नकल विरोधी कानून | Essay on Copy Prevention

Copy Prevention आज के भौतिक युग से बहुत से लोग कम मेहनत कर शीघ्र ही चीज हासिल करना चाहते है. वे ऐसे सुगम मार्ग की तलाश करते है जहाँ सफलता प्राप्त करने के लिए अधिक मेहनत नही करनी पड़े.इसके लिए वे अनैतिक मार्ग अपनाने के लिए भी तैयार रहते है. ऐसी ही प्रवृति कुछ विद्यार्थियों में पनप रही है. वे मेहनत करना नही चाहते है तथा यह सोचते है कि परीक्षा में नकल करके सफलता प्राप्त कर लेगे. वे ऐसा सोचते है कि नकल करने का कोई ऐसा नया तरीका अपनाएगे जो किसी की पकड़ में नही आएगा तथा वे परीक्षा में सफल हो जाएगे. ऐसे विद्यार्थियों को यह भान नही होता है कि अनैतिकता की बुनियाद पर बनी इमारत बहुत अधिक दिन तक खड़ी नही रह सकती है, एक न एक दिन धराशायी हो ही जाती है.

नकल विरोधी कानून | Essay on Copy Prevention

ऐसे विद्यार्थी नकल कर एक या दो परीक्षाओं में सफल हो सकते है. परन्तु वे केवल नकल के सहारे अपने लक्ष्य को नही पा सकते है. वे नकल कर कुछ कक्षाएं भले ही उतीर्ण कर ले परन्तु नकल के सहारे प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त नही कर सकते है. इस प्रकार अन्तोत्गत्वा उन्हें भी पता नही होता है कि नकल करने के दौरान यदि वे पकड़े गये तो कठोर कानून के तहत उनके विरुद्ध अपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा. उन्हें अदालत में पेशियों पर जाना पड़ेगा तथा उनका पूरा जीवन बर्बाद हो जाएगा. उनके माथे पर ऐसा कलंक लग लगेगा कि वे कभी भी अच्छी नौकरी नही पा सकेगे.

राजस्थान में परीक्षाओं में नकल व अनुचित साधनों की रोकथाम के लिए वर्ष 1992 में एक कड़ा कानून बनाया गया है. जिसका नाम है- राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों पर रोक) अधिनियम. इस अधिनियम में परीक्षाओ के दौरान नकल एवं अनुचित साधनों की रोकथाम के लिए कठोर प्रावधान किये गये है. इस कानून के दायरे में परीक्षार्थियों, परीक्षार्थियों की मदद करने वाले, प्रश्न पत्र बनाने वालों आदि सभी को सम्मलित किया गया है.

इस अधिनियम में अनुचित साधनों का दायरा बहुत व्यापक रखा गया है. जिससे नकल करने के हरसंभव तरीके इसकी हद में आ सकते है. इसमे प्रश्नपत्र को हल करने के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी प्रकार की सहायता लेना, लिखित या प्रिंटेड सामग्री रखना शामिल है.

इसमे टेलीफोन, वायरलेस या अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण या गैजेट की सहायता लेने को शामिल किया गया है. प्रश्न पत्रों को आउट करना, उनकी चोरी करना, अनाधिकृत रूप से उन्हें अपने पास रखना, नकल करने में किसी की सहायता करने को भी इसमे अपराध बनाया गया है. ऐसे व्यक्ति जिन्हें परीक्षा आयोजन का दायित्व सौपा है, उनकी यह जिम्मेदारी निर्धारित की गई है कि वे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रश्न पत्र या परीक्षा के बारे कोई सुचना या जानकारी किसी को नही देगे. इसका उल्लघंन करने पर उन्हें भी दंडित करने का प्रावधान किया गया है.

इस अधिनियम में परीक्षा में नकल करने या कराने, अनुचित साधनों का प्रयोग करने पर तीन वर्ष तक के कारावास तथा दो हजार रूपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. नकल करने वाले छात्र के विरुद्ध अपराधिक प्रकरण तो दर्ज किया ही जाता है, उसे विद्यालय या कॉलेज से भी निष्कासित कर दिया जाता है. इस अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध अजमानती एवं संज्ञेय अपराध है, अर्थात नकल के मामले की सूचना मिलने पर पुलिस द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट जिसे हम एफ आई आर भी कहते है दर्ज की जाती है तथा आरोपी को गिरफ्तार किया जा सकता है.

विद्यार्थियों को चाहिए कि वे लक्ष्य प्राप्ति के लिए कोई शोर्टकट को अपनाने के स्थान पर मेहनत करे, अपनी क्षमताओं को विकसित करे और नैतिकता के मार्ग पर चले. ऐसा करने पर वे अवश्य ही अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकेगे, स्वयं एक अच्छा नागरिक बनेगे अपने देश व समाज को उन्नति के सौपानों पर आरोहित कर सकेगे.

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