योग पर निबंध | Essay on yoga In Hindi

Essay on yoga In Hindi उत्तम स्वास्थ्य जीवन का सबसे बड़ा धन हैं. इसके बिना मनुष्य किसी कार्य को रुचिपूर्ण नही कर सकता हैं. कार्य के प्रति रूचि और लगाव के अभाव में अपने जीवन का लक्ष्य पूरा नही कर सकता. उत्तम स्वास्थ्य का अर्थ हैं केवल शारीरिक स्वास्थ्य से सिमित नही इसमे हमारा मानसिक स्वास्थ्य चरित्र और संयम सम्मलित हैं. जीवन को स्वस्थ और सुंदर बनाने के अनेक साधन हैं. इसके लिए पोष्टिक भोजन के साथ-साथ खेलकूद,व्यायाम आसन, प्राणायाम आदि आवश्यक हैं. शारीरिक और मानसिक थकावट से बचने के लिए मनोरंजन के साधनों की भी जरुरत रहती हैं. स्वस्थ मनोरंजन के अभाव में भी उत्तम स्वास्थ्य दुर्लभ हो जाता हैं.

Essay on yoga In Hindi (योग पर निबंध)

योग पर निबंध – (Essay on yoga In Hindi )

उत्तम स्वास्थ्य के लिए योगासन अति महत्व हैं. प्राचीन काल में ऋषियों-मुनियों के स्वस्थ और दीर्घायु बने रहने का रहस्य योग ही था. योग सभी उम्र के स्त्री-पुरुषो के लिए उपयोगी होता हैं. इससे न केवल शरीर फुर्तीला होता हैं बल्कि निरोग भी बना रहता हैं. योग के द्वारा मानसिक, बौदिक एवं आध्यात्मिक विकास होता हैं. योग के द्वारा शरीर और मन की परवर्तियो पर भी नियन्त्रण रखा जा सकता हैं. जब कोई व्यक्ति कार्य की नीरसता या परिश्रम की अधिकता के कारण थकान अनुभव करता हैं, तो योग उसे आराम पहुचता हैं. उसकी जड़ता और आलस्य को दूर करता हैं.

योग के द्वारा व्यक्ति के आंतरिक अंगो जैसे ह्रदय, फेफड़े, मस्तिषक,पेट,गुर्दे, रक्तवाहिनियो तथा अनत्स्त्रावी ग्रन्थियो को काफी लाभ पहुचता हैं. शरीर के अन्य अंगो तथा तंत्रों में तालमेल बैठाने के लिए योग तथा आसन की विधियाँ अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई हैं. योग का अर्थ होता हैं-जोड़ना. तन को मन से, शरीर को स्वास्थ्य से जोड़ने की क्रिया का नाम हैं- योग

आसन का अर्थ होता हैं-स्थिर एवं सुखपूर्वक शरीर की स्थति. अत: तन और मन की स्वस्थ,स्थिर एवं सुखपूर्ण स्थति का नाम हैं योग. वैसे तो उत्तम स्वास्थ्य के लिए बहुत से योग और आसनों का विधान हैं. किन्तु विद्यार्थियों के लिए ध्यानात्मक,शारीरिक व्यायाम वाले आसन आवश्यक हैं, जिनमे पद्मासन,वज्रासन,धनुरासन,चक्रासन,कटि चक्रासन,सर्वागासन, हलासन विशेष लाभदायक हैं. इन योग और आसनों के सम्बन्ध में जो जानकारियाँ दी जा रही हैं. उन पर विद्यार्थियों को विशेष ध्यान देना चाहिए.

