रक्षाबंधन पर कविता | Raksha Bandhan In Hindi

Raksha Bandhan In Hindi सभी भाइयों और बहिनों को रक्षाबंधन के पावन पर्व की बधाई शुभकामनाएँ. इस वर्ष 7 अगस्त 2017 सोमवार को राखी का त्यौहार देशभर में मनाया जाएगा. इसकी पूर्व तैयारियों में बाजार सज-धज चुके हैं. “Raksha Bandhan 2017 “ के अवसर पर अपनी बहिन या अपने भाई को भेजने के लिए छोटी व बड़ी हिंदी कविता का संग्रह आपके लिए लाए हैं.

रक्षाबंधन पर कविता (Poem on Raksha bandhan)रक्षाबंधन पर कविता

Raksha Bandhan In Hindi

आओ भैया , प्यारे भैया ,
मस्तक पर शुभ तिलक लगा दूँ ।
रक्षा बंधन की बेला मेँ ,
धागो का कंगन पहना दूँ ।।

युग ~ युग जियो , फलो ~ फूलो तुम , जीवन भर मेरे भाई ।
राखी के इस शुभ अवसर पर यही कामना मैँ लाई ।।

जब तक रवि ~ शशि करते विचरण , गंगा ~ यमुना है साखी ।
तब तक रक्षा करे तुम्हारी ,
बहना की प्यारी राखी ।।

दिन बीते सुख चैन भरे ,
रातेँ बीते आनन्द भरी ।
रेशम के कोमल धागोँ मेँ ,
बहना की प्रीत भरी ।।

मेरी बहना , प्यारी बहना ,
तुझे वचन मैँ देता हूँ ।
जीवन भर अपनी बहना की
रक्षा का प्रण लेता हूँ ।।

बहना तेरी आन ~ मान पर
आँच न मैँ आने दूँगा ।
इस प्यारी राखी के बदले
जीवन भी अपना दूँगा ।।

रक्षाबंधन पर कविता-2

रक्षाबंधन कविता

आपकी रक्षा मैं करूँ
मेरी रक्षा आप
विश्व शिखर पर पहुंचे भारत
ऐसा कर लो जाप
राखी का ये धागा कहता
तू मेरा मैं तेरा हूँ
तू गर मेरा अब्दुल हमीद तो
मैं मोदी भी तेरा हूँ
मेरे मुल्क का कतरा कतरा
देश पे जान लुटाता है
जब मेरी बहना का धागा
हाथ मेरे बंध जाता है
बहना मांगे दुश्मन का सर
काट थाल में ला दूंगा

बहन कहे गर्दन कटवा दो
गर्दन भेट चढ़ा दूंगा
बहन कहे गर मेरे देश में
क्यूँ भय से ग्रसित महिलां हैं
बहना के इस कहने पर
मैं फिर तलवार उठा लूँगा
बददिमाग गंदे लोगो की
गर्दन काट गिरा दूंगा
मेरी बहाना ने अबकी बस
यूपी शगुन में माँगा है
मैंने भी इन तीन वर्ष में
यूपी स्वर्ग बनाना है
सपा रहे या बसपा सबको
काल की भेंट चढ़ाना है
जैसा देश में मोदिराज है
राज उसी सा लाना है
राखी जैसे बंधन का
बहना का कर्ज चुकाना है

-मनोज कश्यप

रक्षाबंधन पर कविता-3

बहन की शायरी

रक्षाबंधन पर एक कविता …..
तू कित सै, सुखी रहिये जित सै
तू उपरली हवा मैं झूलग्या
अर मन्नै जमा-ए भूलग्या
भूलै सै तो भूल जाइये
पर एक ब उस स्कूल जाइये
उस स्कूल में जित जाया करते दोनूँ
तफ़रियां में गुड़ का चूरमा खाया करते दोनूँ
तेरै याद सै, तू एक दिन पड़ग्या था
रोया था तू, नूर चेहरे का झड़ग्या था
आपणी क्लास मैं तैं मैं भॅाज़ के आई थी
तेरा बस्ता, तेरी तख़्ती जाकै मन्नैं ठाई थी
तेरे ख़ातर खेत मैं तैं मटर पाड़ के ल्याई थी
जोहड़ पै भैंसाँ के पाँयां मैं तैं काढ़ के ल्याई थी

