रामचरितमानस पर निबंध | Ramcharitmanas Essay In Hindi

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रामचरितमानस पर निबंध Ramcharitmanas Essay In Hindi

रामचरितमानस पर निबंध Ramcharitmanas Essay In Hindi

प्रस्तावना– श्रेष्ठ ग्रंथ मनुष्य के सच्चे मार्गदर्शक होते हैं. वे उसके सुख दुःख के सच्चे साथी होते हैं. दुःख के क्षणों में वे उसको धैर्य और सांत्वना देते हैं. तो सुख के क्षणों में उसके आनन्द को द्विगुणित कर देते हैं. श्रेष्ठ ग्रंथों को तलाश कर पढ़ना प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य हैं. मैंने अपने जीवन में अनेक पुस्तकें पढ़ी हैं किन्तु जो प्रसन्नता और संतोष मुझे गोस्वामी तुलसीदास के रामचरितमानस को पढ़कर प्राप्त हुआ हैं, वह किसी अन्य ग्रंथ के अध्ययन से नहीं मिला. इसी कारण रामचरितमानस मेरी प्रिय पुस्तक हैं.

मानस की विषय वस्तु– रामचरितमानस का विषय लोक पावन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् राम का चरित्र हैं. सूर्यवंशी सम्राट दशरथ के यहाँ जन्म लेकर अयोध्या की गलियों में क्रीड़ा करने वाले परम आज्ञाकारी और मेधावी बालक थे. वह जनक की राज सभा में शिव के धनुष को खंडित करके, जगदम्बा सीता का पाणिग्रहण करते हैं. कैकेयी के षडयंत्र के कारण राम वनवासी होते हैं.

चौदह वर्ष के वनवास में सीता का लंकापति रावण द्वारा अपहरण सेंतुबंध, राम रावण युद्ध, लंका विजय और उसके पश्चात राम का राज्याभिषेक इन सभी घटनाओं तथा अनेक सहायक कथाओं को महाकवि तुलसीदास ने अपने प्रतिभा कौशल से महाकाव्य त्व की काया में बांधा हैं.

लोकप्रियता के आधार– रामचरितमानस की लोकप्रियता के पीछे निम्नलिखित महत्वपूर्ण तथ्य हैं.

  • समन्वय का प्रशंसनीय प्रयास– तुलसीदास ने मानस में समन्वय की उदार भावना को स्थान दिया हैं. उसमें समाज के प्रत्येक वर्ग का प्रतिनिधित्व हैं. लौकिकता और आध्यात्मिकता, ज्ञान और भक्ति साकार और निराकार उपासना आदि सभी के समन्वय का सफल प्रयास हुआ हैं.
  • महान आदर्शों का प्रस्तोता– रामचरितमानस की लोकप्रियता का दूसरा कारण हैं उदात्त आदर्श का प्रस्तुतिकरण. पिता दशरथ, माता कौशल्या, पत्नी सीता, पुत्र राम जैसा भाई भरत और लक्ष्मण जैसे गुरु वसिष्ठ सा, दास हनुमान सा, भक्त शबरी जैसी कहाँ तक गिनाया जाए, तुलसीदास ने जीवन का कोई अंग अछूता नहीं छोड़ा यहाँ तक कि मित्रता और शत्रुता का आदर्श भी उन्होंने प्रस्तुत किया हैं.
  • धर्म और आध्यात्मिकता का मेरुदंड– रामचरितमानस ने लोकधर्म का विकास किया हैं. उसमें धर्म और आध्यात्म पर नीरस उपदेश न होकर आचरण का उत्कर्ष हैं. सभी धर्म सम्प्रदाय उसे मुक्त भाव से अपना सकते हैं. उसमें धर्म के सभी मूलतत्व विद्यमान हैं.

आशा और विश्वास का मणिद्वीप– मानस ने निराशा और उत्पीड़न के अन्धकार में डूबी पूरी एक जाति को सहारा दिया था. आज भी मानस अप्रांसगिक नहीं हुआ हैं. वह केवल एक धार्मिक ग्रंथ मात्र नहीं हैं, करोड़ो मानवों को जीवन की गूढ़ समस्याओं में मार्ग दिखाने वाला हैं. सामाजिक और पारिवारिक समरसता की अमूल्य भेंट वह आज भी हमें दे सकता हैं.

काव्यगत वैभव– रामचरितमानस एक काव्य के रूप में कम वैभवपूर्ण नहीं हैं. इसके भावपक्ष और कलापक्ष दोनों ही अनुपम हैं. मानव जीवन की सभी भावनाओं, परिस्थतियों, उत्कर्ष और अपकर्ष को इसमें स्थान मिला हैं. रस, अलंकार, छंद, भाषा, शैली सभी कला तत्व अपने उत्कृष्ट रूप में विद्यमान हैं.

उपसंहार– रामचरितमानस पर धार्मिकों और काव्यप्रेमियों का समान अनुराग रहा हैं. यह केवल हिन्दुओं का धर्मग्रंथ मात्र नहीं हैं अपितु विश्व साहित्य की अनुपम कृति हैं. आज भी यह उतना ही प्रासंगिक और प्रेरक हैं जितना सैकड़ो वर्ष पूर्व था. यह भारतीय संस्कृति का वटवृक्ष हैं, जिस पर हर जाति के विहंग निस्संकोच आश्रय ले सकते हैं. यही कारण हैं कि यह मेरा प्रिय ग्रंथ हैं.

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