योग पर निबंध 1

  • पद्मासन-पद्मासन का अर्थ हैं कमल जैसा आसन अथवा योग. इस योग को करते समय व्यक्ति की बैठक स्थति कमल के समान हो जाती हैं. अत: इस आसन को पद्मासन कहते हैं. इस योग की मुद्रा में दाएं पैर के पंजे को बाएँ जांघ पर और बाएँ पैर के पंजे को दाए जांघ पर रखकर दोनों हाथों को घुटनों पर रखकर, कमर सीधा कर बैठते हैं. इस आसन के अभ्यास से वातरोग, पेट रोग, गठिया, कब्ज आदि रोगों से छुटकारा मिलता हैं. शरीर की सुधड़ता,कांति, दीर्घ यौवन के लिए इस योग का प्रयोग लाभकारी हैं.
  • वज्रासन-वज्र का अर्थ होता हैं कठोर या सख्त. वज्रासन योग आमाशय,रीढ़ और नाड़ी पर प्रभाव डालने वाला योग हैं. इस योग को करने से शरीर वज्र के समान तन जाता हैं. इस आसन की मुद्रा में अपनी दोनों टांगो को पीछे की ओर मोड़कर घुटनों के बल पाद पृष्ट के उपर रखा जाना चाहिए. इस स्थति में दोनों हाथ घुटनों तथा हथेलिया नीचे की ओर द्रष्टि सामने की ओर स्थिर होनी चाहिए. इस योग को करने से खाया हुआ भोजन जल्दी पचता हैं. यह योग करने से पिंडलियों और घुटनों का दर्द दूर होता हैं. छाती,श्वास तथा गले के रोग दूर होते हैं मोटापा कम होता हैं.इस योग को करने से पेट की चर्बी कम होती हैं. गैस दूर होती हैं, भूख खुलती हैं, आवाज मधुर होती हैं, आँखों की रौशनी बढती हैं तथा पाचन शक्ति भी बढती हैं. इस योग के अभ्यास को 1 से 5 मिनट तक बढाया जा सकता हैं.

योग पर निबंध 2

  • सर्वागासन- यह योग सभी अंगो को प्रभावित करता हैं. इस कारण इसे सर्वागासन भी कहते हैं. इस आसन में पीठ के बल लेटकर दोनों पैरो को उपर उठाते हुए शरीर का भार कन्धो पर होता हैं.  इस स्थति से वापिस आते समय भी अपने पैरो को आगे झुककर, पहले पीठ को भूमि पर लगाए. पैरो सीधा या नीचा लाएँ अन्यथा असावधानीवश गर्दन की हड्डी पर प्रभाव पड सकता हैं. तथा कन्धो की नस भी चढ़ सकती हैं. कुछ सेकंड्स तक करने के पश्तात आराम करे. दुबारा यह योग 2 से 3 बार जरुर करे. इस योग से मस्तिषक के विकार दूर होते हैं. मूत्राशय से सम्बन्धित बीमारियाँ, पैरो और तालूओ की पीड़ा, सूजन तथा जलन इत्यादि दूर होती हैं. मेरुदंड लचीला होता हैं.रक्त परिसंचरण,श्वसनतंत्र लचीला होता हैं. इस योग को नियमित रूप से करने से अंगो के सभी विकार दूर होते हैं.
  • हलासन-इस आसन में शरीर का आकार हल जैसा बनता हैं. इसलिए इसे हलासन कहते हैं. इस आसन में भूमि पर चित लेटकर दोनों हाथ शरीर से लगाए रखे. दोनों पैरो को एक साथ आसमान की तरफ उठाएँ. फिर पीछे की तरफ झुकाए. पैर बिलकुल सीधे तने हुए रखकर पंजे जमीन पर लगाए. तुड्डी छाती से लगी रहे. अब इसी अवस्था में दो तीन मिनट से आरम्भ होकर 20 मिनट तक की समयावधि बढाई जा सकती हैं. हलासन के अभ्यास से अजीर्ण,कब्ज, अर्श, थायराइड का अल्प विकास, असमय वृद्धत्व,दम, कफा, रक्तविकार आदि दूर होते हैं. इस योग से लीवर अच्छा होता हैं. तथा पेट की चर्बी और सिरदर्द दूर होता हैं.

योग पर निबंध 3

आसन हर अवस्था के व्यक्तियों के लिए उपयोगी होता हैं. इससे न केवल सभी अंगो को सक्रिय किया जाता हैं, अपितु तन-मन पर भी नियन्त्रण किया जाता हैं. शीर्षासन, सर्वागासन, पद्मासन आदि आसन आसानी से किये जा सकते हैं. इन आसनों को जितनी छोटी उम्र में करना सीख लिया जाएँ, उतना ही अच्छा होता हैं.