साढ़े बावन रुपये करे थे कट्ठे चवन्नी-चवन्नी जोड़ कै
याद सै तू काढ़ लेग्या था गुल्लक नै फोड़ कै
मैं तो रो कै रहगी थी, पर दुःख ना था
भाई राजी था मेरा, उसतैं बड़ा सुख ना था
कितणी ब तू बिना बताये, देर रात तैं आया था
मन्नै कहग्या था, या झूल बोल कै बाबू तैं बचाया था
जब तू छोटा था, मैं तेरा पाणा झूलाया करती

बहन की शायरी 2

माँ घर का काम करै थी, मैं तन्नै खिलया करती
मेरे कान तले आज भी, झुरकुटों का निषान सै
पर षायद बीर मेरे, तू मेरे तैं अन्जान सै
घर-बार छोड़ तो आई, आॅकै नै अपनी दुनियां बसाई
सारे सुख सैं दुनिया के आज, बस तू खुश रहिये मेरे भाई
मैं जाणूँ सूँ, तू भी बहाण तैं प्यार करै सै
बहाण तन्नै ज़ान तै प्यारी, बस न्यूँ-ए तकरार करै सै
भाई-बहाण के प्यार नै भूलाइये ना
छोह कितणा-ए आज्या, मन नै तू डुलाइये ना
किसे नै बहाण लागे फूल-सी, किस नै केसर क्यारी सै
इस दुनियाँ मैं सब भाईयाँ नै आपणी बहाण प्यारी सै
ज्याँ तैं कहूँ सूँ भाई मेरे, मेरा कहण पुगाइये

किसे भी भाई नै बहाण की गॅाल़ ना सुणाइये
क्यूँकि किसी नै लागै फूल-सी, किसी-नै केसर क्यारी सै
इस दुनियाँ मैं सब भाईयाँ नै आपणी बहाण प्यारी सै
आपणी बहाण प्यारी सै।

रक्षाबंधन पर कविता-4

रक्षाबंधन शायरी

मेरी कविता रक्षाबंधन पर
तुम बाबुल की बगियाँ के पेड़ हो भैया,
मैं माँ की ममता की नाजुक सी फुलवारी,
प्यार स्नेह समर्पण को धागे में गूँथ,
लेकर आई हूँ रिश्तों की यह ड़ोर न्यारी!
न सुनी रहे कभी तुम्हारी कलाई, नित नित करू ये वन्दन!
सब रिश्तों से न्यारा हैं भैया, भाई बहिन का नेह-बँधन!!
ना चाहू मैं बंगला ना कोई गाड़ी,
ना रूपया पैसा ना कोई महँगी साड़ी,
जब भी आऊ हँस कर बोलना भैया,
बस इतना ही चाहती हैं ये राजदुलारी!

सर पर सदा हाथ धरना, ना मांगू कोई और अभिनंदन,
सब रिश्तों से न्यारा हैं भैया, भाई बहिन का नेह-बँधन!!
तुम पर कभी न कोई संकट आये,
न हो जिंदगी में कभी कोई परेशानी,
राखी के इस त्यौहार पर भैया,
यही कामना करती हैं बहना तुम्हारी!
तुम्हारा जीवन यूँ महके, जैसे महकता हैं चन्दन,
सब रिश्तों से न्यारा हैं भैया, भाई बहिन का नेह-बँधन!!
कविता”राखी”/ भँवर “वनमाली”

