भारत की एकता पर निबंध | Indian Culture In Hindi

भारत की एकता पर निबंध | Indian Culture In Hindi भेद के अस्तित्व को इनकार करना मुर्खता होगी और उसकी उपेक्षा करना अपने आप को धोखा देना है. हमारे समाज में भेद और अभेद दोनों ही है. हमारे पूर्व शासकों ने अपने स्वार्थवंश हमारे भेदों को अधिक विस्तार दिया.

जिससे हमारे देश में फूट की बेल पनपी जिससे भेद निति से उनका उल्लू सीधा हो. हमारे अभेदों की उपेक्षा की गई या उनको नगण्य समझा गया. हममे हीनता की मनोवृति पैदा हो गई

भारत की एकता पर निबंध | Indian Culture In Hindi

देश की नदियाँ जिसे विभाजन रेखाएं भी कहा जाता है हमारी भूमि को उर्वरा और शस्य श्यामला बनाती है. हमारी भौगोलिक इकाई हिमालय पर्वत और सागर से है. उस प्राचीन काल में राष्ट्रीयता की धारा तो अबाधित रही ही है. आंतरिक द्वेष कभी कभी प्रबल हो उठे है,

किन्तु भारतवासी एकछत्र सार्वभौम राज्य से अपरिचित नही थे. राजसूय, अश्वमेघ यज्ञ ऐसे ही राज्य की स्थापना के ध्येय से किये जाते थे. जिसके द्वारा टूटी हुई राष्ट्रिय एकता जुड़कर अविरल धारा का रूप धारण कर लेती थी.

राजनीती की अपेक्षा धर्मं और संस्क्रति मनुष्य के ह्रद्य के अधिक निकट है. यधपि राजनीती का सम्बन्ध भौतिक सुख सुविधाओं से है. फिर भी जनसाधारण जितना धर्म से प्रभावित होता है, उतना राजनीती से नही. हमारे भारतीय धर्मों में भेद होते हुए भी उनमे एक सांस्कृतिक एकता है.

जो उनके अविरोध की परिचायक है. वही तप और त्याग एवं माध्यम मार्ग की संयममयी भावना हिन्दू, बौद्ध, जैन, सिख सम्प्रदायों में समान रूप से विद्यमान है. एक धर्म के आराध्य दुसरे धर्म में महापुरुष के रूप में स्वीकार किये गये है.

भगवान बुद्ध तो अवतार ही माने गये है. कलियुगे कलि प्रथम चरणे बुद्धावतारे कहकर प्रत्येक धार्मिक संकल्प में हम उनका पुण्य स्मरण करते है. भगवान् ऋषभदेव का श्रीमद्भागवत में परम आदर के साथ उल्लेख हुआ है.

जैन धर्म ग्रंथो में भगवान् राम और श्रीकृष्ण को तीर्थकर नही उनसे एक श्रेणी उपर स्थान दिया गया है. अन्य हिदू देवी देवताओं को भी उनके देवमंडल में स्थान मिला है. भारत में अद्भुत प्राय सभी धर्मो के आवागमन में विशवास करते है.

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