राजस्थान में जल संकट पर निबंध | Water Crisis In Rajasthan

Essay on water crisis in Rajasthan (राजस्थान में जल संकट) पंचभौतिक पदार्थो में पृथ्वी के बाद जल तत्व का महत्व सर्वाधिक माना गया है. मंगल आदि अन्य ग्रहों पर जल के अभाव से ही जीवन एवं वनस्पति का विकास नही हो पाया है. ऐसा नवीनतम खोजों से स्पष्ट हो गया है. कि धरती पर ऐसे कई भू-भाग है, जहाँ जलाभाव से रेगिस्तान का प्रसार हो रहा है. तथा प्राणियों को कष्टमय जीवन यापन करना पड़ रहा है. राजस्थान प्रदेश का अधिकतर भू भाग सदा से जल ग्रस्त रहता है. समय पर उचित अनुपात में वर्षा न होने से यह संकट और बढ़ जाता है.

 राजस्थान में जल संकट पर निबंध | Water Crisis In Rajasthan

जल संकट की स्थति-राजस्थान में प्राचीन काल से सरस्वती नदी प्रवाहित होती थी. जो अब धरती के गर्भ में विलुप्त हो चुकी है. यहाँ अन्य ऐसी कोई नदी नही बहती है जिससे जल संकट का निवारण हो सके. चम्बल एवं माही आदि नदियाँ राजस्थान के दक्षिणी पूर्वी कुछ ही भाग को हरा-भरा रखती है.

इसकी पश्चिमोउत्तर भूमि एकदम से निर्जल है. इसी कारण यहाँ पर रेगिस्तान का उतरोतर विकास हो रहा है. भूगर्भ में जो जल है, वह काफी नीचे है, खारा एवं दूषित है. पंजाब से श्रीगंगानगर जिले से होते हुए इंदिरा गांधी नहर से जो जल राजस्थान के पश्चिमोतर भाग में पहुचाया जा रहा है उसकी स्थति भी सन्तोषप्रद नही है. पूर्वोत्तर राजस्थान में हरियाणा से जो जल मिलता है, वह भी जलापूर्ति नही कर पाता है. इस कारण राजस्थान में जल संकट की स्थति सदा ही बनी रहती है.

राजस्थान में जल संकट के कारण (The water crisis in Rajasthan)

पहले से ही राजस्थान में मरुस्थलीय भूभाग होने से जल का संकट है. फिर लगातार प्रदेश की आबादी बढ़ रही है और औद्योगिक विकास भी तीव्र गति से हो रहा है. यहाँ के शहरों में बड़ी बड़ी औद्योगिक इकाईयों में भूगर्भीय जल का दोहन बड़ी मात्रा में हो रहा है. खनिज संपदा तथा संगमरमर, ग्रेनाईट, इमारती पत्थर, चूना पत्थर आदि के विदोहन से धरती का जल स्तर गिरता जा रहा है.

दूसरी ओर वर्षाकाल में सारा पानी बाढ़ के रूप में बह जाता है शहरों में कंक्रीट डामर आदि के निर्माण कार्यो से वर्षा का जल जमीन के अंदर नही जा पाता है. इस कारण पातालतोड़ कुँए भी सूख गये है. यहाँ भूगर्भीय जल के विदोहन की यही स्थति अनियंत्रित है.

पुराने कुँए बावड़ी आदि की अनदेखी करने से भी जल स्त्रोत सूख गये है. पिछले कुछ वर्षो से राजस्थान में वर्षा भी अत्यल्प मात्रा में हो रही है. इस कारण बाँधो, झीलों, तालाबों-पोखरों और छोटी कुइयों में भी पानी समाप्त हो गया है. इन सब कारणों से यहाँ पर जल संकट गहराता जा रहा है.

जल संकट के समाधान हेतु सुझाव (water crisis and its solution)

राजस्थान में बढ़ते हुए जल संकट के लिए निम्न उपाय किये जा सकते है-

  • भूगर्भ के जल का असीमित विदोहन रोका जावे.
  • खनिज सम्पदा के विदोहन को नियंत्रित किया जावे.
  • शहरों में वर्षा जल के जल को जमीन में डालने की व्यवस्था की जाए.
  • बाँधो एवं एनिकटों का निर्माण, कुओं एवं बावड़ियो को अधिक गहरा एवं कच्चे तालाबों पोखरों को अधिक गहरा और चौड़ा बनाया जाए.
  • पंजाब हरियाणा और गुजरात में बहने वाली नदियों का जल राजस्थान में लाने का प्रयास किया जावे/

ऐसे उपाय करने से निश्चित ही राजस्थान में जल संकट का निवारण हो सकता है.

उपसंहार

‘रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून’ अर्थात पानी के बिना जन जीवन अनेक आशंकाओं से घिरा रहता है. सरकार को तथा समाज सेवी संस्थाओं को विविध स्रोतों से सहायता लेकर राजस्थान में जल संकट के निवारणार्थ प्रयास करने चाहिए. ऐसा करने से ही यहाँ की धरा मंगलमयी बन सकती है.

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