भित्ति चित्र कला | विभिन्न प्रकार

भित्ति चित्र कला/wall painting art of india in hindi

  • वील/व्हील

ग्रामीण क्षेत्रों में दीवार पर बनाई जाने वाली महलनुमा आकृति जिसमे बर्तन या घर में काम आने वाली अन्य छोटी मोटी वस्तुएं रखी जाती है.

  • सांझी कला

श्राद्ध पक्ष में कन्याओं द्वारा घर की दीवारों पर सांझियाँ बनाई जाती है. सांझी कला देवी पार्वती का प्रतीक मानी जाती है. इस कला का उद्भव उत्तरप्रदेश के वृन्दावन से माना जाता है. इसके बाद यह राजस्थान में आई. राज्य में केले के पत्तों पर की गई सांझियाँ बेहद प्रसिद्ध है. नाथद्वारा राजसमंद में कदली के भित्ति चित्र खासे लोकप्रिय  है. उदयपुर के मछ्द्र्नाथ मन्दिर में अत्यधिक मात्रा में भित्ति चित्र होने के कारण   इसे सांझिया मंदिर भी कहा जाता है.

  • भराड़ी

भील जनजाति की लोकदेवी जिसके दीवार पर चित्र विवाह के अवसर पर बनाएं जाते है. भराड़ी कहे जाने वाले ये भित्ति चित्र नव दम्पति के भावी जीवन में  सुख संपदा के प्रतीक समझे जाते है.

  • मोण

मेड़ता (नागौर) में मिट्टी के बने बड़े बड़े मटके मोण कहलाते है.

  • हीड़

एक प्रकार से मिट्टी के बने कलात्मक दीपक जिन्हें बच्चे दीपावली के अवसर पर घी /तेल डालकर बूढ़े बुजुर्गो से आशीर्वाद लेने जाते है. यह एक प्रकार की क्षेत्रीय रस्म है.

  • घोड़ाबावसी

आदिवासी क्षेत्रों में मिट्टी के बनने वाले कलात्मक कलात्मक घोड़े जिन्हें लोग अपनी इच्छाओं से जोड़कर रखते है. सम्बन्धित इच्छा पूरी हो जाने पर यह अपनी आराध्य देवी देवताओं को भेंट कर दिए जाते है.

  • कोठया

राजस्थान के ग्रामीण अंचलो में बनने वाली यह एक कलात्मक मिटटी या गोबर की आकृति होती है. जो घरेलू वस्तुओ को सुरक्षित रखने के काम आती है.

  • सोहरिया

यह भी एक प्रकार का मिट्टी से बना भंडार गृह होता है. जिसमे खाने से जुड़ी सामग्री सुरक्षित रखी जाती है.

  • ओका नोका गुणा

ओरी चेचक या छोटी माता का रोग हो जाने पर इस बीमारी के निदान के लिए गाँवों में बनने वाली मिट्टी या गोबर की एक विशेष आकृति जिसका शीतला माता का पूजन भी किया जाता है.

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