लोकगीत की परिभाषा | Folklore Definition

लोकगीत की परिभाषा | Folklore Definition गान मानव ह्रद्य के लिए स्वाभाविक है. सुख में हो या दुःख में हो, मनुष्य गाये बिना नही रह सकता है. सुख में वह गाकर उल्लासित होता है. दुःख में गाकर दुःख को भूलता है. गान मानव जीवन का भोजन है आदिकाल से ही मानव ह्रद्य गाता आ रहा है. सूर्य के प्रखर ताप से हल चलाता हुआ किसान अपनी गान से उसकी प्रखरता को भूलता है.

लोकगीत की परिभाषा | Folklore Definition

भरतीय लोकगीत-अँधेरी रात में चलता हुआ ऊंट वाला तान लगाता चला जाता है. और मरुभूमि की शुन्यता का ताप भूला देता है. गाड़ी वाला पहियों की ढचक ध्वनि के साथ तान मिलाता हुआ उजेली रात में कोसो के कोस पार कर जाता है.

जंगल में भेड़े चराता गडरिया अपने लोकगीत के गान से सारे जंगल को प्रतिध्वनित कर देता है. कुँए पर बारी आने की प्रतीक्षा में गाता हुआ बारिया लय को आगे बढ़ाने का आदेश देता है. और लाव पर बैलों के पीछे बैठा हुआ कीलिया अपने गान के द्वारा बैलों को प्रोत्साहित करते हुए आगे बढाएं जाता है.

इट और गारा ढ़ोता हुआ मजदूर गान में मस्त होकर जीवन की कठोरता को भूल जाता है. आदिम मनुष्य के इन्ही गानों का नाम लोकगीत है. मानव जीवन की उसके उल्लास की, उसकी उमंगो की, उसकी करुणा की, उसके रुदन की, उसके समस्त सुख दुःख की कहानी उसमे वर्णित है. न जाने कितने काल को चीरकर ये लोकगीत चले आ रहे है.

काल का विनाशकारी प्रभाव इनका कुछ नही बिगाड़ सका है. किसी कलम ने इन्हें लेखनबद्ध नही किया पर ये अमर है. सर्वभक्षक समय ने इनकों मिटाने के जितने भी प्रयत्न किये होंगे पर आज भी उसकी असफलता पर मुस्कराते हुए जनता की जिहा पर नाच रहे है.

वह खीजता है वह तोड़ता है मरोड़ता है पर मिटा नही सकता, कालान्तर में इसका बाल रूप परिवर्तित हो जाता है. भाषा का आवरण धीरे धीरे बदल जाता है पर भीतर प्राण तत्व में कोई अंतर नही आता है.

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