रक्षाबंधन पर कविता-5

रक्षाबंधन पर शायरी

अनोखे रंगों में रंगा मेरा रक्षाबंधन
इंसान से इंसान के प्यार को
समर्पित है मेरा रक्षाबंधन,
अनोखे रंगों से रंगा है मैंने मेरा रक्षाबधंन।
आओ हम सब मिलकर एक अनोखा पर्व मनाते हैं,
राखी के इस पावन पर्व को राष्ट्रीय पर्व बनाते हैं।
बांध के एक दूजे को राखी रक्षा का वचन उठाते हैं,
न उजड़े संसार किसी बहन का
न बिखरे सपने किसी भाई के।
हाथों से हाथ मिलाकर मानव श्रंखला बनाते हैं,
बेसहारा का सहारा बन राखी पर्व मानते हैं।

रक्षाबंधन पर शायरी 2

चलते हैं उन सीमाओं पर जँहा वीर जवान रहते हैं,
भारत माँ की रक्षा में भूल चुके सब सपने हैं।
बांध के राखी उन हाथों में
कुछ मान अपना बढ़ाते हैं
और सम्मान उनका दिखाते हैं
चलते हैं उन तंग गलियों में
खोया है मासूमों का बचपन जिनमें,
बिन सपनों के सुनी आँखें
राह तकती बाहें फैलाके,
कुछ सपने उनमें भर देते हैं,

हाथ बढ़ाकर अपना साथ उनका निभा लेते हैं।
चलते हैं उन बंज़र बागों में
भूल चुके जो सावन हैं,
ऊँचे खड़े वृक्ष को तरसे
चंपा और चमेली भूले,
फिर से नई क्यारी हम सजाते हैं
सींच के उनको नए वृक्ष खड़े हम करते हैं।
कितने प्रण हैं लेने को और कितने पल हैं जीवन को,
क्यों व्यर्थ करें इस जीवन को और क्यों अपने तक सीमित हों, हाथ बढ़ाकर अपना नया प्रण हम उठाते हैं,
मानवता की रक्षा में नया कदम हम बढ़ाते हैं
एक अनोखे रंग में रक्षाबंधन हम मानते हैं।
—मीनाक्षी माथुर

रक्षाबंधन पर कविता-6

रक्षाबंधन 2017

अहोभाग्य मेरे जो समझा मुझे इस क़ाबिल
तन गीता मन क़ुरान हुई रूह मेरी बाईबिल

गुरूग्रँथ का हर पन्ना करता है आरती वँदन
निस्वार्थ प्रेम अनमोल जग में नाम रक्षाबँधन

रक्षाबंधन पर कविता-7

बहन भाई की शायरी

बेशक कितने थाल भरे हो सोने चांदी हीरोँ के,
बेशक रस्ते खुले हुए हो बंद पङी तकदीरोँ के,
लेकिन जहां पर हो बहना मैँ उसी दिशा मेँ जाउंगा,
मैँ छोङ के सारी दौलत बहना से राखी बंधवाउंगा!!!
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जिसे दिन बहना रेशम वाला धागा लेकर आती है-2
उस धागे पर चंदा तारे सूरज सब जङ लाती है
जब राखी बंधेगी हाथ मेरे सारी दुनिया पा जाउंगा,
मैँ छोङ के सारी खुशियां………….
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बहना अगर बङी हो तो वो सारे दुःख हर लेती है-2
बहना छोटी हो तो सारा घर खुशियोँ हे भर देती है,
मैँ उन बहनो की खातिर जीवन भर लिखता जाउंगा,
मैँ छोङ के सारी दौलत बहना से राखी बंधवाउगा!!!!!
सभी दोस्तोँ को और मेरी सभी बहनोँ को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं…………
-नवीन गौङ

रक्षाबंधन पर कविता-8

poem on raksha bandhan

कहने को तो हमसब रक्षाबंधन पर्व मनाते हैं,
भाई बहन के हृदय प्रेम अभिनंदन पर्व मनाते हैं,
फिर आखिर शोषित क्यों बहने हैं मेरे समाज में,
क्यों पीड़ा छिपी होती है बहनो की आवाज़ में,
बहने राखी बांध कलाई मंद मंद मुस्काती हैं,
जबतक राखी बांध न लेती कुछ भी नही वो खाती हैं,
आज देश का हर एक भाई अपनी बहन को वादा दे,
हर नारी को पूज्य मानूंगा ये मज़बूत इरादा दे,
तब जाकर के रक्षाबंधन पर्व सफल हो पायेगा,
बहनो की राखी को उनका सही सगुन मिल पायेगा
रचनाकार :- विद्या वैभव भारद्वाज

