राष्ट्र संघ : उद्देश्य इसके अंग एवं असफलता के कारण | League Of Nations In Hindi

राष्ट्र संघ : उद्देश्य और इसके अंग | League Of Nations In Hindi : राष्ट्र संघ की स्थापना पेरिस शांति सम्मेलन 1919 का एक महत्वपूर्ण रचनात्मक कार्य था. राष्ट्र संघ की स्थापना में अमेरिकी राष्ट्रपति विल्सन की महत्वपूर्ण भूमिका रही. वर्साय संधि की प्रथम 26 धाराओं में राष्ट्र संघ की ही व्याख्या है. 1920 में राष्ट्र संघ ने अपना वैधानिक स्वरूप प्राप्त किया. वर्साय की संधि पर हस्ताक्षर करने वाले 32 देश इसके संस्थापक सदस्य बने. बाद में इनकी संख्या 55 हो गई.राष्ट्र संघ

राष्ट्र संघ के उद्देश्य (Aims And Objectives Of The League Of Nations)

  1. आपसी विवादों को सुलझाना व सुरक्षा की व्यवस्था करना.
  2. सभी राष्ट्रों के मध्य भौतिक व मानसिक सहयोग को प्रोत्साहन देना.
  3. पेरिस शांति समझौते द्वारा सौपे गये कर्तव्यों को पूरा करना.

राष्ट्र संघ के अंग (Organizations of the League of Nations)

राष्ट्र संघ के तीन प्रमुख अंग थे.-

  1. असेम्बली
  2. कौन्सिल
  3. सचिवालय

इसके अलावा इसके दो और स्वायत अंग थे. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय व अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक संगठन. लीग ऑफ नेशन की स्थापना के उद्देश्य तो विश्व समुदाय के लिए अच्छे थे. लेकिन यह महाशक्तियों के असहयोग और मनमानी गतिविधियों के कारण मात्र एक औपचारिक संगठन ही बनकर रह गया था. अपने उद्देश्य में इसे सफलता नही मिली.

राष्ट्र संघ के असफलता के कारण (Causes Of Failure Of League Of Nations)

पेरिस शांति सम्मेलन की उपज के रूप में उभरा अंतर्राष्ट्रीय संगठन विश्व शान्ति स्थापना के लिए गठित किया गया था. इसकी स्थापना में अमेरिका के राष्ट्रपति की अग्रणी भूमिका थी. वर्साय संधि के साथ ही जन्म लेने वाला संगठन अपनी कार्यशैली तथा स्वरूप के कारण अपने उद्देश्यों में सफल नही हो सका, जिसका परिणाम दूसरे विश्व युद्ध के रूप में देखने को मिला. इस संगठन की असफलता के पीछे कई कारण थे, जो निम्नलिखित थे.

  • इसकी असफलता का प्रमुख कारण सदस्य राष्ट्रों द्वारा ही इस पर विशवास नही किया जाना था, जिस कारण यह मात्र एक संगठन बनकर रह गया.
  • हालाँकि लीग ऑफ नेशंस की नीव अमेरिकी राष्ट्रपति के द्वारा रखी गई, मगर अमेरिका जैसे प्रभावशाली देश का इसका सदस्य न रहना. इसकी असफलता का सबसे बड़ा कारण था. इस वजह से राष्ट्रसंघ एक दुर्बल संगठन बनकर रह गया, जो किसी भी तानाशाही राष्ट्र पर किसी तरह का प्रतिबंध नही लगा सकता था.
  • यू.एस.एस.आर. आरम्भ से ही इसे अमेरिका तथा कुछ पूंजीपति देशों का संगठन मानकर चलता था. शुरुआत में यू.एस.एस.आर. को इसका सदस्य भी नही बनाया था, मगर हिटलर के भय के चलते सोवियत रूस को राष्ट्रसंघ की सदस्यता दी गई.
  • आरम्भ में जर्मनी को इसका सदस्य बनाया गया था, लेकिन वर्साय की अपमानजनक संधि के चलते जर्मनी ने कभी भी राष्ट्रसंघ का साथ नही दिया, तानाशाही शासक हिटलर अपने इस अपमान का बदला लेना चाहता था.
  • दूसरी तरफ इटली का शासक मुसोलिनी विश्व शांति के सिद्धांत में यकीन नही रखता था. इस कारण जर्मनी तथा इटली जैसे बड़े देशों का सहयोग भी इस संगठन को नही मिल सका.
  • शेष बचे यूरोपीय देश और सोवियत संघ सीधे तौर पर किसी पर कार्यवाही करके अपने राष्ट्र हितों को नुक्सान नही पहुचाना चाहते थे.

इस तरह की कमजोर और असहयोगी व्यवस्था को लेकर “राष्ट्र संघ”का लम्बे समय तक काम करना संभव नही था. इसी के परिनामस्वरूप दुनिया को दूसरे विश्व युद्ध की मार झेलनी पड़ी.

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