देशभक्ति कविता हिंदी में | Best Desh Bhakti Poems In Hindi Language

इस लेख में आज हम पढेगे, कुछ बेहतरीन और नई देशभक्ति कविता यानि Best Desh Bhakti Poems हिंदी भाषा में. इससे पूर्व के कई आर्टिकल में स्वतन्त्रता दिवस और गणतन्त्र दिवस पर बोलने के लिए सभी कक्षा के छात्रों के लिए भारत माता की देशभक्ति कविताए प्रस्तुत की हैं.

देशभक्ति कविता-1 हम करे राष्ट्र आराधना (देश भक्ति कविता इन हिंदी)

हम करे राष्ट्र आराधना,
तन से, मन से, धन से,
तन, मन, धन, जीवन से,
हम करे राष्ट्र आराधना |

अन्तर से, मुह्ख से, करती से,
निष्चल हो निर्मळ मती से,
श्रधा से, मसतक नती से,
हम करे राष्ट्र अभिवादन ||

अपनें हसते सेशव से,
अपने खीलते यौवन से,
प्रोढ़ता पुर्ण जीवन से,
हम करे राष्टर का अरचन ||

अपने अतीत को पढ़कर,
अपने ईतिहास को उल्टकर ,
अपना भविष्य समझकर,
हम करे राष्टर का चिन्तन ||

याद हमे हैं युग-युग की,
जलती अनेकों घटनाए,
जो मा की सेवा पाथ पर,
आई बनकर विपदाए |

हमने अभिशेक किया था,
जननी का अरी-शोनीत से,
हमने श्रंगार किया था,
माता अरी मुंडो से ||

Hum kare rastra aradhan देश भक्ति कविता का youtube विडियो –

देशभक्ति कविता-2 महाराणा प्रताप

वह मातृभूमि का रखवाला
आन-बान पर मिटने वाला,
स्वतंत्रता की वेदी पर
जिसने सब कुछ था दे डाला |

स्वाभिमान का अटल हिमाला
कष्टों से कब डिगने वाला,
जो सोच लिया कर दिखलाया
ऐसा प्रताप हिम्मतवाला |

थे कई प्रलोभन झुका नही,
आंधी तूफा में रुका नही,
आजादी का ऐसा सूरज
उजियारा जिसका चूका नही |

वह नीले घोड़े का सवार
.वह हल्दीघाटी का जुझार,
वह इतिहासों का अमरपृष्ट
मेवाड़ शोर्य का वह अंगार |

धरती जागी, आकाश जगा
वह जागा तो मेवाड़ जगा,
वह गरजा, गरजी दसों दिशा
था पवन रह गया ठगा-ठगा |

हर मन पर था उसका शासन
पत्थर-पत्थर था सिहासन,
महलों से नाता तोड़ लिया
थी सारी वसुधा राजभवन |

वह जनजन का उन् नायक था
वो सब का भाग्य विधायक था,
सेना नही थी उसके पास
फिर भी वो सेनानायक था |

जगल जगल में वह घुमा
काटो को बढ़-बढ़ कर चूमा
जितनी विपदाए प्रखर हुई
उतना ही वह ज्यादा झुमा

सब विपक्ष में था उसके
बस, सत्य पक्ष में था उसके,
समझौता उसने नही किया
जाने क्या मन में था उसके |

वह सत्यपथी, वह स्त्यक्रती,
.वह तेजपुंज, वह म्हाध्रति,
वह शौर्यपुंज, भू की धाती
वह महामानव, वह महाव्रती |

देशभक्ति कविता – 3 This Native Land Of Mine

she ia a rich and rare land
oh ! she’s a fresh and fair land,
she is a dear and rare land,
this native land of mine.
no men than here are braver,
her women’s hearts never waver,
i’d freely die to save her.
and think my lot divine.
she’s not dull or cold land,
no!she’s warm and bold land,
oh!she’s a true and old land.
this is native land of mine.
oh! she’s a fresh and fair land,
oh!she’s a true and rare land,
yes, she’s a rare and fair land,
this is native land of mine.