रक्षाबंधन पर कविता-9

raksha bandhan poems

वो लोहू में लावा भर हैं, हिमगिरि की चट्टानों पर
उनके सीने में अग्नि है ,आग लगी अरमानों पर
घाटी में दुश्मन की खातिर ,घात लगाए बैठे जो
शत्रु की हरकत पर हरदम आँख लगाए बैठे जो
वहां नही सुन पाते वो , बच्चों की तुतली बोली को
आमंत्रण देकर बैठे हैं वो दुश्मन की गोली को

माँ बाबू जी पत्नी का उन्हें प्यार नही मिल पाता है
सुघड़ सलोना रिश्तों का, संसार नही मिल पाता है
इक पल को जीकर देखो उन बेटों के हालातों को
जो सीमा पर झेल रहे हैं , दुश्मन के आघातों को
अपनी माँ से बढ़कर मानी , उनने भारत माता है
इसीलिए हर भारत वासी का उनसे कुछ नाता है
उस नाते से मुझको – इतना हर बेटी से कहना है
भारत माता की हर बेटी , उस भाई की बहना है
रक्षा बंधन है राखी तुम , बांधों किसी कलाई पर
बहिनों पहले प्यार लुटाना ,तुम सरहद के भाई पर
आपका भाई- कवि सुमित ओरछा

रक्षाबंधन पर कविता-10

short poem on raksha bandhan

तागे दिया तंदा कच्चियाँ,,
नी पैने ऐ डोरा पक्कियाँ…”
वीरे दे हथ सोनिया सजिया,
रब तो तेरीया दुआवां मंगिया..
पैन ते वीर दा ऐ रिश्ता जेडा,
उस घर दा सुन्ना हुँदा ना वेडा..
रब्बा हर वीर नु इक्क पैन देवी,
मेहताब उम्रा तई डोरा सच्चियाँ..
“तागे दिया तंदा कच्चियाँ,,
नी पैने ऐ डोरा पक्कियाँ…!!

रक्षाबंधन पर कविता-11

raksha bandhan poem in hindi

जब लोग मना रहे थे
सम्पूर्ण नारी जगत को
रक्षा संकल्प का
भाव पूर्ण त्योहार
मैं सोंच रही थी
उन कलाइयों को
बाज के पंजे में पक्षी सी
क्रूर राक्षसी पकड़ को
जिसने चीख़ों चीत्कारों
मेरी गिड़गिड़ाहट को कुचला
और मसला मुझे एक बार नहीं कई बार ।
मन में फिर से पीड़ाओं

(2)

और छटपटाहाट ने
मुझे आ जकड़ा
दर्द से अंग अंग टूटने लगा
और अंदर कहीं नसों के फटने से
बह निकली रक्त की धार
बचा नहीं जीने का एक भी आधार
सीने में पत्थरों को भर लिया था मैंने
आँखों के आसुओं ने बहने से मना कर दिया
जीते जी गुमनामी में हो गया

एक कुनबा एक घर एक हँसता
सपने सजाता खिल खिलाता परिवार ।
सीधे हांथ की कलाई में
रक्षा निभाने के वचनों का बंधना
कितना ढीला और कमजोर है
उल्टे हांथ की कलाई की पकड़ उतनी ही मजबूत
एक में है भाई होने का ढकोसला
दूसरे हांथ में है बलात्कारी कुकर्मी खूंख्वार ।
– अवधेश सिंह

रक्षाबंधन पर कविता-12

बंधन शायरी

जब से बहने इस घर से परायी हो गई,
राखी के त्योंहार की भी जैसे विदाई हो गई !
रंग-बिरंगे धागो से इस दिन
सजे रहते थे हाथ,
वो वक़्त भी क्या हसीं था
जो गुजरा बहनो के साथ,
पर ऐ खुदा तुझसे ये कैसी खुदाई हो गई
समय गुजरता रहा और सूनी कलाई हो गई !
जब से बहने इस घर से परायी हो गई,
राखी के त्योंहार की भी जैसे विदाई हो गई !
कहते है ये बंधन है
भाई बहन के प्यार का,

