रंगीला बिल्ला | छोटी हिंदी कविता पहली दूसरी के विद्यार्थियों के लिए

short hindi poems रंगीला बिल्ला एक छोटी हिंदी कविता हैं, जो कक्षा 1 और 2 के विद्यार्थियों के लिए मनोरंजक और जल्दी समझ आने वाली कविताओं में से हैं. ये चंद लाइनें नन्हे बालक-बालिकओं के लिए जल्दी से याद करने और उन्हें प्रस्तुत करने में मददगार होगी.

रंगीला बिल्ला ( poems in hindi)

दिल्ली से आया एक बिल्ला

नाम हैं, उसका रंगीला |

मंद-मंद मुस्कान हैं उसकी

चश्मा हैं उसका चमकीला|

पंजाबी कुर्ता हैं, उसका

और दुप्पट्टा हल्का पीला|

 

चप्पल उसकी जापानी हैं

पर्स हैं उसका गहरा नीला|

भूख लगी हैं उसको भारी

मचा रहा हैं, चिल्लम-चिल्ला|

मै बोली, मेरे प्यारे बिल्लू

मत कर इतना हल्ला गुल्ला|

 

लम्बी काली पूछ हैं उसकी

भाती हैं उसको दूध की प्याली|

खेल का हैं, अजब खिलाड़ी

क्रिकेट का शौकीन हैं वो भारी|

खाने को करता हैं हर शाम मारा-मारी|

 

दिल्ली से आया एक बिल्ला

नाम हैं उसका रंगीला|

hindi poems on life 

पहले कभी एक गाँव था,
उस गाँव में भी छांव था,
उस छाँव से छन कर यहाँ,
जीवन का नन्हा पाँव था.
एक रौशनी थी धूप की,
बिखरे हुए एक रूप की,
विश्वास का पलना लिए,
शीतलता भरे एक कूप की.
उस गाँव से गुजरा करें थे,
आम भी और ख़ास भी,
फैले हुए से खेत थे,
पत्ते भी थे और घास भी.
अगनित कहानी थीं बिखरी,
किस तरह मेला लगा था,
हौले-हौले चल के घर से,
खुशियों का वो रेला सजा था.
फूस और खपरैल भी था,
लेपने को मिट्टिया भी,
मोहने को कोयल की कू-कू,
झूलने को रस्सियाँ भी.
रोज़ करता था मैं श्रम और,
रोज़ सोता था मज़े से,
थक ना जाऊं ये ना होता,
ना कोई था चोंचला.
फिर ना जाने किस घडी में,
गाँव मेरा खो गया,
बन गयी अट्टालिकाएं,
घर हमारा ना रहा.

hindi rhymes for kids 

एक मै छोटी कठपुतली
रोना मुझको आता नही
लड्डू पेडे खाऊ मजे से
खाना बनाना आता नही
लिम्का पेप्सी पियु मजे से
शर्बत बनाना आता नही
चनिया चोली पहनू मजे से
कपड़े सीना आता नही
मै एक छोटी कटपुतली
रोना मुझको आता नही||

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