नंदलाल जोशी का जीवन परिचय एवंम देशभक्ति गीत | Introduction and Patriotic Songs of Nandlal Joshi

नंदलाल जोशी का जीवन परिचय एवंम देशभक्ति गीत | Introduction and Patriotic Songs of Nandlal Joshi

Introduction and poetry, Biography, Jivani of Nandlal Joshi– राष्ट्रभक्ति देश-विदेश में प्रत्येक घटित घटना पर महापुरुषों को अपनी काव्य अभिव्यक्ति देने वाले नंदलाल जोशी आधुनिक हिंदी कवि हैं, खड़ी बोली हिंदी में उनके गीत जिनमे भारत के गौरवशाली इतिहास और परम्परा की रचनाएँ बेहद लोकप्रिय हैं. मरुप्रदेश से आने वाले इन कवि महाशय नंदलाल जोशी जी के जीवन परिचय और उनकी रचनाओं पर एक नजर-

नंदलाल जोशी

कविवर नंदलाल जोशी का जन्म बाड़मेर में हुआ. पढने में अत्यंत मेधावी सबसे आगे रहने वाले नंदलाल जोशी ने कक्षा 11 तक की शिक्षा बाड़मेर से ही प्राप्त की, तदोपरांत ये उच्च शिक्षा के लिए जोधपुर चले गये. यही जोधपुर के MBM इंजीनियरिंग कॉलेज से नंदलाल जोशी ने वर्ष 1968 में इंजीनियरिंग के BE की उपाधि स्वर्ण पदक के साथ हासिल की. उच्च शिक्षित और स्वर्ण पदक विजेता होने के कारण नंदलाल जोशी को कई बड़ी कंपनीज ने उच्च पदों पर नौकरी के लिए प्रस्ताव भी दिए.

यहाँ पर आपने माँ भारती की सेवा की राह चुनी न कि किसी उच्च पद की नौकरी की. आप अभी तक अविवाहित रहकर राष्ट्रसेवा में लगे हुए हैं. आज भी नंदलाल जोशी जी एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपनी सम्पूर्ण जिन्दगी राष्ट्रसेवा के नाम कर चुके हैं.

नंदलाल जोशी का काव्य परिचय

विज्ञान के विद्यार्थी होते हुए भी आप में काव्य प्रतिभा जन्म से ही थी. नंदलाल जोशी  की पूज्य माताजी ने कृष्ण लीला के पदों को गा-गाकर आपकी बीज रूप काव्य प्रतिभा को पुष्पित एंव पल्लवित किया. आपने अब तक 211 राष्ट्र भक्ति के गीत तथा 161 ईश्वर भक्ति के गीत एवं भजनों की रचना की हैं. आपकी ये सभी रचनाएँ प्रेरणा पुष्पांजलि एवं भक्ति हिलौरे नामक पुस्तकों में प्रकाशित हैं.

नंदलाल जोशी  की रचनाएँ जहाँ ईश् भक्ति की गंगा प्रवाहित करती हैं, वही राष्ट्रप्रेम का ज्वार उठाती हैं. योग गुरु बाबा रामदेव आपकी रचना “मन मस्त फकीरी धारी हैं,अब एक ही धुन जय जय भारत को राष्ट्रिय और अंतराष्ट्रीय मंचो पर गा-गाकर लोगों को मस्त कर रहे हैं.

नंदलाल जोशी कविता परिचय

यहाँ पर नंदलाल जोशी  के दो राष्ट्रभक्ति गीत लिए गये हैं. हिंदी साहित्य में गीत लेखन की पुरानी परम्परा हैं. गीत में भाव और नाद का प्राधान्य होता हैं. भक्ति और प्रेम भाव को लेकर अनेक गीतों की रचना होती रही हैं. सोहनलाल द्वेदी के राष्ट्रभक्ति गीत बेहद प्रसिद्ध हैं. जयशंकर प्रसाद के नाटको में भी विविध देशभक्ति गीतों का सहज समावेश हैं. भक्ति जब राष्ट्र के प्रति हो, प्रेम का केंद्र बिंदु मातृभूमि हो तो ऐसे गीतों की स्रष्टि होती हैं.

