नागपंचमी की कथा | Nag Panchami Festival 2017

Nag Panchami Festival 2017-सांप एक जहरीला जीव होता हैं. सर्प का हर किसी को खतरा रहता हैं, हिन्दू रीती रिवाजों में साँप को भी अन्य पशुओ की भांति देवता माना जाता हैं, नागदेवता के भय से मुक्ति के लिए हिन्दू कैलेंडर के अनुसार सावन माह की शुक्ल पंचमी को नागपंचमी (Nag Panchami) का पर्व मनाया जाता हैं. भगवान् शिव तेजाजी और जाहर वीर गोगाजी सहित कई देवी-देवताओं की कथाए नाग से जुड़ीं हुई हैं. इस दिन सर्प के अतिरिक्त गाय और बैल की भी पूजा की जाती हैं.

नागपंचमी का महत्व nag panchami festival information

हमारी हिन्दू संस्कृति विलक्षण हैं, जो पेड़ पौधे, जीव जंतु, नदी पहाड़ और सभी सजीव निर्जीव वस्तुओ में अपने ईश्वर के दर्शन देखती हैं. 33 करोड़ देवी देवताओं को मानने वाली इस परम्परा में प्रत्येक छोटे से बड़े जीव में प्रभुत्व के अंश के दर्शन करती हैं. यही वजह हैं कि हमारे पर्व और रीतिरिवाज भी इनसे अटूट रूप से जुड़े होते हैं. विषैले जीव जैसे सर्प को भी देवता की श्रेणी में रखकर उनकी सेवा और पूजा करने की प्रथा इस संस्क्रति के सिवाय किसी अन्य सभ्यता में इसकी विलक्षणता के दुर्लभ ही दर्शन होते हैं.

गाय,बैल कबूतर मोर, हंस, और सांप की पूजा कर उन्हें सम्मान देने वाली इन प्रथाओ ने जीव मात्र के प्रति अपनी आत्मीयता और लगाव को दिखता हैं. प्रत्येक तीज त्यौहार के पीछे एक कथा उसको मनाने का तरीका और पूजा विधि का भी धार्मिक ग्रंथो में स्पष्ट उल्लेख मिलता हैं. चाहे गाय या बरगद की पूजा हो, ये तो मान लीजिए प्रत्येक व्यक्ति के जीवन से जुड़े होते हैं.

मगर नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा जबकि कुछ लोग इसके पीछे यह मानते है, कि यह डर की वजह से नागपंचमी के दिन सर्प की पूजा करते हैं. मगर यह सरासर गलत हैं, डर से तो भूतो की पूजा की की जा सकती हैं. नाग पूजन के पीछे भी कई पौराणिक कथाए जुड़ी हुई हैं. जो इस तरह के सवालों को निरुतर कर देती हैं.

नागपंचमी कथा nag panchami story in hindi 

नागपंचमी त्यौहार के पीछे कई पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं.

यहाँ आपकों एक सेठ और उनके पुत्रों की कथा बता रहे हैं.

एक सेठ के सात बेटे थे जिनकी शादी हो चुकी थी

उन सभी में सबसे छोटी बहु बिना भाई की व चरित्रवान थी.

एक दिन सभी बहुए मिटटी लाने के लिए टोकरी व खुरपिया लेकर मिटटी लाने पहुच जाती है.

वहा मिटटी खोदते समय एक सर्प निकला.

तो उसी समय सबसे बड़ी बहु ने उसे मारने के लिए छड़ निकाली तथा उसे मारने की कोशिश की.

उसी समय सबसे छोटी बहु ने उसे मना किया ओर कहा इसको मत मारो यह तो निर्दोष है.

यह सुनकर बड़ी बहु ने उसे छोड़ दिया ओर व एक तरफ जाकर बैठ गया.

उन्हें यही इन्तजार करने का वादा कर घर को निकल गईं.

घर जाकर वो अपने काम में इस तरह उलझ गईं कि उन्हें सर्प के साथ किया वादा भी याद नही रहा.
अगले दिन जब उन्हें सर्प कि याद आई तो वह दोडी-दोडी उस जगह पर पहुची जहा वो सांप को रुकने का वायदा कर आई थी.

जब वह उस स्थान पर पहुची तो नागदेवता गुस्से से आग-बबूला हो चुके थे.

उस लड़की ने बोलते ही कहा- भाई नमस्ते, नाग देवता का कुछ गुस्सा ठंडा हुआ.

तूने मुझे भाई कहकर नही बुलाया होता तो तुझे यही डंस लेता.

वो बोली भैया माफ़ कर देना, मै आना भूल गयी.

इस पर सर्प ने कहा कोई बात नही तुम जो चाहती हो दिल खोलकर मांगो.

उस लड़की के आगे-पीछे कोई नही था.

इस पर वह बोली मुझे और कुछ भी नही चाहिए, मुझे अपनी बहिन बना लो. सर्प ने इसे अपनी बहिन मान लिया.

कुछ सप्ताह व्यतीत होने के बाद वही सर्प अपनी बहिन को लेने इन्सान का रूप धारण कर अपनी बहिन के ससुराल गया.

जब उसने बहिन की बात कि तो ससुराल वालों के यह बात गले नही उतर रही थी.

कि आखिर अब इनका भाई कहा से आ गया. इससे पहले तो आपकी बहिन के मुँह से आपके बारे में कुछ नही सुना.

तभी नागदेवता बोले- ये कुछ ही बरस की थी. तब मै किसी काम से बाहर चला गया,

जब वापिस लौटा तो बहिन को खोजते-खोजते काफी समय निकल गया.

