रूस की क्रांति 1917 कारण स्वरूप और परिणाम : Russian Revolution In Hindi

Russian Revolution In Hindi/ रूस की क्रांति 1917 कारण स्वरूप और परिणाम रूस की तत्कालीन शासक जार के अयोग्य, भ्रष्ट एवं निरंकुश शासन के विरुद्ध 1917 में रूस की क्रांति हुई. एवं जारशाही को समाप्त कर दिया. रूस में मार्च 1917 एवं नवम्बर 1917 में दो क्रांतियां हुई. मार्च की क्रांति में जारशाही शासन समाप्त हुआ एवं नवम्बर की क्रांति से रूस में किसान मजदूर जनतंत्र का उदय हुआ. इसे बोल्शेविक क्रांति भी कहते है. Russian Revolution In Hindi में इस क्रांति के स्वरूप कारणों तथा परिणामों पर विस्तृत चर्चा Russian revolution in hindi class 9.

रूस की क्रांति 1917 कारण स्वरूप और परिणाम : Russian Revolution In Hindi

रूस की क्रांति
स्रोत http://www.drishtiias.com

रूसी क्रांति के कारण (Causes For The Russian Revolution 1917)

  • निरंकुश जारशाही – रूस के शासक दैवीय अधिकारों में विशवास करते थे. समस्त शक्तियां जार में निहित थी. संसद ड्यूमा के पास किसी तरह की कोई शक्ति नही थी. अलेक्जेंडर तृतीय एवं निकोलस द्वितीय ने कठोर एवं दमनकारी निति अपनाई.
  • सामाजिक विषमता- रूस के समाज में दो वर्ग थे, एकाधिकार युक्त वर्ग एवं दूसरा अधिकारविहीन वर्ग. रूस की अधिकाश भूमि और शासन पर जार के कृपा पात्र कुलीन वर्ग का आधिपत्य था. निम्न वर्ग के लोग संख्या में अधिक थे फिर भी अधिकार विहीन थे. इससे लोगों में असंतोष पैदा हुआ.
  • श्रमिक असंतोष– औद्योगिक क्रांति के कारण रूस में भी अनेक उद्योग एव कारखाने लगे. मजदूरों की संख्या में में निरंतर वृद्धि हुई. कारखाना मालिक मजदूरों का शोषण करते थे, उन्हें कम वेतन देते थे. सरकार ने उद्योगपतियों का ही साथ दिया. अतः श्रमिक वर्ग ने इसके विरोध में मजदूर संगठन बनाकर हडताल का सहारा लिया. क्रांति की शुरुआत मजदूर हड़ताल से ही हुई. मजदूर वर्ग सर्वहारा वर्ग का शासन चाहते थे.
  • कृषक आंदोलन- रूस में कृषकों की दशा भी दयनीय थी. अधिकाँश उपजाऊ जमीन सामन्तो के पास थी. भूमिहीन किसान जागीरदारों की भूमि पर काम करते थे. उन पर अनेक प्रतिबंध थे. 1905 में अनेक स्थानों पर किसानों के विद्रोह हुए.
  • जार निकोलस द्वितीय का अयोग्य शासन- जार निकोलस द्वितीय में राजनैतिक सूझ का अभाव था. उसे आसानी से कोई भी प्रभावित कर सकता था. वह रानी अलेक्जेंड्रा के प्रभाव में था. जार व रानी दोनों पर रासपुटिन नामक एक साधू का प्रभाव था. रासपुटिन की हत्या भी कर दी गई, लेकिन जार का फिर भी प्रशासनिक नियन्त्रण ढीला ही रहा.
  • रूस में बौद्धिक जागृति- बौद्धिक जाग्रति के कारण पश्चिमी यूरोप के उदारवादी विचारों का प्रवेश होने लगा. टोलस्टोय, तुर्गनेव के उपन्यास तथा मार्क्स एवं बुकनिन के समाजवादी विचारों ने रूस की जनता को प्रभावित किया.
  • रुसीकरण की निति का प्रभाव- रूस में पोल, चेक, यहूदी, उजबेक, कजाख, और अरुसी जातियां बड़ी संख्या में रहती थी. रुसी शासकों ने एक रूस एक जार एक धर्म की निति अपनाई. जार की इस रुसीकरण की निति का अन्य जातियों ने भी विरोध किया.
  • भ्रष्ट एवं अयोग्य नौकरशाही- रूस की नौकरशाही में भ्रष्टाचार व्याप्त था. उच्च पदों पर आसीन कुलीन वर्ग के लोग चार जातियों की चाटुकारिता में विश्वास करते थे. प्रथम विश्वयुद्ध में सेना की हार का कारण नौकरशाही को माना जाने लगा.
  • तात्कालिक कारण- प्रथम महायुद्ध में रुसी सेना की लगातार पराजय से उत्पन्न समस्याओं से यहाँ के लोग परेशान होकर रूस में युद्ध समाप्ति की मांग होने लगी, लेकिन शासन युद्ध समाप्ति के पक्ष में नही था. अतः जनता विरोध में उतर आई. रूस की क्रांति का मुख्य कारण रोटी की कमी थी.

