बर्फ क्यों नहीं पिघलती | हिंदी कविता संग्रह

बर्फ क्यों नहीं पिघलती | हिंदी कविता संग्रह

बर्फ क्यों नही पिघलती
जमीन की सतह के नीचे
इतनी गर्मी इतना लावा
फिर भी बर्फ क्यों नहीं पिघलती
हवा के मन में
इतनी बैचेनी
इतना तनाव/इतनी घुटन
फिर भी बदली क्यों नही बरसती
हर ओर
धोखा/झूठ/फरेब
हर आदमी टटोलता है
दूसरे की जेब
फिर भी रोशनी की किरण क्यों नही निकलती
सोचता हूँ
तो आँखों में
रेत का किरकिरापण उभर आता है
और मन
किसी अतल में डूब जाता है.

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