खेल हो या योग हमेशा खुली हवा में करना चाहिए. खेल या व्यायाम करते समय रक्त प्रवाह की गति तीव्र हो जाती हैं. शरीर को स्वस्थ रखने के लिए ऑक्सीजन की अधिक आवश्यकता पड़ती हैं. खेल या व्यायाम के लिए प्रातकाल का समय उत्तम माना जाता हैं. इस समय वायु का स्पर्श स्वास्थ्य के लिए हितकर माना जाता हैं. उत्तम स्वास्थ्य के लिए खेल और योग आवश्यक हैं, ही भोजन सम्बन्धी बाते जानना भी आवश्यक हैं. हमें गरिष्ट भोजन नही करना चाहिए. गरिष्ट भोजन शरीर के लिए जहर हैं. भूख से अधिक भोजन करना,ठूस-ठूस कर खाना और भूख न लगने पर भी खां लेना शरीर के लिए अत्यंत हानिकारक हैं. उतना ही खाना खाना चाहिए, जितना हम पचा सके, अधिक खाना खाना तो रोगों को आमन्त्रण देना हैं.

किसी ने ठीक ही कहा हैं, यदि तुम प्रसन्न और पवित्र रहना चाहते हो तो अधिकतर भूखे रहने का प्रयास करो. गांधीजी तो यहाँ तक कहते थे जीने के लिए खाओ, खाने के लिए मत जिओ. अत: हमे चाहिए कि खेल व योग और संयमित भोजन के द्वारा अपने शरीर और मन को पूर्ण स्वस्थ रखे. ऐसा करने से मन और तन में स्फूर्ति बनी रहेगी. इस प्रकार हम न केवल अपना अपितु अपने सम्पूर्ण समाज एवं राष्ट्र को सुखमय बना सकते हैं.

योग पर निबंध 4

देखते समय अपने देश के खिलाड़ियों के अच्छे प्रदर्शन से उनके प्रति ह्रदय में प्रेम सोहार्द एवं सम्मान की भावना जगती हैं. उस समय हमारे मन में जाति, धर्म, सम्प्रदाय, क्षेत्र आदि के भेदभाव लेशमात्र भी नही रहते. शरीर और्मं को स्वस्थ रखने के लिए इन साधनों में से एक अथवा एकाधिक को अपनाकर उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त किया जा सकता हैं. हमारा शरीर एक यंत्र की तरह कार्य करता हैं. इसमे अनेक प्रकार के कल-पुर्जे लगे होते हैं, ह्रदय एक प्रकार का स्वचालित पंप हैं. जो बिना जानकारी के हमारे खून को दिन-रात सारे शरीर में प्रवाहित करता हैं. इसी प्रकार फेफड़े निरंतर सांस् छोड़ने का कार्य करते हैं. ह्रदय तिल्ली गुर्दे, आंते आदि शरीर के अन्य भाग इसी प्रकार निरंतर अपना कार्य करते रहते हैं. जिसका हमे ज्ञान भी नही होता हैं.

शरीर के बहुत से अंग ऐसे भी हैं. जो तभी काम करते हैं, जब उनसे कार्य लेना चाहते हैं. इन अंगो की एच्छिक गति मास्पेशियो के द्वारा होती हैं.जिन्हें हम इच्छानुसार सिकोड़ या अथवा फुला सकते हैं. अपनी अंगुली अथवा बाहों को मोड़कर यह बात स्पष्ट कर सकते हैं .

योग पर निबंध-5

चलना, दौड़ना, फिरना, झुकना,उठाना, बैठना, खाना, पीना, बोलना आदि क्रियाए मास्पेशियो द्वरा नियंत्रित होती हैं.मानव शरीर की अनेक छोटी-छोटी मास्पेशिया हैं. इनमे आँखों को घुमाने जैसी लघु मॉसपेशियों से लेकर जाघों की मॉसपेशियाँ सम्मलित हैं. ये मॉसपेशियाँ तभी सशक्त और समर्थ रहती हैं, जब तक इनसे काम लिया जाता हैं. अपने दैनिक जीवन में हम इनमे बहुत से कम ही काम ले पाते हैं.

