बहुला चौथ व्रत कथा विधि महत्व हिंदी में | Bahula Chauth (Bol Chauth) Vrat Katha Puja Vidhi

बहुला चौथ व्रत कथा विधि महत्व हिंदी में | Bahula Chauth (Bol Chauth) Vrat Katha Puja Vidhi

भाद्रपद कृष्ण चौथ को यह व्रत मनाया जाता हैं. इस व्रत को माताएं पुत्रों की रक्षा के लिए मनाती हैं. इस दिन केवल गेहूं चावल का भक्षण नही करना चाहिए. गौ के दूध पर उसके बछड़े का अधिकार माना जाता हैं. गाय तथा सिंह की मिट्टी की मूर्ति बनाकर पूजन करने का प्रचलन हैं.

Bahula Chauth (Bol Chauth) Vrat Katha Puja Vidhi

बहुला चौथ सावन माह के कृष्ण पक्ष में नाग पंचमी से ठीक एक दिन पहले मनाई जाती हैं.  वर्ष 2018 में यह व्रत 29 अगस्त बुधवार को हैं. पिछले साल संकट चतुर्थी का पर्व ११ अगस्त को था. यहाँ आपको बहुला चतुर्थी 2018 व्रत कथा विधि व महत्व के बारे में बता रहे हैं.

बहुला चतुर्थी मुहूर्त (Bahula Chaturthi Muhurat) –

भादों की इस कृष्ण चतुर्थी को संकट चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता हैं. इस दिन गायों की पूजा की जाती हैं तथा गौ उत्पादों का सेवन निषेध माना जाता हैं. इस दिन व्रत करने से सुहागन स्त्रियों के पति को लम्बी उम्रः, निसंतान स्त्री को सन्तान की प्राप्ति होती हैं.

चतुर्थी शुरुआत 29 अगस्त 2018 सुबह 00:33
चतुर्थी समाप्ति 29 अगस्त 2018 रात 23:57
बहुला चौथ पूजन का समय तिथि मुहूर्त शाम को18:46 से 19:13

बहुला चौथ की कथा (Bahula Chauth Vrat Katha ) –

गोपालक के नाम से जाने जाने वाले भगवान श्रीकृष्ण का बहुला चौथ से संबंध माना जाता हैं. कृष्ण गोकुल गाँव की गायें चराया करते थे. गोपियों के साथ रास लीला और गौ चरण का कार्य इनकी दिनचर्या थी. गोकुल गाँव के सैकड़ों ग्वाले कृष्ण के साथ गायें चराने जाया करते थे.

नन्द बाबा की गायों में कृष्ण को एक अति प्रिय गाय थी, जिसका नाम था बहुला. बहुला नाम की गाय और उसके बछड़े को भगवान सबसे अधिक प्रेम करते थे. पौराणिक कथा के मुताबिक़ एक बार एक बार कृष्ण सिंह का रूप धारण कर बहुला को मारने के लिए रोक देता हैं.

बहुला अपने बछड़े के भूखे होने की विनती वनराज से करती हैं. वह कसम खाती हैं कि वो बछड़े को दूध पिलाकर अपना वचन पूर्ण करने वापिस आ जाएगी. बहुत देर तक वार्तालाप के बाद आखिर सिंह बहुला की बात मान लेता हैं तथा उन्हें बछड़े को दूध पिलाने के लिए जाने की अनुमति दे देता हैं.

बहुला अपने बछड़े को आखिरी बार दूध पिलाकर लाड दुलार कर सिंह को दिए गये वचन को पूर्ण करने वहां पहुच जाती हैं. बहुला को देखकर शेर से कृष्ण अपना रूप धारण कर कहते हैं. बहुला तुम मेरी परीक्षा में सफल हुई. आज के बाद मानव जाति आपके उपकारों के लिए सावन की कृष्ण चतुर्थी को बहुला चतुर्थी के रूप में मनाकर आपकी पूजा करेगें.

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