बाल अधिकार एवं बाल संरक्षण | Child Rights In Hindi

बाल अधिकार एवं बाल संरक्षण | Child Rights In Hindi bal adhikar Children’s rights Hindi essay 10 child rights points Hindi language Wikipedia

बालक (Children) समाज एवं राष्ट्र की सम्पति है. उसके विकास से न केवल उसका बल्कि उसके परिवार समाज और राष्ट्र का भविष्य भी जुड़ा हुआ है. बालक के प्रति हमारे व्यवहार, उसकी शिक्षा, उसके स्वास्थ्य, बच्चों के अधिकार (Child Rights In Hindi) पर उनके व्यक्तित्व का विकास निर्भर करता है. इस कारण बालक की स्थति के सम्बन्ध में हमे अवश्य ही विचार करना चाहिए.समाज के विभिन्न वर्गों की तरह बालकों के भी बाल अधिकार है. यह सही है कि वह आयु में छोटा है, उसे अपने बाल अधिकारों का ज्ञान नही है.

बालकों की उपेक्षा करने से समाज को ही नुकसान है. भविष्य में सुखद समाज के लिए बच्चो के अधिकारों की रक्षा करना अति आवश्यक है. इस कारण प्रगतिशील समाज बालकों के विकास एवं उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा जागरूक रहता है. बाल अधिकार एवं बाल संरक्षण के इस लेख में हम आगे बाल अधिकार क्या है, कितने और कौन कौनसे अधिकार बाल अधिकार होते है, बाल अधिकारों की लिस्ट, बाल अधिकार हनन, बाल दुर्व्यवहार क्या है, बच्चों के कर्तव्य के बारे में Child Rights In Hindi इस लेख में बात करेगे.

बाल अधिकार एवं बाल संरक्षण, Child Rights In HindiChild Rights

संयुक्त राष्ट्र संघ एवं भारत सरकार ने बच्चों के अधिकार एवं नीतियों का निर्धारण किया है. बच्चों को उनके जन्म से ही उनकी पहचान, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन और समानता के Child Rights बिना किसी जाति धर्म और बिना लिंग भेद स्वतः ही प्राप्त हो जाते है.

बाल अधिकार क्या है (what are child rights in hindi)

बाल अधिकार संरक्षण आयोग कानून 2005 के अनुसार बाल अधिकार में बालक/बालिकाओं के वे समस्त अधिकार शामिल है जो 20 नवम्बर 1989 को संयुक्त राष्ट्र संघ के बाल अधिकार अधिवेशन द्वारा स्वीकार किये गये थे तथा जिन पर भारत सरकार ने 11 दिसंबर 1992 में सहमती प्रदान की थी.

संयुक्त राष्ट्र संघ बाल अधिकार समझौते के तहत बच्चों को दिए गये अधिकारों को चार प्रकार के अधिकारों में वर्गीकृत किया गया है.

बाल अधिकारों की सूची (List of child rights)

  • जीने का अधिकार- बच्चों के जीने का अधिकार उनके जन्म के पूर्व ही आरम्भ हो जाता है. जीने के अधिकार में दुनिया में आने का अधिकार, न्यूनतम स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करने, भोजन, आवास, वस्त्र पाने का अधिकार तथा सम्मान के साथ जीने का अधिकार शामिल है.
  • विकास का अधिकार- बच्चों को भावनात्मक मानसिक तथा शारीरिक सभी प्रकार के विकास का अधिकार है. भावनात्मक विकास तब संभव होता है जब अभिभावक संरक्षक, समाज, विद्यालय और सरकार सभी बच्चों की सही देखभाल करे और प्रेम दे. मानसिक विकास उचित शिक्षा और सीखने द्वारा तथा शारीरिक विकास मनोरंजन खेलकूद तथा पोषण द्वारा संभव होता है.
  • संरक्षण का अधिकार- बच्चें को घर तथा अन्यत्र उपेक्षा, शोषण, हिंसा तथा उत्पीड़न से संरक्षण का अधिकार है. विकलांग बच्चें विशेष संरक्षण के पात्र है. प्राकृतिक आपदा की स्थति में बच्चों को सबसे पहले सुरक्षा प्राप्त करने का अधिकार है.
  • भागीदारी का अधिकार- बच्चों को ऐसें फैसले या विषय में भागीदारी करने का अधिकार है जो उसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है. बच्चों की आयु व परिपक्वता के अनुसार इस भागीदारी में अनेक स्तर हो सकते है.

बाल अधिकार हनन क्या है (What is Child Abuse & child rights Violence in India)

हम बाल अधिकार (child rights) के हनन को को इसके विभिन्न रूपों के माध्यम से समझ सकते है, बाल अधिकारों का हनन निम्न रूपों में देखा जाता है.

  1. कन्या भ्रूण हत्या- समाज में व्याप्त रूढ़िवादिता, अपरिपक्व मानसिकता एवं पुत्र मोह की इच्छा में बड़ी संख्याओं में बालिकाओं को जन्म से पूर्व ही गर्भ में मार दिया जाता है. सरकार द्वारा बाल अधिकार हनन की रोकथाम के लिए पीसी एंड एन डी टी कानून 1994 के तहत दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही की जाती है. भारत सरकार द्वारा बालिकाओं के संरक्षण के लिए ”बेटी बचाओं बेटी पढाओं” अभियान संचालित किया जा रहा है.
  2. बाल विवाह- समुचित शिक्षा एवं जन चेतना की कमी के कारण बड़ी संख्या में विशेषत ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह सम्पन्न होते है, यह पुरानी सामाजिक कुरूति है, इससे बच्चों के अधिकारों का हनन होता है. बाल विवाह से बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य, पोषण व शिक्षा पाने के अधिकार के हनन के साथ ही हिंसा उत्पीड़न व शोषण के बचाव के मूलभूत अधिकारों का भी हनन होता है. कम उम्र में विवाह करने से बच्चों के शरीर एवं मस्तिष्क दोनों को गम्भीर एवं घातक खतरे की सम्भावना रहती है. कम उम्र में विवाह से शिक्षा के मूल अधिकार का भी हनन होता है, इसकी वजह से बहुत सारे बच्चे अनपढ़ और अकुशल रह जाते है. इससे उनके सामने अच्छे रोजगार पाने एवं बड़े होने पर आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने की ज्यादा सम्भावना नही बचती है, बाल अधिकार में बाल विवाह की प्रभावी रोकथाम हेतु बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 कार्य कर रहा है.
  3. बाल श्रम- आज भी हमारे समाज में बड़ी संख्या में बच्चे शिक्षा प्राप्त करने की बजाय दुकानों, कारखानों, घरों, ढाबो, चाय की दुकानों, ईट भट्टों और खेतों आदि विभिन्न प्रकार के कामों में लगे हुए है, उनसे लगातार काम लेकर बाल अधिकारों का शोषण किया जाता है. 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को श्रम कराने  सूचना मिलने पर किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2000 के तहत कार्यवाही की जाती है.
  4. बाल यौन हिंसा- भारत सरकार द्वारा 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ होने वाली यौन हिंसा की रोकथाम के लिए लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 लागू किया गया है.
  5. बाल तस्करी- बाल श्रम, यौन हिंसा एवं अन्य प्रयोजन के लिए पैसे देकर, बहला फुसलाकर, डरा धमकाकर, शक्तियों का दुरूपयोग करके बालक/बालिकाओं की तस्करी की जाती है. ऐसें अपराधिक कार्यों की रोकथाम के लिए दंडात्मक कानून बनाएं गये है.
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