Meera Ke Pad Bhajan In Hindi | मीरा बाई के पद और भजनों का संग्रह अर्थ सहित

Meera Ke Pad Bhajan In Hindi– हिंदी और राजस्थानी भाषा की भक्त कवियित्री ने अपना सम्पूर्ण जीवन कृष्ण भक्ति में ही गुजार दिया था. स्वयं को गिरधर नागर की दासी मानने वाली मीराबाई के पद, दोहे और भजन उनकी सच्ची मार्मिक भक्ति का काव्यात्मक रूप हैं. हमने कुछ मीरा बाई के पदों का संग्रह हमारे पाठकों के लिए संग्रह किया हैं.Meera PAD अर्थसहित नीचें दिए जा रहे हैं.

Meera Ke Pad

(मीरा बाई के पद और भजन)

मीरा के पद (1)

भज मन ! चरण-कँवल अविनाशी |
जेताई दीसै धरनि गगन विच, तेता सब उठ जासी ||
इस देहि का गरब ना करणा, माटी में मिल जासी |
यों संसार चहर की बाजी, साझ पड्या उठ जासी ||
कहा भयो हैं भगवा पहरया, घर तज भये सन्यासी |
जोगी होई जुगति नहि जांनि, उलटी जन्म फिर आसी ||
अरज करू अबला कर जोरे, स्याम! तुम्हारी दासी |
मीराँ के प्रभु गिरधर नागर ! काटो जम की फांसी ||

मीरा के पद का हिंदी अर्थ 

मीराबाई इस पद में कहती हैं कि हे मन तू कभी नष्ट ना होने वाले भगवान् के चरणों में ध्यान धरा कर. तुझे इस धरती और आसमान के बिच जो कुछ दिखाई दे रहा हैं.  इसका अंत एक दिन निश्चित हैं.  यह जो तुम्हारा शरीर हैं इस पर बेमतलब गर्व कर रहे हो, यह भी एक दिन मिटटी के साथ मिल जाएगा. यह संसार चौसर के खेल की तरह हैं. बाजी शाम को खत्म हो जाती हैं. उसी प्रकार यह संसार नष्ट होने वाला हैं. भगवान् को प्राप्त करने के लिए भगवा वस्त्र धारण करना काफी नही हैं.

सन्यासी बनने से न ही इश्वर मिलता हैं, न जीवन मरण के इस चक्कर से निकल पाते हैं.  यदि इश्वर को प्राप्त करने की युक्ति नही अपनाई तो इस संसार में फिर से जन्म लेना पड़ेगा. होना भी यही चाहिए. इश्वर की प्राप्ति और जन्म म्रत्यु के चक्कर से मुक्ति. मीराबाई आगे कहती हैं, हे श्याम मै तुम्हारी दासी हु, मै हाथ जोड़कर आपसे विनती करती हु. आप मुझे यम की फांसी, मृत्यु से मुक्ति दिलाओ और मेरे जन्म मरण का चक्र समाप्त कर दो.

मीरा बाई के पद (2)

दरस बिनु दुखण लागे नैन |
जब के तुम बिछुरे प्रभु मोरे कबहूँ न पायों चैन ||
सबद सुनत मेरी छतियाँ काँपे मीठे-मीठे बैन |
बिरह कथा कांसुं कहूँ सजनी, बह गईं करवत ऐन |
कल परत पल हरि मग जोंवत भई छमासी रेण ||
मीराँ के प्रभु कबरे मिलोगे, दुःख मेटण सुख देण |

मीरा बाई के भजन पद का हिंदी में अर्थ

मीरा कहती हैं कि हे मेरे प्रभु आपके दर्शन बहुत दिनों से नही हुए हैं, इसलिए आपके दर्शन की लालसा से मेरे नैन दुःख रहे हैं. उनमे दर्द होने लग रहा हैं. जब से आप मुझसे अलग हुए हैं, मेने कभी चैन नही पाया हैं. कोई भी आवाज होती हैं तो मुझे लगता हैं आप आ रहे हैं, आपके दर्शन के लिए मेरा ह्रदय अधीर हो उठता हैं. और मुख से मीठे वचन निकलने लगते हैं.

