बाल विवाह के कारण परिणाम और रोकने के उपाय | Measures and Prevention Measures Due to Child Marriage

Child Marriage (बाल विवाह) कम उम्र में बच्चों की शादी कर देने से उनका स्वास्थ्य, मानसिक विकास और खुशहाल जीवन पर असर पड़ता है. कम उम्रः में शादी करने से पुरे समाज में पिछड़ापन आ आता है. जो अंततः समाज की प्रगति में बाधक बनता है. कानून में शादी करने की भी एक उम्रः तय की गई है. अगर शादी करने वाली लड़की की उम्रः 18 साल से कम हो, या लड़के की उम्रः 21 साल से कम हो तो ऐसा विवाह बाल विवाह कहलाएगा.

बाल विवाह के सामाजिक कारण (Social causes of child marriage)

धार्मिक मान्यता-हमारा देश सामाजिक विविधताओं से परिपूर्ण है, जहाँ अनेक जाति, धर्म के लोग निवास करते है जिनकी अलग अलग प्रथाएं एवं परम्पराएं है. भारतीय समाज धार्मिक मान्यताओं एवं परम्पराओं को अधिक महत्व देता है जो बाल विवाह की प्रचलित रीति का सबसे बड़ा कारण है.

बाल विवाह के ऐतिहासिक कारण (Historical reasons for child marriage)

बाल विवाह के पीछे ऐतिहासिक कारण भी रहे है. भारत पर विदेशी ताकतों का हमला हुआ. बहिन बेटियों की इज्जत की खातिर बचपन में ही लड़कियों की शादी की जाने लगी. इस प्रचलन ने कालांतर में एक दृढ रुढ़ि का रूप धारण कर लिया. इसकी वजह से आज भी बड़े पैमाने पर बाल विवाह होते है.

  • महिलाओं से छेड़छाड़ एवं बढ़ते यौन अपराध-कारण कुछ भी हो लेकिन वास्तविकता यह है कि यहाँ कानून व्यवस्था की स्थति सन्तोषजनक नही है. महिलाओं के विरुद्ध छेड़छाड़ एवं यौन अपराधों की घटनाएं दिनोंदिन बढ़ रही है. जिससे हर बेटी का बाप डरा सहमा और आशंकित रहता है. ऐसे वातावरण में वह अपनी बेटी को बाहर पढ़ने भेजने के लिए भी डरता है. इसी डर से निजात पाने के लिए उसे लड़की की छोटी उम्रः में शादी कर देना सुरक्षित लगता है. जिसकी परिणिति बड़े पैमाने पर बाल विवाह में होती है.
  • माँ बाप के मन में बेटी के चरित्र की चिंता-समाज में लड़के के चरित्र की अधिक परवाह नही है. लेकिन लड़की की शादी उसके अच्छे चरित्र पर निर्भर करती है. फिल्म टीवी इन्टरनेट जैसे साधनों ने सब बच्चों तक पहुचा दी है. उनके मन में भोग विलास के प्रति आकर्षण बढ़ा दिया है. पढ़ाई लिखाई या रोजगार के सिलसिले में बच्चियों को बाहर जाना पड़ता है. ऐ\सी स्थति में माँ बाप लड़की के चरित्र के प्रति आशंकित रहते है. और उन्हें इस दिशा में एकमात्र रास्ता छोटी उम्रः में लड़की की शादी करने के रूप में दिखता है. जिससे बाल विवाहों में वृद्धि होती है.
  • घटता लिंगानुपात-प्रसव पूर्व लिंग परीक्षण एवं कन्या भ्रूण हत्या के प्रचलन के परिणामस्वरूप हमारे यहाँ लड़का लड़की के अनुपात में कमी आ रही है. कुवारे लड़को की संख्या बढ़ रही है, जिससे लड़को की शादी होने की चिंता उनके माँ बाप के मन में रहती है. वे जल्दी से जल्दी अपने बेटे की शादी के लिए अपने रिश्तेदारों व मिलने वालों पर दवाब डालते है. जिसकी परिणिति भी कई बार बाल विवाह के रूप में सामने आती है.
  • जातिगत परम्पराएं- कुछ जातियों में ऐसी परिपाटी है कि दो परिवार एक दुसरे की लड़की की शादी आपस में अपने अपने परिवार के लड़को के साथ कर देते है. यह परिपाटी भी कम उम्र में लड़की की शादी करने की वजह बनती है.

