महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना | Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act

Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act रोजगार के बिना किसी भी व्यक्ति के जीवन का निर्वहन असम्भव हैं, लोकतंत्र में अपने सभी नागरिको को रोजगार के अवसर मुहैया करवाना सरकारों का दायित्व हैं. इसी कड़ी में भारत सरकार ने एक जनकल्याण योजना आरम्भ की जिन्हें महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना यानि मनरेगा (MNREGA) कहा जाता हैं. प्रत्येक आम नागरिक को इस योजना के तहत उनकी क्षमता के अनुसार रोजगार के अवसर संभव हो पाए हैं. भारत में अपराध की जड़ बेरोजगारी को समझा जाता हैं, एक बेरोजगार व्यक्ति से समाज के लिए अच्छे कार्य की उपेक्षा नही की जा सकती हैं, इस दिशा में मनरेगा बेहद कारगार साबित हुई हैं.

Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act

महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act )

तत्कालीन प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना की शुरुआत 2 फरवरी 2006 को आंध्रप्रदेश के अनंतपुर जिले से शुभारम्भ की. महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के कार्य को कई चरणों के तहत आरम्भ किया गया, जिसका पहला चरण सत्र 2006-07 से शुरू हुआ, जिनमे देश के 27 राज्यों के ऐसे 200 जिलो का चयन किया गया. जहाँ रोजगार की बदहालात थे. अगले ही वर्ष महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना का दूसरा चरण सत्र 2007-08 से आरम्भ किया गया. इस बार देशभर के 130 शहरों को इसके लिए चुना गया.

वर्ष 2008 में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना एक योजना की बजाय एक अधिनियम के रूप में पारित करवाया गया, जिनके तहत अब न सिर्फ ये एक कार्यक्रम रहा बल्कि लोगों को गारंटी के साथ रोजगार अवसर उपलब्ध करवाने का कार्य किया गया.  इन नए प्रावधानों को जोड़ने के साथ ही 2 अक्टूबरः 2009 को इस योजना का नाम राष्ट्रिय रोजगार गारंटी अधिनियम National Rural Employment Guarantee Act (नरेगा) से बदलकर महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (मनरेगा) कर दिया गया.

मनरेगा योजना क्या है (What Is Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act)

इस योजना के तहत सभी ग्रामीण क्षेत्रोँ में रहने वाले प्रत्येक परिवार के कम से एक सदस्य को सरकार के इस अधिनियम द्वारा 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाती हैं. चाहे दो परिवार के दो या तीन सदस्य भी इस 100 दोनों में विभाजित रूप से कार्यदिवस पुरे कर सकते हैं. इस अधिनियम में रोजगार प्राप्ति के लिए किसी विशेष ट्रेनिग की भी आवश्यकता नही होती हैं. पूर्व निर्धारित मानदेय के अनुसार mnrega के तहत ग्रामीण क्षेत्र में 60 रूपये प्रतिदिन मजदूरी फिर 2009-10 में इसे 100 रूपये प्रतिदिन और अब यह 155 से 170 रूपये प्रतिदिन की जा चुकी हैं.

mnrega योजना में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 33 फीसदी लाभ इस वर्ग को दिए जाने का प्रावधान भी हैं. आजादी के बाद से भारत सरकार द्वारा रूरल देवलोपमेंट के लिए कई रोजगार योजनाएं आरम्भ की थी. उनके क्रियांव्ह्न में सबसे बड़ी समस्या इनके सही लाभार्थियों तक लाभ का नही पहुचना था. सरकार ने पूर्व की गईं गलतियों से कई नये ऐसें प्रयोग किये जिससे mnrega में भ्रष्टाचार को कम करने में मदद मिली हैं.

नरेगा ग्राम पंचायत प्रावधान (NREGA Gram Panchayat Rules)

  • इच्छुक उम्मीदवार के रोजगार कार्ड बनाना अनिवार्य
  • रोजगार के इच्छुक व्यक्ति के ग्राम पंचायत प्रधान के पास आवेदन करना होता हैं.
  • ग्राम पंचायत प्रत्येक परिवार को रोजगार कार्ड उपलब्ध करवाती हैं.
  • पहचान के लिए रोजगार कार्ड पर धारक की फोटो अनिवार्य
  • रोजगार के लिए आवेदन के 15 दिन में रोजगार न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान.
  • पंचायती अधिकारी द्वारा समय-समय पर सभी इच्छुक रोजगार के लोगों को जानकारी
  • प्रत्येक व्यक्ति को उनके निवास से 5 किमी के अंतर्गत दुरी पर रोजगार उपलब्ध करवाना.
  • 5 किमी से बाहर रोजगार देने की स्थति में अतिरिक्त किराए का प्रावधान
  • आधार कार्ड नंबर इसमे जोड़ने से भ्रष्टाचार में कमी देखि गईं हैं.

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भारत सरकार की यह ग्रामीण विकास योजना भारत की रीढ़ कहे जाने वाले गाँवों के मजदूरों और किसानो की खुशहाली का कारण बन रही हैं. इस योजना ने लोगों को शहरों की ओर पलायन को रोकने के साथ ही गाँवों के विकास को नई गति दी हैं. कई ऐसे जनहितकारी कार्य जिनमे बाढ़ नियन्त्रण, जल प्रबन्धन, भूमि विकास, ग्रामीण सड़क और बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के अभियान को महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना ने अच्छी दिशा दी हैं. गाँवों के लोगों का विकास,गरीबी, बेरोजगारी एवं आर्थिक विषमताओ को कुछ हद तक नियंत्रित करने में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना ने अहम भूमिका निभाई हैं. महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के क्रियान्वन के 11 वर्ष बाद इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं.

25 दिसम्बर 2001 को आरम्भ की गईं रोजगार आश्वासन योजना और जवाहर ग्राम सम्रद्ध योजना को मिलकर सम्पूर्ण रोजगार योजना की शुरुआत की गईं थी. अब महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना में अनाज योजना को भी शामिल किया जा चूका हैं, जिनमे काम के बदले कम कीमत पर अनाज देने का प्रावधान हैं.

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