दिन भर मेहनत करने के कारण किसानो और मजदूरो का अधिकतर व्यायाम हो जाता हैं. पर जो लोग बैठकर काम करते हैं. या जिनका अधिक समय पढने-लिखने में व्यतीत होता हैं, उनके शरीर की अधिकतर मॉसपेशिया निष्क्रिय बनी रहती हैं. ऐसे लोगों को चाहिए कि वे अपनी समस्त मॉसपेशियों का रक्त प्रवाह संतुलित रहता हैं, अशुद्धियाँ दूर होती हैं. इनमे नई शक्ति आ जाती हैं. इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह अपनी अवस्था और रूचि के अनुसार खेल, योग, आसन, प्राणायाम, व्यायाम आदि में से चुनकर नित्य अभ्यास करे. वैसे तो प्रत्येक विद्यालय में योग, खेल, व्यायाम प्राणायाम आदि का प्रबंध होता हैं. पर यह पर्याप्त नही होता हैं. अत: बच्चों को घर पर भी व्यायाम, आसन एवं खेल आदि का अभ्यास करते रहना चाहिए.

किशोरावस्था मे बच्चों के लिए खेल-कूद, जिम्नास्टिक,योग, दौड़ना,तैरना आदि लाभकारी व्यायाम हैं. प्रत्येक बालक को किसी न किसी सामूहिक खेल में जरुर भाग लेना चाहिए. इससे न केवल शरीर फुर्तीला होता हैं. साथ ही सशक्त भी होता हैं. परस्पर सहयोग से काम करने की भावना का भी विकास होता हैं. फ़ुटबाल हॉकी, कबड्डी, बास्केटबाल, खो-खो आदि खेल प्राय सभी विद्यालयों में खेलाए जाते हैं. अत: बच्चों को इनमे उत्साह से भाग लेना चाहिए.

योग पर निबंध-6

अक्सर सभी स्कुलो में योग भी करवाएं जाते हैं. इन योग से न केवल स्वास्थ्य बनता हैं, अपितु समूह में रहकर कार्य करने की भावना का भी विकास होता हैं. सैकड़ो बच्चो का एक साथ योग करने का द्रश्य भी बेहद मनमोहक होता हैं. पढ़ते समय बच्चे बैठे रहते हैं. हाथ, मष्तिष्क ,आँख के अतिरिक्त अन्य अंग निष्क्रिय रहते हैं. हॉकी, क्रिकेट,बास्केटबाल,लोन टेनिस,टेबल टेनिस आदि बड़े बच्चों के खेल हैं. जिन्हें छोटे बच्चे भी खेल सकते हैं.

तैरना भी एक प्रकार का खेल हैं. इससे मनोरंजन के साथ-साथ शरीर के सभी अंगो का व्यायाम (योग) भी हो जाता हैं. जहा नदी, नहर, झील की सुविधा प्राप्त हैं. वहां के विद्यार्थियों को तैरना सीखना चाहिए. कुछ शहरों में तैरना सिखने के लिए स्वीमिंग पुल बने होते हैं. इनका लाभ बच्चों को अवश्य मिलना चाहिए.

बच्चो के उत्तम स्वास्थ्य के लिए खेल-कूद व्यायाम ,आसन प्राणायाम आदि अनेक रुचिकर साधन हैं. जिन्हें बच्चे विद्यालय में क्रिदागण में सामूहिक रूप से सरलतापूर्वक कर सकते हैं. इनसे बालकों में परस्पर सहयोग सद्भाव और मेल-जोल से काम करने की भावना का विकास होता हैं. खेल से बच्चों में राष्ट्रप्रेम एवं राष्ट्रिय एकता का भी विकास होता हैं. अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओ में भाग लेने वाला प्रत्येक खिलाड़ी अपने कौशल को प्रदर्शित कर अपने देश का नाम रोशन करता हैं. इसका प्रत्यक्ष अनुभव उस समय होता हैं. जब हम दूरदर्शन से प्रसारित होने वाले हॉकी फूटबाल अथवा कबड्डी प्रतियोगिताओं को देखते हैं.

सारांश

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