पंचायती राज व्यवस्था pdf download: Essay, History In Hindi

पंचायती राज व्यवस्था pdf download: हमारे भारत के इतिहास में पंचायत संस्था एवं इसके सदस्यों को न्याय के लिए ईश्वर के समरूप माना जाता था. गाँव के मुखिया की बात उस क्षेत्र के लोगों के लिए सर्वमान्य थी. स्थानीय प्रशासन, शांति व्यवस्था एवं स्थानीय लोगों के विकास में ग्राम पंचायत का योगदान महत्वपूर्ण था. आज भी भारत का स्वरूप इन्ही गाँवों में माना जाता है. लोकतंत्र की नीव या पहली सीढी ग्राम पंचायतों को ही माना है. इसी लिए भारत में विगत 30 वर्षों से पंचायती राज व्यवस्था को लागू किया गया है. Panchayati Raj System pdf download and all information about gram panchayat, panchayat samiti and jeela parishad giving here.

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Panchayati Raj System pdf download- पंचायती राज व्यवस्था के माध्यम से सुद्रढ़ स्थानीय स्वशासन व पारदर्शिता लाने के लिए भारत सरकार द्वारा एक अलग से पंचायती राज मंत्रालय भी मनाया गया है.

जिसके अधिक देश के ग्रामीण स्थानीय स्वशासन के सभी निकाय कार्यरत है. वैदिक काल में भी ग्राम पंचायतों के होने के पर्याप्त संकेत मिलते है. उस समय की राजव्यवस्था में ग्राम पंचायत सबसे महत्वपूर्ण संस्था थी, जिसका मुखिया ग्रामीनी कहलाता था, वैदिक काल से अंग्रेजो के भारत आगमन तक ये संस्थाए कार्य करती रही.

पंचायती राज व्यवस्था का इतिहास पीडीऍफ़ (history of panchayati raj in india)

अंग्रेजों ने भारतीय स्वशासन की इस व्यवस्था को अपने अधीन ले लिया तथा राज्य कर्मचारियों के सीधे नियंत्रण में इसे रख दिया गया. यही वजह थी कि हजारों सालों से चली आ रही ग्राम पंचायत व्यवस्था अंग्रेजी काल के दौरान पूर्णतया लुप्त हो गई. इन पंचायतों का स्वरूप बेहद जटिल था.

ग्राम की मुख्य पंचायत के अलावा अलग अलग सामाजिक समूहों की अपनी पंचायते हुआ करती थी. जो सामाजिक जीवन के सभी कार्यों में विवादों का निपटारा करती थी, तथा नियमों की अवमानना करने वालों को पूर्व निर्धारित सजा भी दिए जाने का प्रावधान था.

भारत सरकार अधिनियम 1919 (government of india act 1919 in hindi)

1919 के भारत सरकार अधिनियम व 1920 के सुधारों के तहत अंग्रेजी सरकार द्वारा सभी छोटे बड़े प्रान्तों को छोटी छोटी इकाइयों में बाट दिया गया. जिस पर पंचायत समिति का नियंत्रण रखा गया.

ग्राम पंचायतों को जन स्वास्थ्य, स्वच्छता, चिकित्सा. जल निकासी, सड़कों, तालाबों व कुओं सहित कुछ न्यायिक अधिकार भी प्रदान किये गये. मगर उनके पास किसी तरह का विशेषाधिकार नही रखा गया. जिस कारण धीरे धीरे ये नाम-मात्र की प्रशासनिक संस्थाएँ ही बनकर रह गई.

स्वतंत्रता के बाद पंचायती राज व्यवस्था (Panchayati Raj system after independence pdf)

1950 के बाद से भारत में पंचायती राज व्यवस्था को लेकर प्रयासों में तेजी आई. इस दौरान भारतीय संविधान में पंचायतों के गठन का प्रावधान भी किया.

इस बाबत हमारे संविधान के नीति निर्देशक तत्वों में यह स्पष्ट तौर पर कहा गया है. कि राज्य की यह जिम्मेदारी होगी कि वह पंचायत व्यवस्था को सुचारू रूप से चलावें.

साथ ही सता के विकेंद्रीकरण के रूप में इन पंचायतों को वो अधिकार व शक्तियाँ भी प्रदान की जाए जो एक स्वायत स्थानीय स्वशासन के लिए परिहार्य है.

भारतीय इतिहास में पंचायती राज व्यवस्था (Panchayati Raj system in Indian history)

भारतीय इतिहास में पंचायतीराज व्यवस्था को लेकर वर्ष 1956 में बलवंत राय मेहता की अध्यक्षता में मेहता कमेटी का गठन किया गया था. इस कमेटी को पंचायती राज के प्रारूप इनके रूप कार्यों शक्तियों, चुनावी प्रक्रिया के बारे में ढांचा तैयार करने के लिए कहा गया था.

वर्ष 1957 में मेहता कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार के समक्ष प्रस्तुत की. 12 जनवरी 1958 को भारत सरकार द्वारा मेहता कमेटी की अधिकतर सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया, जिनमें सता का विकेंद्रीकरण एक मुख्य पहलू था.

महात्मा गांधी जयंती 2 अक्टूबर 1959 को पंडित जवाहरलाल नेहरु द्वारा राजस्थान की नागौर जिले की भूमि से भारत में पंचायती राज व्यवस्था की नीव रखी.

