मेरा प्रिय त्यौहार दीपावली पर निबंध और महत्व दिवाली कब और क्यों मनाते है

मेरा प्रिय त्यौहार दीपावली निबंध और महत्व कब और क्यों मनाते है- दोस्तों मेरा नाम राम चौधरी है और मै hihindi.com का ओनर हु.

आज के इस लेख में आपको हमारे मुख्य त्यौहार दीपावली यानि दिवाली के बारे में विस्तार से चर्चा करने जा रहे है, जिसमे आपका दिल की गहराई से हार्दिक स्वागत है.

इस साल 19 अक्टूबर को दिवाली आ रही है. हमने इससे पूर्व के कई आर्टिकल में हैप्पी दिवाली sms, संदेश, शायरी, धनतेरस और लक्ष्मी पूजा के बारे में भी काफी लेख लिखे है.

आज के लेख में हम बात करेगे यह त्यौहार कब क्यों और कैसे मनाया जाता है. इसका इतिहास और महत्व से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बाते आपसे साँझा कर रहा हु.

दीपावली का अर्थ

दीपावली और दिवाली का एक ही अर्थ होता है. कुछ लोग इन्हें दियाली और दिपाबली भी कहते है. मुख्यत ये संस्कृत भाषा का शब्द है.
जिसका अर्थ होता है दीपों की लाइन. अवली को पक्ति श्रेणी या लाइन भी कहा जाता है. इस तरह दीपक की माला या पक्ति को दीपावली कहा जाता है. इसी कारण इसे दीपोत्सव भी कहा जाता है.

दीपावली के बारे में हिंदी में जानकारी

जिस तरह मुस्लिम सम्प्रदाय के लिए ईद, ईसाईयों के लिए क्रिसमस और सिख सम्प्रदाय के लिए बैशाखी और लाहोड़ी का महत्व है. ठीक उसी प्रकार यह दीपों का त्यौहार हिन्दू वर्ग के अनुनायियों के लिए बड़ा उत्सव है.

हिन्दू पंचाग के अनुसार इसे कार्तिक अमावस्या को दिवाली जिसे लक्ष्मी पूजा भी कहा जाता है पर्व मनाया जाता है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह नवम्बर माह में पड़ता है.

वैसे दीपावली का उत्सव पांच दिनों तक चलता है, जिनमे धनतेरस और लक्ष्मी पूजन का बड़ा महत्व माना जाता है.

इस पंचदिवसीय पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है इसके बाद नरक चतुदर्शी और अगले दिन दिवाली इसके बाद के उत्सव गौवर्धन पूजा एवं भाई दूज के रूप में जाने जाते है.

देशभर में धूमधाम से मनाए जाने वाले यह पर्व अन्धकार पर उजाले का प्रतीक माना जाता है.

दीपावली क्यों मनाते हैं? (निबंध, कहानी/कथा)

पुरा काल में राजा दशरथ जी के घर जन्मे श्रीराम से Diwali Story जुड़ी मानी जाती है. राम जी के पिता दशरथ अयोध्या के शासक थे, जो वर्तमान में उत्तरप्रदेश का बड़ा शहर है.

वृद्धावस्था में दशरथ जी ने अपने उतराधिकारी राम को बनाया, मगर पूर्व वर्षो में किसी घटना में कैकेयी (दशरथ की रानी) को उनके प्राण बचाने के कारण एक वर दिया था. कैकेयी ने पुत्र मोह में आकर राम की जगह अपने बेटे भरत को अयोध्या का शासक बनाना चाहा, तथा उन्हें वर के उपयोग की तकरीब सूझी.

तभी कैकेयी ने अपने वर के रूप में राम को चौदह साल का वनवास और भरत को राजगद्दी दिलाने का आग्रह किया. अपने पिता के वचन के चलते राम ने वनवास जाना उचित समझा तथा भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ वन को गये.

वनवास के 14 वें साल में लंका के शासक रावण की बहिन सूर्पनखा के लक्ष्मण द्वारा नाक काट दिए जाने पर राक्षसराज ने प्रतिशोध के रूप में सीता का अपहरण कर लिया.

सीता हरण की जब राम को खबर मिली तो उन्होंने सीता का पता लगाने के लिए वानर राज सुग्रीव की मदद ली तथा लंका पर चढ़ाई की.

कई महीनों के यत्न के बाद राम और रावण का युद्ध भूमि में सामना हुआ, फलस्वरूप रावण मारा गया तथा राम सीता सहित अपना वनवास पूरा कर अयोध्या आए.

अयोध्या के लोगों ने जब राम के आने की खबर पता चली तो उन्होंने घी के दिए जलाकर पुरुषोतम राम का स्वागत किया. इसी परम्परा का निर्वहन करते हुए आज भी घी के दिए जलाकर दिवाली का उत्सव मनाया जाता है.

दीपावली पर्व का महत्व

दीपावली के उत्सव पर लोग अपने घरों की मरम्मत, सफ़ेदी आदि का कार्य करवाते हैं| लोग धर्म और आस्था के साथ माँ लक्ष्मी की पूजा आराधना करते है. तथा लक्ष्मी के स्वागत के लिए अपने घर और दूकान को दुल्हन की तरह सजाते है.

व्यापारियों के लिए इन पांच दिनों में सबसे अधिक खरीददारी होती है. दीपावली से नये वर्ष की शुरुआत होती है तथा नए बही खाते बनाए जाते है.

सरकारी कर्मचारियों को लम्बी छुट्टिया मिलती है जिससे वे अपने स्वजनों के साथ इस पर्व को मना पाते है. चारो ओर घी के दियों की रोशनी से वर्षा ऋतू में पनपे जीवाणु और कीट भी समाप्त होते है. जिससे पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद मिलती है.

कई दिनों तक घरों की साफ़ सफाई और रंग रोगन से स्वच्छता का माहौल बनता है. जैन धर्म के लोग इसे महावीर स्वामी के निर्वाण दिवस के रूप में मनाते है. सिख सम्प्रदाय में इसे मुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है, इस दिन हरगोबिन्द जी को जेल से मुक्ति मिली थी.

उम्मीद करते है मित्रों दीपावली पर निबंध और महत्व इसे कब और क्यों मनाते है इस सम्बन्ध में दी गई यह जानकारी अच्छी लगी होगी. इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ भी जरुर शेयर करे.

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