देशभक्ति कविता -4

ये है बीरो की क़ुरबानी, ये है बीरो की क़ुरबानी
करते है वो अथक प्रयास गर्मी हो या शर्दी …(2)
कूद फाँदकर दौड़ भागकार पाते है तब वर्दी…(2)
घर बार छोड़कर पीते है वो घाट घाट का पानी
ये है बीरो की क़ुरबानी, ये है बीरो………………..
जब होता है बीर शहीद छूट जाती है उनकी जोड़िया(2)
माँ की आँखे होती है नम बहु की टूटती चूड़िया(2)
माँ बाप बहु संघ रोते है उनके नाना नानी
ये है बीरो की क़ुरबानी, ये है बीरो……………….

सियाचिन वो दर्द है जहाँ पक्षी भी न करे बसेरा..(2)
ऐसे में अपने बीर जवान लगाते वहा पर डेरा..(2)
बर्फ बर्फ में बर्फ बने है ना होता नसीब में पानी
ये है बीरो की क़ुरबानी, ये है बीरो…………….
हजारो सैनिक निकल पड़े थे छाना चप्पा चप्पा..(2)
अंत में सीना चीर बर्फ का निकाला हनुमनथप्पा..(2)
दबा रहा वो बर्फ के नीचे फिर भी हार ना मानी
ये है बीरो की क़ुरबानी, ये है बीरो……………
जय हिंद जय भारत

–Shivam Singh

देशभक्ति कविता -5

एक सैनिक की चिट्टी आई,
एक परिवार की चिट्टी लाई !
माँ ने दौड़ के ले ली चिट्टी,
जब की नहीं थी पढ़ीलिखी !
तेरा कुशलता जान में लेती,
मन दिल को समझता है !
पढ़ने को जब चिट्टी खोली,
गम का कोई तूफान चला !
ऐसी खबर लिखी थी उसमे,
उसको पड़ता कौन भला !
सब के चेहरे अधुरा थे,
जैसे दिल हो कोई जला !

–Ritika Sharma

देशभक्ति कविता -6

ये वक्त भी रूक जाएगा,
आसमाँ झुक जाएगा,
धरती कहे तू आ गया,
कोई भी ना बच पाएगा,
बहानें लहू हम आयें हैं,
जिन्दगी देनें हम आयें हैं,
हर शाख अब लहराएगा,
हर फूल मुस्कुराएगा,
ताकत हमारी चट्टानों सी,
मुहब्बत हमारी फूलों सी,
सारा जहाँ मुस्कुराएगा,
जवान विजय होके जब आएगा,
ये वक्त भी रूक जाएगा,
आसमाँ झुक जाएगा,
धरती कहे तू आ गया,
कोई भी ना बच पाएगा,

–कवि मनीष

देशभक्ति कविता-7

प्यार तो हमने भी किया ,उसके लिए अपना दिल भी दिया।
उसने हर बार की तरह, इस बार भी मुझे धोखा दिया।।
मुझे अनजान रखकर, उसने भी मुझसे इतना प्यार किया।
कि मेरे लिए सीमा पर उसने, अपनी जान तक दे दीया।।

देशभक्ति कविता-8

भारत के लाल आज झूम-झूम गाओ रे |
सारा ही देश आज
झूमा है मस्ती में,
देखो ख़ुशी छाई है
हर एक बस्ती में |
स्वाधीनता की खुशियाँ लहराओं रे |
भारत के लाल आज झूम-झूम गाओं रे |
आज तो गगन में भी
उल्लास छाया है,
देशभक्ति का देखो
कैसा रंग छाया है |
देश के सपूतों, आज देशभक्ति पाओ रे |
भारत के लाल आज झूम-झूम गाओ रे |
याद करो उनको आज
मरकर जो अमर हुए,
कल्पना करो ज़रा
अन्याय जो बर्बर हुए |
संजोयेंगे स्वतंत्रता कसम मिलकर खाओं रे |
भारत के लाल आज झूम-झूम गाओ रे |
सोचो स्वतंत्रता हित
क्या-क्या नहीं खोया है,
देश के बलिदानियों को
सारा देश रोया है |
देश के सपूतों से प्रेरणा को पाओ रे |
भारत के लाल आज झूम-झूम गाओ रे |

–डॉ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’

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