पंचायती राज व्यवस्था पर निबंध (essay on panchayati raj system in india in hindi)

11 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के बाद भारत में पंचायती राज व्यवस्था को लागू करने वाला आंध्रप्रदेश दूसरा राज्य बना था. बाद कई वर्षों में पंचायती राज के ढाँचे में सुधार को लेकर कई कमेटियों का गठन किया गया

जिनमें अशोक मेहता कमेटी, यशपाल कमेटी, सिन्हा कमेटी मगर भारत में पंचायतीराज का स्वरूप बलवंतराय मेहता कमेटी के आधर पर ही लागू है.

सविधान के द्वारा इसे सवैधानिक रूप देने के लिए सरकार द्वारा वर्ष 1993 में 73 वें व 74 वें संशोधन द्वारा इसे वैधानिक रूप दिया गया है.

73 वें संविधान संशोधन के तहत त्रिस्तरीय ढाँचे में महिलाओं के लिए भी अलग से 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई. पंचायतों का कार्यक्रम 5 वर्ष रखा गया, स्थानीय स्वशासन में 74 वाँ संविधान संशोधन नगरीय शासण व्यवस्था से जुड़ा है.

पंचायती राज व्यवस्था pdf download

जिसके अनुसार शहर की आबादी के अनुसार उसे नगरपालिका, नगर निगम एवं नगर परिषद् तीन निकायों में विभक्त किया जाएगा. शहरी निकाय के लिए महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत व अनुसूचित जाति व जनजाति के समुदायों के प्रतिनिधित्व भी दिया गया है. इनका कार्यकाल भी पांच वर्षों का रखा गया है.

संविधान की 11 वीं अनुसूची में कई रोजमर्रा से जुड़े विषयों को शामिल किया गया हैं, जिनमें कृषि, भूमि सुधार, लघु सिंचाई, पशुपालन, मछली पालन, खादी ग्रामोद्योग आदि रखे गये है.

इन विषयों पर ग्राम पंचायत स्तर पर पंचायतों को व नगरीय स्वशासन की इकाई को इन पर कानून बनाने का अधिकार होगा.

ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद् स्थानीय स्वशासन की तीन मुख्य इकाईयाँ है. जिनमें ग्राम पंचायत सबसे निम्न स्तर पर व जिला परिषद् सर्वोच्च स्तर की इकाई है.

पंचायती राज की व्यवस्था

पंचायत समिति या तालुका इन दोनों इंकाईयों के मध्य समन्वय का कार्य करती है. छोटे छोटे गाँवों के समूह को मिलाकर ग्राम पंचायत का, ग्राम पंचायतों से पंचायत समिति का, व जिलें की विभिन्न पंचायत समिति इकाइयों को मिलाकर जिला परिषद का गठन किया जाता है. 18 वर्ष की आयु से अधिक के सभी व्यक्ति ग्राम सभा के सदस्य होते है.

ग्राम सभा द्वारा ही निर्धारित कार्यकाल समाप्त होने पर पंचायत सदस्यों का निर्वाचन किया जाता है. एक प्रधान, पंचायत के सरपंच व वार्ड सभा के पंचों का चुनाव जनता द्वारा प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के माध्यम से किया जाता है.

पंचो की अधिकतम संख्या 5 से 15 तक हो सकती है. ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला परिषद् के सदस्यों का कार्यकाल पांच वर्ष तक का होता है.नागरिक सुविधाएं, समाज कल्याण व विकास के कार्य इन पंचायतों के माध्यम से ही संपादित किये जाते है.

ग्राम पंचायत के कार्य (Work of Gram Panchayat)

नागरिकों की सुविधा में ये ग्राम पंचायत के कार्य आते है.

  • नागरिकों के उत्तम स्वास्थ्य व स्वच्छता का प्रबंध
  • गंदे पानी की निकासी की पर्याप्त व्यवस्था
  • स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाना
  • सड़क निर्माण व मरम्मत का कार्य
  • रोड लाइट की निगरानी व व्यवस्था
  • प्राथमिक शिक्षा का प्रबंध

इनके अतिरिक्त ग्राम पंचायत को समाज कल्याण से जुड़े कई कार्य भी करने होते है जो ये है.

  • जन्म मृत्यु पंजीकरण
  • कृषि विकास व पशुपालन
  • सड़क, नाली, तालाब पुस्तकालय, अस्पताल, सामुदायिक सभा भवन का निर्माण व देखरेख

भारत में पंचायती राज व्यवस्था का मूल्यांकन

यदि भारत में पंचायती राज व्यवस्था के अब तक के योगदान व कार्यप्रणाली को देखे तो निश्चय ही जिन उद्देश्य के लिए इन संस्थाओं का गठन किया गया था, उनमें आंशिक सफलता ही प्राप्त हो पाई है. राजनीती का दुष्प्रभाव का असर इन स्थानीय संस्थाओं पर भी नजर आता है.

कई बुरे नतीजों का कारण यह व्यवस्था ही रही है जिनमे जातिवाद में वृद्धि, लोगों में आपसी दुश्मनी, चुनावों के समय हिंसक घटनाएं आज इसके औचित्य पर सवाल खड़ा कर रही है.

इस दिशा में सरकार को ओर प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है, जिससें गाँवों के लोगों का विकास भी हो सके तथा उन्हें शहरों की ओर पलायन न करना पड़े.

इसके .लिए ग्रामीणों को गावो में ही रोजगार उपलब्ध कराने की आवश्यकता थी इन उददेश्यों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी रोजगार गारटी योजना की शुरुआत की इसके कार्यान्वयन में ग्राम की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है भारत गाँवो का देश हैं.

एंव ग्राम विकास में ग्राम पंचायत की मुख्य भूमिका होती है. इसलिए ग्राम पंचायत का सुचारू रूप से कार्य करना न केवल गाँवो बल्कि पुरे देश के हित के लिए भी आवश्यक है.

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