महालक्ष्मी की कथा | Mahalakshmi Katha

महालक्ष्मी की कथा Mahalakshmi Katha: महालक्ष्मी को वैभव की देवी माना जाता हैं. सोलह दिनों तक लक्ष्मी जी का व्रत किया जाता हैं, जो भादों शुक्ल अष्टमी से आरम्भ होकर आश्विन (आसोज) कृष्ण अष्टमी तक चलता हैं. margashirsha mahalaxmi vrat 2018 udyapan vidhi katha in marathi pdf इस व्रत को 16 दिनों तक बिना खाए पिए करना चाहिए, मगर जो इसे नही कर पाते है उन्हें आरम्भ मध्य तथा अंतिम के एक-एक दिन व्रत अवश्य करना चाहिए. जो इंसान इस व्रत को कर महालक्ष्मी की कथा को सुनता हैं माँ उनकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण कर भक्त के जीवन के सभी कष्टों का हरण करती हैं. goddess lakshmi names, songs, photo & wallpapers आपकों इस आर्टिकल में मिलेगे.

महालक्ष्मी की कथा | Mahalakshmi Katha In Hindiमहालक्ष्मी की कथा | Mahalakshmi Katha

वैभव महालक्ष्मी की कथा– एक समय महिषासुर नाम का दैत्य हुआ. उसने समस्त राजाओं को हराकर पृथ्वी और पाताल पर अपना अधिकार जमा लिया. जब वह देवताओं से युद्ध करने लगा तो देवता भी उससे युद्ध में हारकर भागने लगे. भागते भागते वे भगवान विष्णु के पास पहुचे और दैत्य से बचने के लिए स्तुति करने लगे.

देवताओं की स्तुति करने से विष्णु एवं शंकर जी प्रसन्न हुए, तब उनके शरीर से एक तेज निकला. जिसने महालक्ष्मी का रूप धारण कर लिया. इन्ही महालक्ष्मी ने महिषासुर दैत्य को युद्ध में मारकर देवताओं का कष्ट दूर किया.

महालक्ष्मी व्रत कथा 2- एक अन्य महालक्ष्मी व्रत कथा जो महाभारत काल से जुड़ी हुई हैं. उस समय भी महालक्ष्मी व्रत किया जाता था. जब भादों माह में लक्ष्मी व्रत आया तो रानी गांधारी उस व्रत के पूजन के लिए सभी स्त्रियों को न्यौता दे रही थी, मगर उसने पांडवों की माँ कुंती को आमन्त्रण नही दिया.

हस्तिनापुर की सभी महिलाएं 100 कौरवों की माँ गांधारी के महालक्ष्मी व्रत पूजन के लिए मिट्टी लाकर सुंदर हाथी बनाकर पूजन के लिए महल में लेकर जा रही थी. वहीँ दूसरी तरफ माँ कुंती अकेली अपने घर में उदास बैठी थी. अर्जुन ने कुंती के इस तरह उदास बैठने का कारण पता कर कहा- माते आप महालक्ष्मी व्रत पूजन की तैयारी कीजिए मैं आपके लिए जीवित हाथी लेकर आ रहा हूँ.

अर्जुन ने इन्द्रदेव से प्रार्थना कर माँ लक्ष्मी के एरावत हाथी की पूजन के लिए मांग की ओर पूजन के लिए ले आए. कुंती ने सहर्ष एरावत का पूजन किया. जब गांधारी को इस बात का पता चला तो वह सभी स्त्रियों सहित कुंती के द्वार आई तथा उनसे क्षमा मांगकर लक्ष्मी जी के एरावत का पूजन किया. 

महालक्ष्मी के नाम (goddess lakshmi names)

आदि लक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धैर्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, सन्तान लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, आर्ना, श्रेया, विद्या, विभूति, सुधा, हिरण्मयीं, दीप्ता, वसुधा, दीपा, अशोक, अमृता, रमा, प्रसादाभिमुखी, चतुर्भुजा, प्रीता पुष्करिणी, कमलसम्भवा, कांता, हरिवल्लभी, चंद्रवंदना, दरिद्रियनशिनी, स्टरीनासौम्य, पुण्यगन्धा, पद्मगन्धिनी. इस तरह विष्णु की पत्नी महालक्ष्मी जी के 108 नाम माने गये हैं.

Devotional song on Goddess Lakshmi

Singers : Manjula Gururaj & Ram Prasad Music & Lyrics : Dr. Chaya Swamy

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