नही कहा जा सकता कि यह पर्व कब से मनाया जा रहा हैं. इस पर्व के साथ कई पौराणिक कथाएँ जुड़ी हुई हैं.

ऐसा माना जाता है की सवर्प्रथम अयोध्या के राजा राम ने शारदीय नवरात्र प्रारम्भ की थी उन्होंने लंका विजय के समय समुद्र तट पर नों दिन तक भगवती (विजया) की आराधना की थी. भगवती की कृपा से उनमे अपार शक्ति का संचार हुआ. तत्पश्चात दशमी के दिन लंका के राजा राक्षसराज रावण का वध करके एक अन्यायी से संसार को मुक्ति दिलाई थी. इसलिए दशहरे को विजयादशमी भी कहा जाता हैं. यह भी माना जाता हैं कि इस तिथि को वीर पांड्वो ने अन्यायी कौरवों पर विजय प्राप्त की थी.इसी तिथि को देवताओं के राजा इंद्र ने व्रतासुर नाम के दैत्य को हराया था.

इस दशमी तिथि को विजय नामक मुहूर्त होता हैं, जो सम्पूर्ण कार्यो में सिद्धकारक होता हैं. अत: प्राचीनकाल में राजा लोग इसी दिन विजय यात्रा प्रारम्भ करते थे. सरस्वती-पूजा, शस्त्र पूजा, दुर्गा विसर्जन, नवरात्र पारायण तथा विजय प्राण इस पर्व के महान कर्म हैं. शास्त्रकारों के अनुसार इस दिन शमी वृक्ष ( खेजड़ी) का पूजन किया जाता हैं. लोगों का विशवास हैं कि शमी वृक्ष की पूजा से द्रढ़ता और तेजस्विता प्राप्त होती हैं. इस दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन को शुभ माना जाता हैं.

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विजयादशमी के पर्व का सबसे बड़ा आकर्षण रामलीला हैं. आश्विन माह में शुक्लपक्ष प्रारम्भ होते ही जगह-जगह रामलीला होने लगती हैं. और दशमी के दिन रावण का वध के साथ उसका समापन होता हैं. हमारे देश में रामलीला का इतना प्रचार हैं कि छोटे-बड़े शहरों नगरो के अतिरिक्त गाँवों में भी लोग बड़े उत्साह से रामलीला का आयोजन करते हैं. बड़े-बड़े शहरों में प्रसिद्ध रामलीला-मंडलियो द्वारा रामलीला की जाती हैं. गाँवों में वहां के लोग लोग स्वय अभिनेता बनकर रामलीला करते हैं.

रामलीला का प्रदर्शन प्राय: तुलसीदासजी के प्रसिद्ध गन्थ रामचरित्रमानस के आधार पर होता हैं. राम जन्म, सीता स्वयवर, लक्ष्मण परशुराम संवाद, सीता हरण, हनुमान जी द्वारा लंका दहन, लक्ष्मण मेघनाद युद्ध रामलीला के आकर्षक प्रसंग हैं. रामलीला के दिनों की चहल-पहल देखने लायक होती हैं. देर रात तक दर्शको का आना जाना लगा रहता हैं. विजयादशमी को मेला लगता हैं. दोपहर से ही सड़को पर रंग-बिरंगी पोशाक पह्ने महिलाएं, बच्चे,बूढ़े, जवान सभी मेले में जाते दिखाई देते हैं.

इस दिन बाजार की रौनक बदल जाती हैं. कई प्रकार की दुकाने, झूले, डोलर सज जाते हैं. जहाँ विजयादशमी का मेला लगता हैं, वहाँ एक तरफ मैदान में लंका नगरी का परकोटा तथा रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद के पुतलों को स्थापित किया जाता हैं. रावण का रूप विशाल और विकराल होता हैं, पुतला बनाने में लकड़िया, बांस की खपच्चिया, रंग बिरंगे कागज और पटाखे आदि काम में लिए जाते हैं.

इस दिन गाँव कई जगह जुलुस भी निकाला जाता हैं, जुलुस में राम,लक्ष्मण, हनुमान तथा वानर सेना की झांकिया सजी रहती हैं. यह जुलुस मुख्य मार्गो से होता हुआ मैदान तक पहुचता हैं. सूर्यास्त के समय राम द्वारा रावण व कुम्भकर्ण के पुतलों को तथा लक्ष्मण द्वारा मेघनाद के पुतले को जलाया जाता हैं. ये पुतले धू-धू कर जलते हैं, इसमे भरे फटाखे छुटने लगते हैं. इस द्रश्य को देखकर सब लोग रामचन्द्र की जय का उद्घोष करते हुए प्रसन्नता व्यक्त करते हैं.

इस प्रकार दशहरे का त्यौहार अन्याय पर न्याय की, असत्य पर सत्य की और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता हैं. अत्याचारी रावण को प्रतिवर्ष जलते हुए देखकर हमारे मन में यह बात दृढ हो जाती हैं कि अत्याचारी का न केवल अंत बुरा होता हैं वरन आने वाली पीढ़िया भी उनके कुकृत्यो की कभी क्षमा नही करती, विजयादशमी मानव जाति का विजय पर्व हैं.

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