रक्षाबंधन कविता

तभी तो लोगो ने इसे
नाम दिया त्योंहार का
पर वो पीढ़ी पुरानी थी, आज पीढ़ी नयी हो गई,
तभी तो आज की “राखी” बस, आई-गई हो गई !
बदलती दुनिया में पुरानी बातें, हवाई हो गई,
राखी के त्योंहार की भी जैसे विदाई हो गई !

किससे करें शिकायत यहाँ
ये दुनिया हैं गुनहगारों की,
नयी सोच, नयी उमंग मगर….
क़द्र नहीं त्योंहारों की,
“फ्रैण्डशिप डे” पर दोस्तों को घुमाना,
“वैलेंटाइन्स डे” पर गर्लफ्रेंड को गिफ्ट दिलाना
अंग्रेजी त्योंहारों की तो हर तरफ,
बढ़ाई हो गई,
और इस भीड़ में “रेशम की डोरी”
ना जाने, कहाँ खो गई !
ढूंढा तो एक कोने में दुबकी मिली,
और हाल पूछा तो रो गई,
बोली इस दौर में उसकी तो अब, तन्हाई हो गई,
राखी के त्योंहार की भी जैसे विदाई हो गई !

Rakshabandhan KAVITA

कुछ सड़कछाप लैला-मजनुओं के
वहशीपन के कारण,
इस पावन रिश्ते की, जग-हसाई हो गई
भाई बहन के रिश्ते का नाम लेकर
छुप-छुप कर मिलना,
मर्यादाएं पार करना,
उनके लिए तो जैसे राम-बाण दवाई हो गई !
इन असभ्य लोगो के कारण,
सभ्य लोगो की भीड़ में,
भाई-बहन के रिश्ते की, रूसवाई हो गई !
पावनता तार-तार हुई,
पवित्रता शर्मसार हुई,
और भावनाओं की तो दीवारों में, चुनाई हो गई !

इंसानियत की तो इन इंसानो से बस, जुदाई हो गई,
राखी के त्योंहार की भी जैसे विदाई हो गई !

रक्षाबंधन पर कविता-13

राखी पर शायरी

तू कित सै, सुखी रहिये जित सै
तू उपरली हवा मैं झूलग्या
अर मन्नै जमा-ए भूलग्या
भूलै सै तो भूल जाइये
पर एक ब उस स्कूल जाइये
उस स्कूल में जित जाया करते दोनूँ
तफ़रियां में गुड़ का चूरमा खाया करते दोनूँ
तेरै याद सै, तू एक दिन पड़ग्या था
रोया था तू, नूर चेहरे का झड़ग्या था
आपणी क्लास मैं तैं मैं भॅाज़ के आई थी

तेरा बस्ता, तेरी तख़्ती जाकै मन्नैं ठाई थी
तेरे ख़ातर खेत मैं तैं मटर पाड़ के ल्याई थी
जोहड़ पै भैंसाँ के पाँयां मैं तैं काढ़ के ल्याई थी
साढ़े बावन रुपये करे थे कट्ठे चवन्नी-
चवन्नी जोड़ कै
याद सै तू काढ़ लेग्या था गुल्लक नै फोड़ कै
मैं तो रो कै रहगी थी, पर दुःख ना था
भाई राजी था मेरा, उसतैं बड़ा सुख ना था
कितणी ब तू बिना बताये, देर रात तैं आया था
मन्नै कहग्या था, या झूल बोल कै बाबू तैं
बचाया था