इस पर ससुराल वालों ने सर्प के साथ उनकी बहिन को सम्मान के साथ विदा किया.

कुछ दूर तक जाने के बाद सांप भाई ने अपनी बहिन से कहा- बहिना मायके का मार्ग कुछ कठिन हैं.

इसलिए आप से चला ना जाए या थक जाए तो मेरी पुछ पकड़ लेना.

किसी तरह भाई बहिन सर्प के घर पाताललोक पहुचे,

उनके भव्य घर को देखकर बहिन आश्चर्य चकित रह गईं. एक दिन की घटना थी.

सर्प की माँ ने बहिन से कहा बेटी ये दूध ठंडा कर अपने भाई को पिला देना.

बहिन कुछ विचारों में खोई उन्होंने ध्यान ही नही दिया. और वो गर्म दूध सर्प भाई को पिला दिया. दूध बेहद गर्म होने के कारण सर्प का पूरा बदन जल उठा. जिस पर सर्प की माँ नागिन को बेहद क्रोध आया, मगर नाग देवता ने तैसे-वैसे उनको समझाकर शांत किया.

कुछ दिन बाद सर्प ने अपनी बहिन को अपने घर वापिस पहुचाने का निर्णय किया. विदा करते वक्त भाई के घर वालों ने इन्हे बहुत से बहुमूल्य आभूषण और वस्त्र भी भेट किये. सास सुसर इतना धन देखकर ईर्ष्या के साथ से बोली तेरा भाई तो ज्यादा ही धनवान लगता है तुझे तो उससे ओर ज्यादा धन लेना चाहिए यह सुनकर सर्प ने सभी वस्तुए सोने की लाकर रख दी यह सब देखकर परिवार वालों ने फिर तंज कसते हुए कहा अच्छा तो अब इन सब की सफाई के लिए झाड़ू भी सोने का होना चाहिए उसी समय झाड़ू भी सोने का ला दिया

सर्प ने उसके बाद अपनी धर्म की बहिन के लिए हीरे मोतियों का हार ला दिया. जब सेठानी को इससे ईर्ष्या होने लगी. तो सेठ के बहाने उस हार को लेने का नाटक किया. सेठ ने बहु को दरबार में बुलाया और कहा बेटा यह हार तेरी साँस को चाहिए.
अपने भाई द्वारा दिए गये इस हार को देते समय बहिन ने अपने भाई नाग देवता को याद किया. और कहा भैया यह हार मुझे जान से प्यारा हैं, ऐसा करो जब यह किसी और के गले में रहे तो सांप बन जाए, और मेरे लगे में आए तो फिर से मोतियों के हार में तब्दील हो जाए. भाई ने ऐसा ही किया.
जब सेठानी ने वो हार पहना तो अचानक वो सर्प बन गया. इससे सभी घबरा गये और बहु को दंडित करने के निश्चय से बुलाया. और इस धोखे के बारे में पूछा तो उसने बताया ससुर जी इसमे मेरा कोई दोष नही हैं, यह तो हार का ही करामात हैं, जो किसी दुसरे के गले में जाते ही. सांप बन जाता हैं.

जब उस हार को बहु ने अपने गले में पहना तो फिर से अपने रूप में परिवर्तित हो गया. इसी दिन राजा ने उनकी बात पर यकीन कर लिया और उपहार भेट कर उनके घर विदा कर दिया. घर पहुचने पर देवरानियो और जेठानियो ने उसके पति को बहुत चिढाया और भला बुरा कहा, इस पर पति ने गुस्सा होकर सर्प की बहिन से पुछा – ये इतना धन कहा से लाई. तभी वो अपने भाई को याद करने लगी. सर्प देवता उसी समय अपनी बहिन की रक्षा के लिए स्वय प्रकट हुए. बहनोई को प्रणाम कर कहने लगे, जो भी मेरी बहिन को सताएगा उन्हें मै डस लुगा. बस इसी घटना को याद कर नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता हैं.

नागपंचमी पूजा विधि nag panchami puja vidhi in hindi

नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने के कुछ नियमों का प्रावधान किया गया हैं. कहते हैं, इस दिन यदि कोई स्त्री सच्ची भक्ति भांव से सर्प की पूजा करे तो उनकी सभी मनोकामनाए पूरी होती हैं.

  • सुबह उठकर नहाने के बाद अपने घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर सर्प की आकृति बनाए.
  • इसी सर्पआकृति की धूप और पुष्पों से पूजा करनी चाहिए.
  • सर्प देव की पूजा पाठ के बाद इन्द्राणी देवी को अक्षत का भोग लगाए.
  • भूखे दीन-हिनो को इस दिन भोजन अवश्य करवाए.
  • नागपंचमी के दिन दान पुर्न्य करने से सुख सम्पति की कभी कमी नही होती हैं.
  • यदि किसी व्यक्ति के कुल में किसी व्यक्ति की सांप के काटने से अकाल मृत्यु हुई हो तो परिवार का कोई सदस्य यदि पांच नागपंचमी के व्रत करे तो ऐसी घटना उनके कुल में दुबारा घटित नही होगी.

दोस्तों उम्मीद करते हैं, नागपंचमी (happy nag panchami ) के बारे में आपकों दी गयी जानकारी पसंद आई होगी. प्लीज यह लेख आपकों अच्छा लगा हो तो अपने मित्रो के साथ जरुर शेयर करे.

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