रक्षाबंधन पर कविता 2020 | Poem On Raksha Bandhan In Hindi

रक्षाबंधन पर कविता Poem On Raksha Bandhan In Hindi: सभी भाइयों और बहिनों को रक्षाबंधन के पावन पर्व की बधाई शुभकामनाएँ. इस वर्ष 3 अगस्त 2020 को राखी का त्यौहार देशभर में मनाया जाएगा. इसकी पूर्व तैयारियों में बाजार सज-धज चुके हैं. “Raksha Bandhan 2020 Poem Hindi” के अवसर पर अपनी बहिन या अपने भाई को भेजने के लिए छोटी व बड़ी हिंदी कविता का संग्रह आपके लिए लाए हैं.

रक्षाबंधन पर कविता | Poem On Raksha Bandhan In Hindi

Poem On Raksha Bandhan In Hindi

Class 1, Class 2, Class 3, Class 4, Class 5, Class 6, Class 7, Class 8, Class 9, Class 10, Class 11, Class 12 Rakhi poem Kavita For Brothers Sisters Bhai Bahin Ke Liye Kavita Hindi Me. सभी भाइयों बहिनों को नमस्कार और रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई. 3 अगस्त को हिन्दुओं का सबसे पवित्र त्यौहार राखी मना रहे हैं. इस अवसर पर हम राखी कविता बता रहे हैं.

Poem On Raksha Bandhan 1

आओ भैया , प्यारे भैया ,
मस्तक पर शुभ तिलक लगा दू ।
रक्षाबंधन की बेला मे ,
धागो का कगन पहना दू ।।

युग ~ युग जियो , फलो ~ फूलो तुम , जीवन भर मेरे भाई ।
राखी के इस शुभ अवसर पर यही कामना मै लाई ।।

जब तक रवि ~ शशि करते विचरण , गगा ~ यमुना है साखी ।
तब तक रक्षा करे तुम्हारी , बहन की प्यारी राखी ।।

दिन बीते सुख चैन भरे ,
राते बीते आनन्द भरी ।
रेशम के कोमल धागो मे ,
बहना की प्रीत भरी ।।

मेरी बहना , प्यारी बहना ,
तुझे वचन मै देता हू ।
जीवन भर अपनी बहन की रक्षा का प्रण लेता हू ।।

बहना तेरी आन ~ मान पर
आच न मै आने दूगा ।
इस प्यारी राखी के बदले
जीवन भी अपना दूगा ।।

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Poem On Raksha Bandhan – 2

आपकी रक्षा मै करू
मेरी रक्षा आप
विश्व शिखर पर पहुचे भारत
ऐसा कर लो जाप
राखी का ये धागा कहता
तू मेरा मै तेरा हू
तू गर मेरा अब्दुल हमीद
तो मै मोदी भी तेरा हूँ
मेरे मुल्क का कतरा कतरा
देश पे जान लुटाता है
जब मेरी बहना का धागा
हाथ मेरे बध जाता है बहना
मागे दुश्मन का सर
काट थाल मे ला दूगा

बहन कहे गर्दन कटवा दो गर्दन भेट चढ़ा दूगा
बहन कहे गर मेरे देश मे क्यू भय से ग्रसित महिला हैं
बहना के इस कहने पर मै फिर तलवार उठा लूगा
बददिमाग गदे लोगो की गर्दन काट गिरा दूगा
मेरी बहन ने अबकी बस यूपी शगुन में मागा है
मैने भी इन तीन वर्ष मे यूपी स्वर्ग बनाना है
सपा रहे या बसपा सबको काल की भेट चढ़ाना है
जैसा देश मे मोदिराज है राज उसी सा लाना है
राखी जैसे बधन का बहना का कर्ज चुकाना है

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Poem On Raksha Bandhan – 3

तू कित सै, सुखी रहिये जित सै
तू उपरली हवा मै झूलग्या
अर मन्नै जमा-ए भूलग्या भूलै सै
तो भूल जाइये पर एक ब उस
स्कूल जाइये उस स्कूल मे जित जाया
करते दोनू तफ़रिया मे गुड़ का चूरमा
खाया करते दोनू तेरै याद सै,
तू एक दिन पड़ग्या था रोया था तू,
नूर चेहरे का झड़ग्या था
आपणी क्लास मै तै मै
भज़ के आई थी तेरा बस्ता,
तेरी तख़्ती जाकै मन्नै ठाई थी
तेरे ख़ातर खेत मै तै मटर पाड़
के ल्याई थी जोहड़ पै भैसा के पाया
मै तै काढ़ के ल्याई थी