Rakshabandhan POEM

जब तू छोटा था, मैं तेरा पाणा झूलाया करती
माँ घर का काम करै थी, मैं तन्नै खिलया करती
मेरे कान तले आज भी, झुरकुटों का निषान सै
पर षायद बीर मेरे, तू मेरे तैं अन्जान सै
घर-बार छोड़ तो आई, आॅकै नै
अपनी दुनियां बसाई
सारे सुख सैं दुनिया के आज, बस तू खुश रहिये
मेरे भाई
मैं जाणूँ सूँ, तू भी बहाण तैं प्यार करै सै
बहाण तन्नै ज़ान तै प्यारी, बस न्यूँ-ए तकरार
करै सै

हरियाणवी कविता

भाई-बहाण के प्यार नै भूलाइये ना
छोह कितणा-ए आज्या, मन नै तू डुलाइये ना
किसे नै बहाण लागे फूल-सी, किस नै केसर
क्यारी सै
इस दुनियाँ मैं सब भाईयाँ नै आपणी बहाण
प्यारी सै
ज्याँ तैं कहूँ सूँ भाई मेरे, मेरा कहण पुगाइये
किसे भी भाई नै बहाण की गॅाल़ ना सुणाइये
क्यूँकि किसी नै लागै फूल-सी, किसी-नै केसर
क्यारी सै
इस दुनियाँ मैं सब भाईयाँ नै आपणी बहाण
प्यारी सै
आपणी बहाण प्यारी सै।

रक्षाबंधन पर कविता-14

रक्षाबंधन मराठी कविता

जिन झोपडियों में था बस अंधियारा;
उनमें जला चिराग हूँ मैं।
जो हर मधुवन को महका दे;
वो सन्दल वाली राख हूँ मैं।
माँ का प्यार,संस्कार पिता के;
साथ सदा मैं रखता हूँ।
जिन बहनों का कोई भाई नहीं;
मैं उनका भाई लगता हूँ।
खुशी के इन पलों पर मैं,हंसी पैगाम देता हूँ।
रहें महफूज सब बहनें,मैं ऐसा काम करता हूँ।
जमाने की सभी खुशियाँ,सभी बहनों को मिल जाएं।
मैं दुनियां की सभी बहनों को,प्रणाम करता हूँ।

रक्षाबंधन पर कविता-15

भाई पर कविता

चलो मना लेते हैं रक्षाबंधन
लिखकर कोई कविता
हलका कर लेते हैं अपना मन
चलाे मना लेते हैं रक्षाबंधन
राखियां खरीद लाते हैं बाजार से
ले आते हैं मिठाई, रुमाल, गिफ्ट
खरीद लेते हैं एक अच्छी सी फिराख
नन्हीं नन्हीं कलाइयों के लिए कंगन
बैठकर कहीं याद करते हैं बचपन
चलो मना लेते हैं रक्षाबंधन
घर में बनाते हैं अच्छे पकवान

गूजा, पपडी, खुरमे और चमचम
बजाते हैं दिनभर राखी के गीत
दूर परदेश में बैठी है बहन
समय की बेडियों में बंधे अपने तन
मन दौडा जा रहा बहना के आंगन
चलाे मना लते हैं रक्षाबंधन
लिखकर कोई कविता
हलका कर लते हैं अपना मन
चलो मना लेते हैं रक्षाबंधन
-राजेश व्यास

रक्षाबंधन पर कविता-16

रक्षाबंधन पर शायरी

नहीं चाहिए मुझको हिस्सा माँ बाप की
दौलत में चाहे कुछ भी लिख जाएं भैया
वसीयत में,नहीं चाहिए मुझको झुमका चूड़ी पायल और कंगन नहीं चाहिए अपने
पन कि कीमत में बेगानापन ।
मुझको नशवर चीजों की दरकार नहीं संबंधों के कीमत पर कोई सुविधा नहीं
माँ के सारे गहने तुम भाभी को दे देना
बाबु जी का जो कुछ है सब खुशी खुशी
ले लेना।
चाहे पूरे वर्ष कोई चिट्ठी पत्री मत लिखना
मेरे निमत्रण का चाहे मोल नहीं करना

