राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम | National Food Security Act

National Food Security Act एक तरफ हमारे देश के जाने माने अर्थशास्त्री ये दावा कर रहे है कि भारत बेहद जल्द विश्व महाशक्ति के रूप में उभर रहा है. दूसरी तरफ हमारी सरकार द्वारा ही जारी कृषि एवं विकास के वर्तमान आंकड़ो पर नजर डाली जाए तो यह बात पूरी तरह से बेमानी लगती है.

आज भारत के कई गाँवों के हालात ऐसे है जहाँ लोगों को भरपेट खाना नही मिल पाता है. शहरों के हालात भी ज्यादा कुछ अच्छे भी नही है. इसी समस्या से निपटने तथा कम आय के तबके को भोजन मुहैया करवाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम पारित किया गया. इस एक्ट में शामिल सभी अहम बातों को National Food Security Act के इस ESSAY को जानेगे.

National Food Security Act In Hindi | राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम

National Food Security Act
National Food Security Act

National Food Security Act 2013 In Hindi – खाद्य सुरक्षा का अर्थ भारत के हर नागरिक की प्राथमिक आवश्यकता भोजन को उन तक पहुचाना, भारतवर्ष जैसे विकासशील देश में इस अधिनियम की महती आवश्यकता इसलिए भी है क्युकि यहाँ निम्नवर्गीय परिवारों की संख्या सबसे अधिक है. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम को लागू करने से पूर्व सरकार द्वारा उन सभी तथ्यों को ध्यान में रखा गया, जैसे जनसंख्या वृद्धि की दर, उत्पादन और उपभोग के बिच आवश्यक संतुलन.

हमारे देश में गरीबी तथा भुखमरी के हालातों को समझने के लिए कुछ साल पहले जारी हंगर इंडेक्स रिपोर्ट को ध्यान में लाना जारी है. 2010 में विश्व के 84 देशों में किये गये सर्वेक्षण में भारत के हालात बेहद नाजुक है. इन देशों की सूची में भारत को 67 वाँ स्थान दिया गया था. इससे अहम बात यह थी कि भारत के पडौसी देश पाकिस्तान, नेपाल तथा श्रीलंका इस सूची में बहुत उपर है, जहाँ कुपोषण, शिशु मृत्यु दर भारत से भी कम दर्शायी गई है.

23 जुलाई 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में भूख एक गंभीर समस्या है और 119 देशों के वैश्विक भूख सूचकांक में भारत 100वें पायदान पर है। भारत उत्तर कोरिया और बांग्लादेश जैसे देशों से पीछे है.

सरकार के आंकड़ो के मुताबिक़ हमारे देश की कुल जनसंख्या के बहुत बड़ा हिस्सा तक़रीबन 38 प्रतिशत लोग अभी भी BPL यानि गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे है. एक समय था जब भारत खाद्यानो के उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो गया था तथा विदेशों को अनाज भी निर्यात करता था. मगर 20 वीं सदी के अंतिम दशकों में तेजी से बढ़ी जनसंख्या ने फिर से भुखमरी के हालात पैदा कर दिए है. इस दिशा में भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू करना एक अच्छा कदम है.

भारतीय खाद्य निगम

भारतीय खाद्य निगम भारत का एक निगम है। भारत में खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने हेतु यह खाद्यान्नों का क्रय करके उन्हें गोदामों में भण्डारित करता है। जिसकी स्थापना 1965 में राजधानी दिल्ली में की गई थी.

यह निगम किसानों से खरीदी गई उपज को 1997 में शुरू की गई सहकारिता वितरण प्रणाली के द्वारा जरुरत मंद लोगों के लिए उचित मूल्य की दुकानों के द्वारा उपलब्ध करवाता है.

इस योजना के तहत पहले 3-4 रूपये की सस्ती कीमत पर गेहू और चावल वितरित किया जाता था. बाद के कई वर्षो में इस योजना का विस्तार करते हुए इसे अन्त्योदय अन्न योजना के साथ जोड़ते हुए 1 लाख BPL कार्ड धारकों को इसका लाभार्थी बनाया गया तथा उन्हें सस्ती कीमत पर अनाज उपलब्ध कारवाने की व्यवस्था उचित मूल्य की दुकाने के द्वारा की गई.

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा भारत की चुनोतियों में से एक है. यदि भारत को आगे बढ़ाना है तो धरातल पर सबका साथ सबका विकास के जरिये निम्न तबके के लोगों के हालत शीघ्र सुधारने होंगे.

तथा सरकार द्वारा खाद्य वितरण प्रणाली पर भी विशेष ध्यान देना होगा. नए सिरे से भारत की कृषि निति तथा उसमे उत्पादन, उपभोग तथा उद्योग इन तीनों में संतुलन स्थापित करना होगा, सच्चे अर्थो में तभी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सकेगा.

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