रूस की क्रांति का स्वरूप (History Of Russian Revolution)

सन 1917 में मजदूरों ने भूख हड़ताल से व्याकुल होकर पेंट्रोगाड में हड़ताल कर दी. रोटी दो अत्याचारी शासन का नाश हो नारे लगने लगे. पुलिस के हथियार छीन लिए सम्राट ने ड्यूमा संसद को भंग कर दिया. सैनिको को मजदूरों पर गोली चलाने का आदेश दिया मगर सैनिकों ने गोली चलाने से मना कर दिया.

जार ने मजबूर होकर सिंहासन त्याग दिया और करेंसकी के नेतृत्व में रूस में अस्थायी सरकार बनी, यह सरकार अधिक समय तक नही चली. 1917 में बोल्शेविक स्वयंसेवकों और सैनिकों ने मिलकर पेट्रोगाड के सरकारी भवन, टेलीफोन केंद्र, रेलवे स्टेशन आदि पर अधिकार कर लिया. सता आन्दोलनकारियों के नेता लेनिन के हाथों में चली गई और रूस में सर्वहारा अधिनायक तन्त्र स्थापित हो गया. और अब रूस को सोवियत संघ के नाम से जाना जाने लगा.

रूस की क्रांति के परिणाम (Russia’s Revolution Results In Hindi)

  1. रूस की क्रांति से यहाँ का  जार का निरंकुश शासन समाप्त हो गया. जुलाई 1918 को जार निकोलस और उसके परिवार को गोली से उड़ा दिया गया.
  2. लेनिन के नेतृत्व में सर्वहारा अधिनायक तन्त्र की स्थापना हुई.
  3. रूस ने जर्मनी से ब्रेस्टलिटोवास्क की संधि कर ली और प्रथम विश्व युद्ध से अलग हो गया. क्रांति के बाद रूस विश्व शक्ति के रूप में उभर आया.
  4. रूस में सफलता मिलने से विश्व के साम्यवादी आंदोलन को प्रोत्साहन मिला.
  5. विश्व में अधिनायकवाद को प्रोत्साहन मिला. जर्मनी में हिटलर और इटली में मुसोलिनी के नेतृत्व में अधिनायकवाद को प्रोत्साहन मिला.
  6. विश्व के कृषकों और मजदूरों की स्थति में सुधार हुआ. कारखानों का प्रबंध श्रमिक संघो को दिया जाने लगा.
  7. समाज में समानता, अनिवार्य व निशुल्क शिक्षा व स्त्री स्वतंत्रता को प्रोत्साहन मिला.
  8. रूस की शक्ति बढ़ने के साथ ही विचारधारा के आधार पर विश्व दो गुटों में बट गया. रूस के नेतृत्व में साम्यवादी गुट एवं अमेरिका व अन्य पूंजीवादी देशों का पूंजीवादी गुट.
  9. यूरोप व एशिया के अन्य देशों में स्वतंत्रता एवं राष्ट्रीयता की भावना का संचार हुआ. इस तरह “रूस की क्रांति” के व्यापक परिणाम सामने आए.

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