रक्षाबंधन पर शायरी 2

नहीं भेजना तोहफे तीज त्यौहार पर, पर थोड़ा सा हक दे देना बाबूल के गलियारों पर।
रुपया पैसा कुछ ना चाहूँ बोले मेरी राखी है आशीर्वाद मिलें मेंके से इतना काफी
है तोड़ से ना टुटे यह ऐसा मन बंधन है
इस बंधन को सारी दुनिया रक्षाबंधन
कहती हैं तुम भी इस कच्चे धागे का
मा जरा मान रख लेना कम से कम
राखी के दिन बहना का रास्ता ताक
लेना।
मित्रों नारी जीती दूसरों के लिए हैं
चाहे किसी भी रुप में देख लेना
धन्य है सौच इनकी धन्य हैं मातृ शक्ति।

रक्षाबंधन पर कविता-17

रक्षाबंधन वर कविता

ये राखी बंधन है ऐसा ये राखी बंधन है ऐसा
जैसे चंदा ओर किरण का जैसे बदली ओर पवन का
जैसे धरती ओर गगन का ये राखी बंधन है ………
दुनिया की जितनी बहने है उन सबकी श्रद्धा इसमें है
है धर्म कर्म भैया का ये बहना की रक्षा इसमें है
जैसे सुभद्रा ओर कृष्ण का जैसे बदली ओर पवन का
जैसे धरती ओर गगन का ये राखी बंधन है ऐसा …………
छोटी बहना बाँध के धागा भैया तुझे दुआए दे

सात जनम् की उम्र मेरी भगवन तुझे लगा दे
अमर प्रेम है भाई बहन का जैसे धरती ओर गगन का
जैसे चंदा ओर किरण का ये राखी बंधन ……….
आज खुशी के दिन भाई के भर भर आये नैना
कदर बहन की उनसे पूछो जिसके ना कोई बहना
मोल नही कोई इस बंधन का जैसे धरती ओर गगन का
जैसे चंदा ओर किरण का ये राखी …………

रक्षाबंधन पर कविता-18

कभी द्रौपदी का रक्षक,
तो कभी इंद्र जयमाला है।
एक नहीँ कई रिश्तोँ का,
रक्षाबंधन रखवाला है।।1।।
संकट की अग्नि मेँ जब,
भाई का जीवन तपता है।
स्नेह बंध से वशीभूत
बहना का हृदय तड़पता है।
माँ,पत्नी और सखा रूप मेँ,
प्रेम सरस का प्याला है।
एक नहीँ कई रिश्तोँ का,
रक्षाबंधन रखवाला है।।2।।

राखी पर कविता

गुरू शिष्य को बांधे तो यह विद्यारम्भक कहलाए।
यही शिष्य गर गुरू को दे तो ,
गुरू दक्षिणा बन जाए।
हिन्दु-मुस्लिम एक करे,
ये धागा बहुत निराला है।
एक नहीँ कई रिश्तोँ का ,
रक्षाबंधन रखवाला है।।2।।
सबसे पावन राखी वह,
शत्रु दल पर एक आँधी है।
सीमा पर खड़े सपूतोँ को,
भारत माता ने बाँधी है।
फौजी भाई के भीतर,
जल उठी जीत की ज्वाला है।
एक नहीँ कई रिश्तोँ का,
रक्षाबंधन रखवाला है।।4।।

बंधी हुई है एक धागे से,
लोकतंत्र की चार मीनार।
राजनीति के कन्धोँ पर है।
इसकी रक्षा का सम्भार।
देशभक्ति के धागे ने ही,
अब तक इसे सम्भाला है।
एक नहीँ कई रिश्तोँ का रक्षाबंधन रखवाला है।।5।।
-महेश महला

रक्षाबंधन पर कविता-18

रक्षाबंधन पर गीत

जिन झोपडियों में था बस अंधियारा;
उनमें जला चिराग हूँ मैं।
जो हर मधुवन को महका दे;
वो सन्दल वाली राख हूँ मैं।
माँ का प्यार,संस्कार पिता के;
साथ सदा मैं रखता हूँ।
जिन बहनों का कोई भाई नहीं;
मैं उनका भाई लगता हूँ।

 

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