माँ पर कविता | Short Poem On mother For Kids

Short Poem On mother दुनिया का सबसे धनी इंसान वही है जिनके सिर पर माँ बाप का हाथ है. माँ का हाथ हमेशा अपने सन्तान की दुआ के लिए उठता है. माँ पढ़ी लिखी हो या अनपढ़ माँ तो माँ होती है. इस दुनिया में माँ के ममत्व और वात्सल्य के समान कोई दूसरी चीज नही है. मुश्किल के वक्त में जब इंसान का साथ सभी छोड़ देते है. तब केवल माँ ही हमारी सहायक होती है.

हमे कभी भी माँ के उपकारों को भूलना नही चाहिए. आजकल के समय में लोगों के पास अपने माता-पिता के लिए समय बिलकुल नही रहता है. मगर उन्हें यह नही भूलना चाहिए, मुश्किल के वक्त उनका साथ कोई देगा तो वो आपकी माँ है. सारे नाते रिश्ते अपने अपने मतलब के होते है जब तक उनका स्वार्थ सिद्ध होता है तब तक बने रहते है मगर माँ बेटे का रिश्ता आजीवन निस्वार्थ बना रहता है. माँ के उपकारों को शब्दों में न तो बाँधा जा सकता है न ही बया किया जा सकता है. मगर हमने कुछ लोगों की फेसबुक वाल से माँ पर कविता के विषय पर पर poem on mother की कुछ हिंदी कविताओं का संग्रह आपके लिए किया है.

माँ पर कविता | Short Poem On mother For Kids

कविता माँ पर (Kavita Maa Par)

घुटनों से रेंगते रेंगते
कब पैरो पर खड़ा हुआ
तेरी ममता की छाँव में
न जाने कब बड़ा हुआ?
काला टीका दूध मलाई
आज भी सब कुछ वैसा है
मै ही मै हु हर जगह
प्यार ये तेरा कैसा है
सीधा साधा भोला भाला
मै ही सबसे अच्छा हु
कितना भी हो जाऊ बड़ा
माँ मै आज भी तेरा बच्चा हु.

मेरी माँ पर कविता (Meri Maa Par Kavita)

माता मैंने तुझको बड़ी मन्नतों से पाया,
मेरे जीवन राह पे माता तेरा आँचल साया,
मैंने लाख जतन किए पर कर्ज न तेरा चुका पाया…


धरा पर मैं जब आया एक तू ही बनी सहारा,
अपने रक्त-बीज से माता तूने मुझे संवारा,
लिपटकर तेरी छाती से मन मेरा मुस्काया…



मेरे नैन और मन मे माता तेरा रूप समाया,
सभी मुसीबत में केवल माँ तूने हाथ बढ़ाया,
मैं तेरी ममता की कभी कीमत नही लगाया…


जब भी कोमल हाथो से तू केश मेरे सहलाती है,
सारी पीड़ा मिट जाती है ओंठो पे शरारत आती है,
सत्कर्मो का तूने ज्ञान दिया जीने का मधुरम गान दिया,
मैं जब भी पड़ता मुश्किल में संघर्ष अमिट वरदान दिया…

माँ पर छोटी कविता (Maa Par Short Poem)

मेरे जिह्वा पर माँ तूने शब्दो का लेप लगाया,
कोमल बदन पर माता प्यार से तूने सहलाया,
तेरी शिक्षा के दीपक से मेरा चित्त जगमगाया,
प्यार-दया और करुणा से मेरा जीवन फुसलाया…


तू इस दुनिया मे सबसे प्यारी माँ कैसे करूं बखान तुम्हारी,
मेरे रोम-रोम हर स्वास में तेरी छाप अमिट-अक्षय-हितकारी,
भूख-प्यास मैं सह लूंगा बस ममता तेरी पाना है,
नही चाहिए धन-दौलत बस गोद मे तेरी सोना है…!!!!


माँ की ममता पर कविता

“माँ तुम बहुत याद आती हो”
अब मेरी सुबह 6 बजे होती है
और रात 12 बज जाती है,
तब
“माँ तुम बहुत याद आती हो”
.
सबको गरम गरम परोसती हूँ,
और खुद ठंढा ही खा लेती हूँ,
तब
“माँ तुम बहुत याद आती हो”
.
जब कोई बीमार पड़ता है तो
एक पैर पर उसकी सेवा में लग
जाती हूँ,
और जब मैं बीमार पड़ती हूँ
तो खुद ही अपनी सेवा कर लेती हूँ,
तब
“माँ तुम बहुत याद आती हो”
.
जब रात में सब सोते हैं,
बच्चों और पति को चादर ओढ़ाना
नहीं भूलती,
और खुद को कोई चादर ओढाने
वाला नहीं,
तब
“माँ तुम बहुत याद आती हो”
.
सबकी जरुरत पूरी करते करते
खुद को भूल जाती हूँ,
खुद से मिलने वाला कोई नहीं,
तब
“माँ तुम बहुत याद आती हो”
.
यही कहानी हर लड़की की शायद
शादी के बाद हो जाती है
कहने को तो हर आदमी शादी से
पहले कहता है
“माँ की याद तुम्हें आने न दूँगा”
पर फिर भी क्यों?
“माँ तुम बहुत याद आती हो”


मां पर कविता

दुध पिलाया जिसने छाती से निचोड़कर
मैं ‘निकम्मा, कभी 1 ग्लास पानी पिला न सका ।
बुढापे का “सहारा,, हूँ ‘अहसास’ दिला न सका
पेट पर सुलाने वाली को ‘मखमल, पर सुला न सका ।
वो ‘भूखी, सो गई ‘बहू, के ‘डर, से एकबार मांगकर
मैं “सुकुन,, के ‘दो, निवाले उसे खिला न सका ।
नजरें उन ‘बुढी, “आंखों से कभी मिला न सका ।
वो ‘दर्द, सहती रही में खटिया पर तिलमिला न सका ।
जो हर “जीवनभर” ‘ममता, के रंग पहनाती रही मुझे
उसे “दिवाली पर दो ‘जोड़ी, कपडे सिला न सका ।
“बिमार बिस्तर से उसे ‘शिफा, दिला न सका ।
‘खर्च के डर से उसे बड़े अस्पताल, ले जा न सका ।
“माँ” के बेटा कहकर ‘दम,तौडने बाद से अब तक सोच रहा हूँ,
‘दवाई, इतनी भी “महंगी,, न थी के मैं ला ना सका ।


कविता माँ के लिए

सावन की सुखद फुहारों जैसी, …..
पतझड़ में मधुमास है माँ, ….
सागर की अतुलित गहराई सम,…
पर्वत सी ऊँचाई मां … ।।
मां धरती की दिव्य चेतना,….
गंगा की निर्मल धारा मां,….
सुंदर सुखद हरियाली सम….,
ममता की मूरत है माँ ।।……
वसुधा जैसी धैर्यवान भी…,
सारे कष्ट उठाती माँ,….
कांटों की राहों पर चलती,……
उफ तक भी नहीं करती माँ।।…..
तेज धूप में सुंदर छाया,….
बारिस में छतरी है मां….,
कोयल की सुखद सुहानी ध्वनि सी,…
ममता की मूरत है मां ।।

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