बाल विवाह के आर्थिक कारण (Financial reasons for child marriage)

  • खर्चीली शादी-हमारे समाज में गहरी आर्थिक विषमता है. गरीब अमीर की खाई बढ़ती जा रही है. अमीर अपनी बेटियों की शादी में बेहताशा खर्चा करते है. दिखावा भी करते है. आर्थिक स्थति में भले ही जमीन आसमान का अंतर हो लेकिन गरीब अमीर माँ-बाप के मन में अपनी बेटी के प्रति प्रेम में कोई अंतर नही होता है. ऐसी दशा में गरीब माँ बाप की इच्छा भी होती है कि वह अपनी बेटी की शादी धूमधाम से करे, लेकिन आर्थिक स्थति इसकी इजाजत नही देती, इसलिए वह अपनी बेटी की शादी जल्दी से जल्दी सामूहिक विवाह सम्मेलन में या आपसी रिश्तेदारी में करने के लिए विवश होता है. इसकी परिणिति बड़े पैमाने पर बाल विवाह के रूप में सामने आती है.
  • गरीबी-हमारे समाज का बड़ा वर्ग गरीब है जिनके सामने अपना पेट पालने का संकट है. ऐसी दशा में लड़की को उनके माँ बाप पराया धन मानते है. और उनके खान-पान, पढ़ाई-लिखाई में चाहते हुए भी सक्षम न होने के कारण जल्दी से जल्दी बेटी की शादी करने पर विवश हो जाते है. जिससे बाल विवाह की समस्या को और अधिक बढ़ावा मिलता है.
  • शादी की एवज में धन लेने की प्रथा-कुछ जनजातियों में आज भी आर्थिक विषमता के चलते या पुरानी परम्पराओं के कारण बेटी की शादी की एवज में धनराशी लेने का रिवाज है. जिसकी वजह से लड़की के माँ-बाप जल्दी से जल्दी धन प्राप्त करने की नियत से छोटी उम्र में ही लड़की की शादी कर देते है. यह भी बाल विवाह को बढ़ावा देने वाले कारणों में से एक है.

बाल विवाह के दुष्परिणाम/प्रभाव (Side Effects / Effects Of Child Marriage)

  • शिक्षा में अवरोध-कम उम्र में शादी होने पर बालक व बालिका की पढ़ाई बंद हो जाती है. लड़की के शिक्षित नही होने के दुष्परिणाम पूरे परिवार पर पड़ता है. वह पत्नी व माँ के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन अच्छी तरह से नही कर पाती है. अपने बच्चे की प्रथम गुरु होने की भूमिका में भी वह विफल रहती है.अशिक्षित बालक अपने परिवार का अच्छी तरह से पालन-पोषण करने में असमर्थ रहता है. यह स्थति समाज और देश के लिए प्रतिगामी है.
  • व्यक्तित्व विकास में अवरोध-छोटी उम्र में शादी हो जाने पर बालिका कई पारिवारिक और सामाजिक बंधनों में बंध जाती है. व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक खेलकूद एवं विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में स्वतंत्रतापूर्वक भाग लेने के अवसर समाप्त हो जाते है. इससे बाल वधु कूपमंडूक बनकर रह जाती है. यह स्थति परिवार व समाज के साथ साथ देश के विकास में भी बाधक है. कम उम्र में विवाह होने पर लड़का भी उच्च शिक्षा प्राप्त नही कर पाता है और उसके व्यक्तित्व का विकास भी बाधित होता है.
  • खराब स्वास्थ्य बढ़ती मातृ-शिशु मृत्यु दर-कम उम्र में शादी हो जाने पर लड़की पूरी तरह ससुराल में घुलमिल नही पाती है. अधिकाँश परिवारों में बहू व बेटी में भारी भेदभाव किया जाता है. यहाँ तक कि खानपान में भी भेदभाव दुखद वास्तविकता है. कम उम्र में गर्भधारण और प्रसव लड़की के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालते है. कई बार कम उम्र में माँ बनने पर अधिकाश शिशुओं की मृत्यु हो जाती है. भारत में और विशेषकर राजस्थान में शिशुओं की मृत्यु दर काफी अधिक है. जो सीधे तौर पर बाल विवाह का परिणाम है. इसी प्रकार कम उम्र में लड़की के माँ बनने पर कई बार उसकी भी मृत्यु हो जाती है. जिससे प्रसव के दौरान मातृ मृत्यु काफी अधिक चल रही है जो समाज के लिए घातक है.
  • अविकसित बच्चे- कम उम्र में बनने पर बच्चा भी पूरी तरह स्वस्थ पैदा नही होता है. आगे चलकर भी उसका पूरा विकास नही हो पाता है. जिससे वह अपने परिवार व समाज में पूरा योगदान निभाने में असमर्थ होता है. बल्कि कई तरह की बीमारियों से ग्रसित हो जाने के कारण समाज पर बोझ बनता है.

बाल विवाह की रोकथाम हेतु कानून / उपाय (Lows/Measures for Prevention of Child Marriage)

बाल विवाह को रोकने एवं बाल विवाह को करने वाले लोगों को दंडित करने के लिए समय समय पर कानून बने है. वर्तमान में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 प्रभाव में है. जिससे बाल विवाह को रोकने और बाल विवाह करने व कराने वालों को कठोर दंड दंडित करने के प्रावधान है. इस कानून के मुख्य प्रावधान निम्न है.