साढ़े बावन रुपये करे थे कट्ठे
चवन्नी-चवन्नी जोड़ कै याद सै
तू काढ़ लेग्या था गुल्लक नै फोड़
कै मै तो रो कै रहगी थी,
पर दुःख ना था भाई राजी था मेरा,
उसतै बड़ा सुख ना था
कितणी ब तू बिना बताये,
देर रात तै आया था मन्नै कहग्या था,
या झूल बोल कै बाबू तै बचाया था
जब तू छोटा था,
मै तेरा पाणा झूलाया करती

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Poem On Raksha Bandhan – 4

मा घर का काम करै थी,
मै तन्नै खिलया करती मेरे कान तले आज भी,
झुरकुटो का निषान सै पर षायद बीर मेरे,
तू मेरे तै अन्जान सै घर-बार छोड़ तो आई,
आकै नै अपनी दुनिया बसाई सारे सुख सै
दुनिया के आज,
बस तू खुश रहिये मेरे भाई मैं जाणू सू,
तू भी बहाण तै प्यार करै सै बहाण तन्नै
ज़ान तै प्यारी, बस न्यू-ए तकरार करै
सै भाई-बहाण के प्यार नै भूलाइये ना छोह
कितणा-ए आज्या, मन नै तू डुलाइये ना
किसे नै बहाण लागे फूल-सी, किस नै केसर
क्यारी सै इस दुनिया मैं सब भाईया नै
आपणी बहाण प्यारी सै ज्या तै
कहू सू भाई मेरे, मेरा कहण पुगाइये

किसे भी भाई नै बहाण की गल़ ना सुणाइये
क्यूकि किसी नै लागै फूल-सी, किसी-नै
केसर क्यारी सै इस दुनिया मै
सब भाईया नै आपणी बहाण प्यारी सै
आपणी बहाण प्यारी सै।

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रक्षाबंधन पर शायरी

अनोखे रगो मे रगा मेरा रक्षाबंधन इसान से
इसान के प्यार को समर्पित है मेरा रक्षाबधन,
अनोखे रंगों से रंगा है मैने मेरा रक्षाबधंन।
आओ हम सब मिलकर एक अनोखा पर्व मनाते है,
राखी के इस पावन पर्व को राष्ट्रीय पर्व बनाते है।
बाध के एक दूजे को राखी रक्षा का वचन उठाते है,
न उजड़े ससार किसी बहन का न बिखरे सपने किसी भाई के।
हाथो से हाथ मिलाकर मानव श्रखला बनाते है,
बेसहारा का सहारा बन राखी पर्व मानते है।

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रक्षाबंधन पर कविता

अहोभाग्य मेरे जो समझा मुझे
इस क़ाबिल
तन गीता मन क़ुरान हुई
रूह मेरी बाईबिल
गुरूग्रथ का हर
पन्ना करता है आरती वदन

निस्वार्थ प्रेम अनमोल
जग मे नाम रक्षाबधन

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Short Poem On Raksha Bandhan

तागे दिया तदा कच्चिया,,
नी पैने ऐ डोरा पक्किया…”
वीरे दे हथ सोनिया सजिया,
रब तो तेरीया दुआवा मगिया..
पैन ते वीर दा ऐ रिश्ता जेडा,
उस घर दा सुन्ना हुदा ना वेडा..
रब्बा हर वीर नु इक्क पैन देवी,
मेहताब उम्रा तई डोरा सच्चिया..
“तागे दिया तदा कच्चिया,,
नी पैने ऐ डोरा पक्कियाँ…!!

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रक्षाबंधन कविता

रक्षाबंधन, भाई और बहन के प्रेम को प्रदर्शित करने वाला उत्सव हैं. जो जन्म से बचपन और पुरे जीवन की यादों को समाहित किये रहती हैं. बहिन बड़े उत्साह से भाई के घर जाकर मंगलकामनाओं से कलाई पर राखी बांधकर भाई की दीर्घायु की कामना करती हैं. भाई भी बहिन को उपहार आदि देकर राखी पर्व के बाद विदा करते हैं. भाई बहिन के इसी प्रेम को हिंदी कविता के रूप में यहाँ कविता के रूप में प्रस्तुत किया हैं. आपकों ये रक्षाबंधन 2020 कविता कलेक्शन कैसा लगा, हमें कमेंट कर जरुर बताएं.

