दीपावली – Deepawali

दिवाली या दीपावली अन्धकार पर प्रकाश की विजय के रूप में मनाया जाता है. सैकड़ो हजारों साल से मनाए जा रहे त्यौहार में दीपावली  प्रमुख है. धार्मिक मान्यताओं में दीपावली का बड़ा महत्व है. देशभर में इस त्यौहार को बड़ी धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ सभी धर्मो के लोग मिलकर मनाते है.

दीपावली कब है

हर वर्ष दीपोत्सव दीपावली का त्यौहार कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है, वर्ष 2017 में दीपावली का त्यौहार 19 अक्टूबर को है. दिवाली का उत्सव पांच दिनों तक चलता है. रेशम की धागे की तरह इसकी परते धीरे धीरे खुलती जाती है. इस उत्सव की शुरुआत धनतेरस जिन्हें धन त्रयोदशी भी कहा जाता है के दिन से होती है. धनतेरस के दिन घर की चौखट पर तेल का दीपक जलाया जाता है तथा भगवान धन्वन्तरी और कुबेर की पूजा की जाती है.

इसके अगले दिन रूप चौदश और इसके अगले दिन लक्ष्मी पूजन के साथ दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है. कार्तिक प्रतिपदा को गौवर्धन पूजा और दूज को भाई दूज के रूप में मनाया जाता है. इस तरह कार्तिक के कृष्ण पक्ष की अँधेरी रात्रि में यह दीपावली का पर्व मनाया जाता है.

ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार दीपावली नवम्बर महीने में मनाई जाती है. इस समय तक किसान अपनी खरीफ की फसल की कटाई कर निवृत हो जाते है.

दीपावली शब्द की उत्पति और अर्थ

अधिकतर लोगों द्वारा इस त्यौहार के लिए दिवाली शब्द का उपयोग किया जाता है. जो कि मूल रूप से संस्कृत भाषा का शब्द है. दीपावली की शब्द रचना पर ध्यान दे तो यह दीप और अवली दो शब्दों से मिलकर बना है. दीप का अर्थ दीपक से है वही अवली का अर्थ श्रंखला, कतार या लाइन से है. इस तरह दीपावली या दिवाली का अर्थ दीपो की श्रंखला या कतार से है.

भारत के विभिन्न क्षेत्रों एवं राज्यों में इन्हें अलग अलग नामों से जानते है. जिनमे बंगाली भाषा में इसे दीपाबली, पंजाबी में दियारी इसी तरह नेपाली में तिहार और राजस्थानी भाषा में दियाली भी कहा जाता है.

महत्व

दीपावली का अलग अलग धर्म तथा व्यवसाय से जुड़े लोग भिन्न भिन्न महत्व से मनाते है. जहाँ सरकारी अधिकारियो एवं कर्मचारियों को दीपावली के अवसर पर ही सालभर की सबसे लम्बी छुट्टिया मिलती है. दूसरी तरफ यह व्यापारी वर्ग के लिए अच्छी आमदनी का दौर भी माना जाता है.

क्युकि धनतेरस और दिवाली के अवसर पर वर्ष भर की सबसे अधिक खरीददारी इसी अवसर पर होती है. साथ ही गुजरात जैसे राज्यों के व्यवसायी इस दिन से नये वर्ष की शुरुआत करते है. तथा अपने पुराने हिसाब का लेखा जोखा कर नये बही खाते का शुभारम्भ करते है. इन सब बातों से भी बढ़कर दिवाली का बड़ा धार्मिक और सामाजिक महत्व है. जो इस प्रकार है.

धार्मिक

दीपावली को धन की देवी लक्ष्मी के सम्मान में भी मनाई जाती है साथ ही दीपावली के दिन ही भगवान श्री राम 14 वर्ष के वनवास को पूरा कर भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ अयोध्या लौटे थे. राम जी के सम्मान में अयोध्या के निवासियों ने घी के दिए जलाकर उनका स्वागत किया.

कुछ लोग इस दिन को पांड्वो के अज्ञातवास की समाप्ति को भी मानते है. सिख धर्म में भी कार्तिक अमावस्या का बड़ा महत्व है. इस दिन ही पंजाब के प्रसिद्ध स्वर्ण मन्दिर की नीव रखी गई थी तथा छठे गुरु हरगोविंद जी इसी दिन जेल से रिहा होकर लौटे थे. जैन धर्म के संस्थापक महावीर स्वामी को दिवाली के दिन ही मोक्ष की प्राप्ति हुई थी.

सामाजिक

दिवाली के दिन ही महान हिन्दू धर्म सुधारक महर्षि दयानन्द जी द्वारा राजस्थान के अजमेर से आर्य समाज की स्थापना की गई थी. कई मुस्लिम शासकों ने भी इस अवसर को अहमियत देते हुए इनके आयोजन का जिम्मा उठाया था. जिनके चलते हिन्दू मुस्लिम एकता तथा सामाजिक सद्भाव को मजबूती मिली. व्यक्ति अपनी दैनिक दिनचर्या के बिच अमन और उल्लास के लिए पर्वो का सहारा लेता है. ठीक दीपावली भी इस उद्देश्य को पूर्ण करते हुए लोगों में उमंग और उत्साह का संचार करती है.

आर्थिक

जैसा कि उपर बताया जा चूका है, दिवाली के पांच दिनों में साल की सबसे अधिक खरीददारी होती है. कपड़े, आभूषन, मिठाइयों, बर्तनों और वाहनों की इस अवसर बड़ी मात्रा में खरीद होती है. धार्मिक मान्यताओं के चलते धनतेरस के दिन खरीददारी करना शुभ माना जाता है. जिसका असर बाजार में भी दिखता है

दिवाली के 10-15 दिन पूर्व से ही बाजारों में भीड़ भाड़ का माहौल बन जाता है जो कई दिनों तक चलता है. इस अवसर पर सबसे अधिक खपत फटाखों की होती है. बच्चों के खेलने के छोटे फटाखों से लेकर बड़े आतिशबाजी बम बड़ी संख्या में बिकते है.

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