  • 18 साल से अधिक उम्र का लड़का अगर 18 साल से कम उम्र की लड़की से शादी करता है तो उसे 2 साल तक की कड़ी कैद या एक लाख रूपये तक का जुर्माना या फिर दोनों सजाएं हो सकती है.
  • शादी करने वाले जोड़ो में से जो भी बाल हो, शादी कोर्ट रद्द घोषित करवा सकता है. शादी के बाद कभी भी कोर्ट में अर्जी दी जा सकती है, पर बालिग़ हो जाने के दो साल बाद नही.
  • जो भी बाल विवाह सम्पन्न करे या करवाएं जैसे- पंडित, मौलवी, माता-पिता, रिश्तेदार, दोस्त इत्यादि, उन्हें दो साल तक की कड़ी सजा या एक लाख का जुर्माना या दोनों हो सकते है.
  • जिस व्यक्ति की देखरेख में बच्चा है यदि वह बाल विवाह करवाता है, चाहे वह माता-पिता, अभिभावक या कोई और हो उसे दो साल तक की कड़ी सजा या एक लाख रूपये तक का जुर्माना अथवा दोनों भी हो सकते है.
  • जो व्यक्ति किसी तरह बाल विवाह को बढ़ावा देता है, या जानबूझकर लापरवाही से उसे रोकता नही , जो बाल विवाह में शामिल हो या बाल विवाह की रस्मों में उपस्थित हो, उसे दो साल तक की कड़ी सजा या एक लाख रूपये का जुर्माना अथवा दोनों हो सकते है.
  • इस कानून में किसी महिला को जेल की सजा नही दी जा सकती, उसे जुर्माना हो सकता है.
  • किसी नाबालिक की शादी उसका अपहरण करके, बहला-फुसलाकर या जोर जबरदस्ती से कही ले जाकर या शादी के लिए शादी की रस्म के बहाने बेचकर या अनैतिक काम के लिए की जाए तो ऐसी शादी भी शून्य मानी जाएगी.

इस कानून में बाल विवाह को रोकने के लिए निम्न प्रावधान किये गये है.

  1. कोई भी व्यक्ति जिसे बाल विवाह की जानकारी हो, अपने जिले के न्यायिक मजिस्ट्रेड को सूचना दे सकते है. जो शादी को रोकने के आदेश दे सकता है.
  2. जिला कलेक्टर /पुलिस  प्रशासनिक अधिकारियोंको भी बाल विवाह को रोकने के लिए जरुरी कदम उठाने की जिम्मेदारी दी गई है.
  3. यह जानकारी थाने में दी जा सकती है.
  4. रोकने के आदेश के बावजूद सम्पन्न की गई शादी शून्य होगी. यानि कानून की नजर में वह शादी नही मानी जाएगी.
  5. सरकार द्वारा बाल विवाह निषेध अधिकारी नियुक्त किये गये है. इनकी जिम्मेदारी बाल विवाह रुकवाने की है.
  6. बाल विवाह को रोकने के आदेश दिए जाने के बाद भी अगर कोई बाल विवाह करवाता है तो उसे दो साल तक की साधारण या कड़ी कैद या एक लाख रूपये का जुर्माना या दोनों हो सकते है.

बाल विवाह पर निबंध (Essay On Child Marriage)

यद्यपि बाल विवाहों को रोकने बाल विवाह करवाने वाले लोगों को दंडित करने के लिए समय समय पर कानून बने है. बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 में बाल विवाह को रोकने और बाल विवाह को करने व कराने वालों को कठोर दंड से दंडित करने के प्रावधान है. हालांकि बाल विवाहों में कमी आई है, लोग बाल विवाह खुलेआम करने से डरते है लेकिन अभी भी बड़े पैमाने पर बाल विवाह हो रहे है.

यह स्थति समाज के लिए चिंताजनक है. इस बुराई को दूर करने के लिए चौतरफा प्रयास किये जाने की आवश्यकता है. विधिक सेवा संस्थाओं को सभी सरकारी विभागों का स्वयंसेवी संगठनो का एवं जनप्रतिनिधियों का साथ व सहयोग लेकर बाल विवाह के विरुद्ध सघन प्रचार व प्रचार करना होगा.

जन जन तक यह बात पहचानी होगी कि बाल विवाह एक कानूनी अपराध है, व्यवस्था ऐसी हो चुकी है कि छुपकर बाल विवाह करने पर भी कानून की नजरो में बचना संभव नही है. यदि बाल विवाह किया तो निश्चित रूप से बाल विवाह करने वाले, करवाने वाले, मदद करने वाले और जानबूझकर सुचना नही देने वाले, कानून की नजरों से नही बचेगे. और निश्चित रूप से दंडित होगे.

प्रचार प्रसार के साथ ऐसी ठोस कार्य प्रणाली तैयार करनी होगी कि यह सिर्फ कागजी कार्यवाही या जुबानी जमा खर्च नही रहे और सभी स्टेक होल्डर अपने दायित्वों का निष्ठां से निर्वहन करे और यह सुनिश्चित करे कि बाल विवाह आयोजित होने से पहले ही निश्चित रूप से रोके जाए. यदि फिर भी कोई बाल विवाह हो तो सम्बन्धित दोषी व्यक्ति कानून के समक्ष लाए जाए और दंडित किये जाए.

यदि हम उपरोक्त व्यवस्था धरातल पर करने में सफल हो जाए तो वह दिन दूर नही जब हमारा समाज बाल विवाह की बुराई से मुक्त होगा.

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