भाई दूज पर निबंध | Essay On Bhai dooj

Essay On Bhai dooj/भाई दूज पर निबंध:- हमारा देश त्यौहारो का देश कहा जाता है, यहाँ हर महीने कोई न कोई पर्व या उत्सव अवश्य मनाया जाता है. भारत के मुख्य त्योहारों में होली, दीपावली, ईद और रक्षाबन्धन की गिनती की जाती है. दीपावली का त्यौहार इनमे सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. जो कार्तिक महीने में पांच दिनों तक मनाया जाता है. जिनका पांचवा दिन भैया दूज का होता है, इसे यम दितीया भी कहा जाता है. यह त्यौहार भाई बहिन के प्रेम पर आधारित है. इसे मनाने के पीछे जुड़ी मान्यता के अनुसार बहिन अपने भाई की सभी विपतियों का हरण कर भाई के दीर्घायु की कामना करती है.

भाई दूज पर निबंध | Essay On Bhai dooj

भाई बहिन के अगाध प्रेम पर आधारित इस भाई दूज के अवसर पर सभी विवाहित बहिने भाई दूज पर अपने भाई को घर आने का न्यौता देती है. साथ ही पूर्ण विधि-विधान के साथ पाठ पूजा कर भाई को प्रेम पूर्वक भोजन करवाती है तथा इस दिन बहिन अपने भाई को तिलक लगाकर उपहारस्वरूप कुछ भेट भी देती है.

जिस तरह रक्षाबंधन के दिन भाई अपने बहिन का आदर सत्कार करता है. भाई दूज के दिन बहिन बचपन से अपने साथ खेलने और साथ में जीवन बिताने वाले भाई के साथ पुराने पलों को याद करती हुई अपना प्रेम प्रकट करती है.

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भाई दूज का पर्व दीपावली के ठीक दो दिन बाद कार्तिक महीने की शुक्ल द्वितीय को मनाया जाता है. इसके साथ ही पंचदिवसीय दीवाली की धूम भी भाई दूज अर्थात यम द्वितीया के दिन समाप्त हो जाती है.

भाई दूज की कथा और मनाने का महत्व (Bhai Dooj Ki Katha Aur Manane Ka Mahatv)

कहा जाता है भगवान् सूर्यदेव (रवि) ने समजना नामक युवती से विवाह किया था. जिन्होंने अपने विवाह के एक साल बाद दौ जुड़वाँ बच्चों को जन्म दिया. रवि ने इनके नाम यम और यमुना रखा. लम्बे समय तक समजना द्वारा अपने पति के साथ न रह पाने के कारण उन्होंने धरती पर रहने का निश्चय किया. मगर वह अपने पति के साथ छाया के रूप में बनी रही. उसी समय उनके पुत्र भी साथ-साथ खाते पीते बड़े हो गये.

उस छाया को समजना से इर्ष्या होने लगी, सूर्यदेव से उनके पुत्रों यम और यमुना को दूर करने के लिए अतः उन्होंने अपने पुत्रो को जन्म दिया और यम और यमुना के साथ पर भेज दिया. यमुना धरती पर आकर नदी के रूप में बहने लगी, तथा यम यमलोक चले गये जहाँ की सता उन्हें प्राप्त हो गई.

कई सालों तक यम और यमुना अलग अलग रहने लगे एक बार यम ने अपनी बहिन से मिलने का निश्चय किया. जब यमुना के घर भाई आए तो उन्होंने ठाठ बाट से उनका स्वागत किया तथा एक बड़ी दावत दी. यह अवसर दीपावली के दौ दिन बाद का था. जब भाई के वापिस जाने का वक्त हुआ तो वह बहिन के पास गये और बोले आपने मेरा बहुत आदर सम्मान किया. इसके बदले में मै आपकों क्या उपहार दू.

बहिन ने कहा मुझे उपहार कुछ नही चाहिए इस दिन प्रत्येक बहिन को उनके भाई के दर्शन सुलभ हो. उन्हें भाई दूज के दिन अपनी बहिन को जरुर याद करना चाहिए. तभी यमराज बोले- बहिन भाई दूज के दिन जो भी भाई अपनी बहिन के लिए भेट लेकर जाएगे, उन्हें स्वस्थ जीवन की प्राप्ति होगी.

भाई दूज की कविता Bhai Dooj Kavita

bhaIdooj kI pooja kar,
karatI hu uska intazaar.

kab aayega mujhse milane ,
kab sajega mera dawaar.

saja kar thaal baithi hu bhai
mishthan aur meve lai Hu Bhai

mat khel mujhse aankh michauli,
pyar se bhar de mere jholi.

kab aayega mere dawaar ,
kab khatam hoga ye intjaar.

भाईदूज की पूजा विधि (Bhai Dooj Puja Vidhi)

भाई दूज के दिन ऐपन का बड़ा महत्व है. जो बहिन स्वयं अपने हाथो से मिट्टी या कागज का मुर्तिरुपी संकेतक तैयार करती है. सुबह जल्दी उठने के पश्चात नहा-धोकर ऐपन जिनमे अधिकतर लोग सात बहिने और उनके एक भाई के संकेत के रूप में आकृतिया तैयार करती है.

पास में रखी लकड़ी की डंडी जिन्हें मूसल कहा जाता है. इससे बिच्छु व कीटों पर प्रहार करती है. प्रतीक के रूप में इस परम्परा के द्वारा बहिन अपने भाई के जीवन में आने वाली सभी समस्याओं को समाप्त कर भाई की दीर्घायु और जिन्दगी में उन्नति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती है.

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