जब से बहने इस घर से परायी हो गई,
राखी के त्योहार की भी जैसे विदाई हो गई !
रग-बिरगे धागो से इस दिन सजे रहते थे हाथ,
वो वक़्त भी क्या हसी था जो गुजरा बहनो के साथ,
पर ऐ खुदा तुझसे ये कैसी खुदाई हो गई
समय गुजरता रहा और सूनी कलाई हो गई !
जब से बहने इस घर से परायी हो गई,
राखी के त्योहार की भी जैसे विदाई हो गई !
कहते है ये बधन है भाई बहन के प्यार का,

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Rakshabandhan POEM

जब तू छोटा था,
मै तेरा पाणा झूलाया करती मा घर का काम करै थी,
मै तन्नै खिलया करती मेरे कान तले आज भी,
झुरकुटो का निषान सै पर षायद बीर मेरे,
तू मेरे तै अन्जान सै घर-बार छोड़ तो आई,
आकै नै अपनी दुनिया बसाई सारे सुख सै
दुनिया के आज, बस तू खुश रहिये
मेरे भाई मै जाणू सू, तू भी बहाण तै प्यार करै
सै बहाण तन्नै ज़ान तै प्यारी, बस
न्यू-ए तकरार करै सै

रक्षाबंधन मराठी कविता

जिन झोपडियो मे था बस अधियारा;
उनमे जला चिराग हू मै।
जो हर मधुवन को महका दे;
वो सन्दल वाली राख हू मै।
मा का प्यार,सस्कार पिता के;
साथ सदा मै रखता हू।
जिन बहनो का कोई भाई नही;
मै उनका भाई लगता हू।
खुशी के इन पलों पर मै,हसी पैगाम देता हू।
रहे महफूज सब बहने,मै ऐसा काम करता हू।
जमाने की सभी खुशिया,सभी बहनो को मिल जाए।
मै दुनिया की सभी बहनों को,प्रणाम करता हू।

Poem On Raksha Bandhan – 5

नही चाहिए मुझको हिस्सा मा बाप की

दौलत मे चाहे कुछ भी लिख जाएं भैया

वसीयत मे, नही चाहिए मुझको झुमका
चूड़ी पायल और कगन नही चाहिए
अपने
पन कि कीमत मे बेगानापन ।

मुझको नशवर चीजो की दरकार नही
सबधो के कीमत पर कोई सुविधा नही

माँ के सारे गहने तुम भाभी को दे देना

बाबु जी का जो कुछ है सब खुशी खुशी
ले लेना।

चाहे पूरे वर्ष कोई चिट्ठी पत्री मत लिखना

मेरे निमत्रण का चाहे मोल नही करना

Poem On Raksha Bandhan- 6

कभी द्रौपदी का रक्षक,
तो कभी इंद्र जयमाला है।
एक नही कई रिश्तो का,
रक्षाबधन रखवाला है।।
सकट की अग्नि मे जब,
भाई का जीवन तपता है।
स्नेह बध से वशीभूत
बहना का हृदय तड़पता है।
मा,पत्नी और सखा रूप मेँ,
प्रेम सरस का प्याला है।
एक नही कई रिश्तो का,
रक्षाबधन रखवाला है।।2।।

Poem On Raksha Bandhan-7

जिन झोपडियो मे था बस अधियारा;
उनमे जला चिराग हू मै।
जो हर मधुवन को महका दे;
वो सन्दल वाली राख हू मै।
मा का प्यार,सस्कार पिता के;
साथ सदा मै रखता हू।
जिन बहनो का कोई भाई नही;
मै उनका भाई लगता हू।

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आशा करता हूँ दोस्तों रक्षाबंधन पर कविता Poem On Raksha Bandhan In Hindi का यह लेख आपकों पसंद आया होगा, यदि आपकों राखी पर दी कविताएँ पसंद आई हो तो अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे.

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