पीड़ा में कडवे शब्द तो होते ही नही हैं. मीरा कहती हैं, सजनी मुझे भगवान से न मिलने की पीड़ा हो रही हैं, मै किसे अपनी विरह व्यथा सुनाऊ, वैसे भी इससे कोई फायदा भी तो नही हैं. इतनी असहनीय पीड़ा हो रही हैं, यदि कांशी में जाकर करवट बदलू तो भी यह कष्ट कम नही होता. पल-पल भगवान् की प्रतीक्षा ही किये रहती हु. उनकी प्रतीक्षा में यह समय बड़ा होने लग गया हैं, एक रात छ महीने के बराबर लगती हैं. आखिर में मीरा कहती हैं, प्रभु जब आप आकर मिलोगे तभी मेरी यह पीड़ा दूर होगी. आपके आने से ही सारा दुःख मिटेगा. आप आकर मेरा दुःख दूर कर दीजिए.

मीरा बाई के पद (3)

मैंने राम रत्न धन पायों |
बसत अमोलक दी मेरे सद्गुरु, करि कृपा अपणायो |
जन्म-जन्म की पूंजी पाई. जग में सबै खोवायो |
खरचै नहि चोर न लेवे, दिन-दिन बाधत सवायो ||
सत की नाव खेवटिया सतगुरु, भवसागर तरी आयो |
मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, हरखि-हरखि जस गायों ||

मीरा बाई के पद का अर्थ 

मीराबाई कहती हैं, मुझे राम रूपी बड़े धन की प्राप्ति हुई हैं.मेरे सद्गुरु ने कृपा करके ऐसी अमूल्य वस्तु भेट की हैं, उसे मैंने पुरे मनोयोग से अपना लिया हैं. उसे पाकर मुझे लगा मुझे ऐसी वस्तु प्राप्त हो गईं हैं, जिसका जन्म-जन्मान्तर से इन्तजार था. अनेक जन्मो में मुझे जो कुछ मिलता रहा. बस उनमे से यह नाम मूल्यवान प्रतीत होता हैं. यह नाम मुझे प्राप्त होते ही दुनिया की अन्य चीजे खो गईं हैं. इस नाम रूपी धन की यह विशेषता हैं कि यह खर्च करने पर कभी घटता नही हैं, न ही इसे कोई चुरा सकता हैं, यह दिन ब दिन बढता जाता हैं. मेरे जीवन रूपी समुद्र को पार करने के लिए सद्गुरु रूपी केवट मिले हैं. और ईश्वर का नाम ही नाव साबित हुआ हैं. मीराबाई आगे कहती हैं- हे गिरधर नागर मै प्रसन्न हो होकर आपके गुण गाती हु.

मीरा बाई के पद (4)

माई री ! मै तो लियो गोविन्दो मोल |
.कोई कहे चान, कोई कहे चौड़े, लियो री बजता ढोल ||
कोई कहै मुन्हंगो, कोई कहे सुहंगो, लियो री तराजू रे तोल |
कोई कहे कारो, कोई कहे गोरो, लियो री आख्या खोल ||
याही कुं सब जग जानत हैं, रियो री अमोलक मोल |
मीराँ कुं प्रभु दरसन दीज्यो, पूरब जन्म का कोल ||

Meaning of Meerabai pad

मीरा बाई अपनी सखी से कहती हैं- माई मेने श्री कृष्ण को मोल ले लिया हैं. कोई कहता हैं, अपने प्रियतम को चुपचाप बिना किसी को बताए पा लिया हैं. कोई कहता हैं, खुल्लमखुला सबके सामने मोल लिया हैं. मै तो ढोल-बजा बजाकर कहती हु बिना छिपाव दुराव सभी के सामने लिया हैं. कोई कहता हैं, तुमने सौदा महंगा लिया हैं तो कोई कहता हैं सस्ता लिया हैं. अरे सखी मेने तो तराजू से तोलकर गुण अवगुण देखकर मौल लिया हैं. कोई काला कहता हैं तो कोई गोरा मगर मैने तो अपनी आँखों खोलकर यानि सोच समझकर गोविन्द को खरीदा हैं.

मीरा बाई कहती हैं ,कि कृष्ण को प्राप्त करने के लिए मुझे कठिन जतन करना पड़ा. मेरे लिए वह बहुमूल्य वस्तु हैं, जिसकी कीमत आंकी नही जा सकती. लोग बस इंतना ही जानते हैं, कि मैंने कृष्ण को गोद लिया हैं. मगर मेने यु ही नही लिया हैं. सोच समझकर आँखे खोलकर लिया हैं. मीरा कहती हैं, हे प्रभु मुझे दर्शन दीजिए. मुझे दर्शन देने के लिए आपने पुनर्जन्म लेने का वादा कर रखा हैं. अब आप अपने वचन को निभाइए.

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