यहाँ दिया गया पहला गीत नंदलाल जोशी द्वारा रचित देश उठेगा रचना का सक्षिप्त रूप हैं. इस देशभक्ति गीत में भारत को स्वावलम्बी और स्वाभिमानी बनाने की न केवल कामना हैं, बल्कि इसी मार्ग से भारत विश्व में अग्रणी हो सकता हैं. कवि देशवासियों को आवहान करता हैं कि केवल अधिकारों के प्रति जागरूक होने से काम चलने वाला नही हैं, हमे अपने कर्तव्यो को भी नही भूलना चाहिए. दुसरे देशभक्ति गीत गौरवशाली परम्परा में नंदलाल जोशी जी ने भारत के अतीत गौरव का चित्रण किया हैं. प्राचीनकाल में हम ज्ञान-विज्ञान में विश्व में सिरमौर थे, तभी तो यहाँ विश्व की श्रेष्टतम संस्क्रति पल्लवित हुई.

नंदलाल जोशी के देशभक्ति गीत (Nandlal Joshi Patriotic Songs In Hindi)

देश उठेगा देशभक्ति गीत (desh uthega deshabhakti geet)

देश उठेगा अपने पैरो निज गौरव के भान से |
स्नेह भरा विशवास जगाकर जिए सुख सम्मान से ||
देश उठेगा
परावलम्बी देश जगत में, कभी न यश पा सकता हैं |
मर्ग तृष्णा में मत भटको, छिना सब कुछ जा सकता हैं ||
मायावी संसार चक्र में कदम बढ़ाओ ध्यान से |
अपने साधन नही बढ़ेगे औरो के गुणगान से ||
इसी देश में आदिकाल से अन्न, रत्न भंडार रहा |
आलोकित अपने वैभव से, अपने ही विज्ञान से |
विविध विधाएँ फैली भू पर अपने हिन्दुस्थान से..
अथक किया था श्रम अनगिनत जीवन अर्पित निर्माण में ||
मर्यादित उपभोग हमारा, पवित्रता हर प्राण में ||
परिपूरक परिपूरण स्रष्टि, चलती ईश् विधान से |
अपनी नव रचनाएँ होगी, अपनी ही पहचान से..
आज देश की प्रजा भटकी, अपनों से हम टूट रहे |
क्षुद्र भावना स्वार्थ जगा हैं, श्रेष्ट तत्व सब छुट रहे ||
धारा ‘स्व’ की पुष्ट करेगे, दुःख दुविधा अपमान से |
जय जय अम्बर में गूंजेगा सभी दिशा उत्थान से..||
देश विघातक षड्यन्त्रो के जाल बिछे हैं सावधान |
इस माटी को प्रेम करे जो, बस उसको ही अपना मान ||
कोई उपर नही रहेगा, भारत के सविधान से |
देश द्रोहियों को कुचलेगे, देशभक्त की शान से..
देश उठेगा अपने पैरो निज गौरव के भान से |
स्नेह भरा विशवास जगाकर जिए सुख सम्मान से ||

देशभक्ति गीत गौरवशाली परम्परा (deshabhakti geet gauravashaalee parampara)

आदिकाल से अखिल विश्व को, देती जीवन यही धरा |
गौरवशाली परम्परा..
जीवन की आदर्श चिन्तना, परीपूर्ण परिपक्व विचार
कालातीत हैं दर्शन अपना, आत्मवत सब स्रष्टि निहार
सारा जग परिवार हमारा, पूज्या माता वसुधरा
गौरवशाली परम्परा..
परमेश्वर के रूप अनेकों, अपने अपने मार्ग विशेष
श्रदा भक्ति अक्षय निष्ठा, न किसी से राग न द्वेष
विविध पन्थ वैशिष्ठ्य सुवासिता, एक सत्य का भाव भरा
गौरवशाली परम्परा..
शील सत्य संयम मर्यादा, शुद्ध विशुद्ध रहा व्यवहार
करुना प्रेम सहज सा छलका, सेवा तप ही जीवनसार
अमर तत्व के अमर पुजारी, विष पीकर भी नही मरा
गौरवशाली परम्परा…
सघन एकाग्र ज्योति से, किये गहनतम अनुसन्धान
कला शिल्प संगीत रसायन, गणित अणु आयुर्विज्ञान
सभी विधाए आलोकित कर, महिमामय भूलोक वरा
गौरवशाली परम्परा…
शौर्य पराक्रम अतुल तेज से, वीरोचित आया भूडोल
आयुध सज्जित अनगिनत योद्धा, नेत्र तीसरा फिर खोल
शीश कटा पर देह लड़ी थी, स्वय काल भी यही डरा
गौरवशाली परम्परा…
आत्म चेतना नव-आभा ले, फिर से भारत राष्ट्र खड़ा
विराट शक्ति प्रकटे गरजे, दुष्ट दलन हो कदम कड़ा
तुमुल घोष जयनाद करेगा, अपनाओ स्वधर्म जरा
गौरवशाली परम्परा..

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