पत्नी की तारीफ़ शायरी – Biwi Ki Tareef Shayari in Hindi- Beautiful tareef shayari in two lines

पत्नी की तारीफ़ शायरी – Biwi Ki Tareef Shayari in Hindi- Beautiful tareef Shayari in two lines: भार्या, वाइफ, पत्नी, बीबी जो भी कहे वों आपके जीवन का मजबूत सहारा होती हैं. जो लोग पत्नी की तारीफ करते है जमाना उन्हें कायर कहता हैं, मगर ये कहाँ तक उचित हैं क्या हम महिलाओं का ऐसा सम्मान करते है. जब आप अच्छा काम करते है तब आपकी भी तारीफ होती है फिर पत्नी की तारीफ करने वाले कायर कैसे. पत्नी की तारीफ़ शायरी में आपकों एक कहानीबद्ध दो लाइन शायरी पेश की जा रही हैं.  Biwi Ki Tareef ShayariBeautiful tareef shayari के रूप में आप इसे सोशल मिडिया पर अपलोड कर सकते हैं, अपनी पत्नी को सुनकर उन्हें इम्प्रेश कर सकते हैं.

पत्नी की तारीफ़ शायरीपत्नी की तारीफ़ शायरी

मै लेटा हुआ था, मेरी पत्नी मेरा सिर
सहला रही थी।
मै धीरेधीरे सो गया।
जागा तो वो गले पर विक्स लगा रही थी।
मेरी आख खुली तो उसने पूछा कुछ आराम मिल रहा है?
मैने हा में सिर हिलाया। तो उसने
पूछा कि खाना खाओगे?

मुझे भूख लगी थी, मैने कहा, “हा।”
उसने फटाफट रोटी, सब्जी, दाल, चटनी, सलाद
मेरे सामने परोस दिए, और आधा लेटे- लेटे मेरे मुह मे
कौर डालती रही।

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मैने चुपचाप खाना खाया, और लेट गया।
पत्नी ने मुझे अपने
हाथो से खिला कर खुद को खुश महसूस किया और
रसोई मे चली गई।
मै चुपचाप लेटा रहा। पति पत्नी का रिश्ता शायरी - Pati Patni Ka Rishta Shayari

पति पत्नी का रिश्ता शायरी – Pati Patni Ka Rishta Shayari

सोचता रहा कि पुरुष भी कैसे होते है?
कुछ दिन पहले मेरी पत्नी बीमार थी, मैने कुछ नहीं किया था।
और तो और एक फोन करके उसका हाल भी नही पूछा।
उसने पूरे दिन कुछ
नही खाया था,

Shayari on Beauty, Tareef Shayari, Praise Shayari
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लेकिन मैने उसे ब्रेड परोस कर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा था।
मैने ये देखने
की कोशिश भी नही की कि उसे वाकई
कितना बुखार था।
मैने ऐसा कुछ नहीं किया कि उसे लगे
कि बीमारी मेवो अकेली नही।

पत्नी की तारीफ़ शायरी – Biwi Ki Tareef Shayari in Hindi- Beautiful tareef shayari in two lines

लेकिन मैने उसे ब्रेड परोस कर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा था।
मैने ये देखने
की कोशिश भी नही की कि उसे वाकई
कितना बुखार था।
मैने ऐसा कुछ नहीं किया कि उसे लगे
कि बीमारी मेवो अकेली नही।

लेकिन मुझे सिर्फ जरा सी सर्दी हुई थी, और वो मेरी मां बन गई थी।
मै सोचता रहा कि क्या सचमुच महिला को भगवान एक अलग दिल देते है?
महिलाओ में जो करुणा और ममता होती है
वो पुरुषो में नही होती क्या?
सोचता रहा, जिस दिन मेरी पत्नी को बुखार था,

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उस दोपहर जब उसे भूख लगी होगी और वो बिस्तर से उठ न पाई होगी,
तो उसने भी चाहा होगा कि काश उसका पति उसके पास होता?
मै चाहे जो सोचू, लेकिन मुझे लगता है
कि हर पुरुष को एक जनम मे
औरत बन कर ये समझने की कोशिश
करनी ही चाहिए कि सचमुच कितना मुश्किल होता है,
औरत को औरत ,,होना।
मां होना, बहन होना, पत्नी होना ,,

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