भारत की वन नीति एवं वन्य जीव संरक्षण | Forest Policy And Wildlife Reserve In India In Hindi

Forest Policy And Wildlife Reserve In India In Hindi : भारत के इतिहास में पहली बार 1984 में वन नीति NFP घोषित की गई. जन कल्याण तथा जंगलों के प्रबंधन व वन्य जीवों के संरक्षण हेतु वन नीति बने गई थी, स्वतंत्रता मिलने के बाद 1952 में इसे संशोधन किया गया. जिसमें उत्पादन तथा संरक्षण के बीच पर्याप्त संतुलन बनाने का प्रयास किया गया इसके बाद 1988 में भारत की नई वन नीति भी जारी की गई.  आज हम भारत की वन नीति और भारत  में वन्य जीव संरक्षण पर निबंध, कविता, तथ्य की जानकारी देगे.

Indian Forest Policy In Hindi And Wildlife Reserve In India

Forest Policy And Wildlife Reserve In India In Hindi

भारत की वन नीति एवं वन्य जीव संरक्षण

वन जीवन का आधार है, वनों की अनियंत्रित कटाई से भारत की जलवायु व स्थलाकृति पर अनेक प्रतिकूल प्रभाव पड़े है. जैसे मिट्टी का अपरदन, मरुस्थल का प्रसार, बाढ़ों का आना, बंजर भूमि का बढ़ना, जलवायु की विषमता, सूखा, भूमिगत जलस्तर में गिरावट, वन्य जीवों की कमी तथा पर्यावरण प्रदूषण आदि. भारत सरकार द्वारा वन एवं वन्य जीव संरक्षण के लिए वन नीति (Forest Policy) और अलग अलग राज्यों में वन्य जीव संरक्षण (Wildlife Reserve) के लिए कई प्रयास किये है.

तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या के बसाव, बढ़ते औद्योगिकरण व कृषि हेतु भूमि प्राप्त करने के लिए विकास के नाम पर वनों को काटा जा रहा है. इन बढ़ती हुई आवश्यकताओं की पूर्ति एवं पर्यावरण आपदाओं से बचने के लिए वनों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है.

भारत में सबसे पहले वन नीति 1894 में अपनायी गई थी. स्वतंत्रता के बाद 31 मई 1954 को घोषित नई वन नीति के अनुसार भूमि के कुल 33 प्रतिशत भाग पर वन होने चाहिए. हमारे देश में 1988 में नवीन वन नीति घोषित की गई थी. उसके तीन लक्ष्य बताए गये थे. पर्यावरण स्थिरता, वनस्पति व जीव जन्तुओं जैसी प्राकृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखना ताकि जन सामान्यत की बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके.

सरकार द्वारा वन संरक्षण की दिशा में अनेक कार्यक्रम व योजना चलाई जा रही है. सामाजिक वानिकी योजना, राष्ट्रीय पार्कों व अभ्यारण्यों की स्थापना आदि इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है. इन क्षेत्र के विस्तार व मरुस्थल के प्रसार को रोकने को नियंत्रित करने के लिए वन अनुसंधान देहरादून तथा केन्द्रीय मरु वन क्षेत्र अनुसंधान जोधपुर द्वारा प्रयास जारी है.

वन संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से नही हो सकता है. इसके लिए जनमानस की जागरूकता व सक्रिय सहभागिता आवश्यक है.

वनों के महत्व को देखते हुए विभिन्न राज्य की सरकारों द्वारा वन विकास के लिए सामाजिक वानिकी, अरावली वानिकी पुरस्कार दिए जाते है. ये है- वानिकी पंडित पुरस्कार वृक्ष मित्र पुरस्कार आदि.

वन्य जीव संरक्षण (Wildlife Reserve In India In Hindi)

वनों के बड़े पैमाने पर कटाई से वन्य जीव कम होते जा रहे है. जो बचे हुए है, उनके लिए प्राकृतिक आवास व भोजन की समस्या बनी हुई है. अब वन्य जीव संरक्षण आवश्यक हो गया है. वन्य जीवों के प्रति प्रेम भारतीय संस्कृति का अंग रहा है.

भारत के सम्राट अशोक महान के शिलालेखों में वन्य जीवों के शिकार पर अंकुश व संरक्षण के बारे में विवरण मिलता है.

वन्य जीव संरक्षण के उपाय (wildlife conservation in hindi)

  1. शिकार पर पूर्णत प्रतिबंध
  2. प्राकृतिक आवासों की उपलब्धता
  3. वन्य जीव संरक्षण कानून बनाना एवं उनका कठोरतम क्रियान्वन करना.
  4. राष्ट्रीय उद्यानों व वन्य जीव अभ्यारण्यों की स्थापना एवं सुद्रढ़ प्रबंधन
  5. जन चेतना का प्रसार व जन भागीदारी सुनिश्चित करना.

वन्य जीव संरक्षण के लिए जैव मंडलीय संरक्षित क्षेत्र (Organic Protected Areas for Wildlife Conservation)

भारत में वन्य जीवों के संरक्षण हेतु 15 जीव मंडल निकाय (आरक्षित क्षेत्र) स्थापित किये गये है. ये है- नंदादेवी, सुंदरवन, मानस, नोकरेक, मन्नार की खाड़ी, नीलगिरी, सिमलीपाल, नामदफा, थार का रेगिस्तान, उतराखंड, कच्छ का छोटा रन, कान्हा, उत्तरी अंडमान, वृहत निकोंबार व कांजीरंगा

राष्ट्रीय उद्यान व अभयारण्य में वन्य जीव संरक्षण (Wildlife conservation in National Park and Sanctuary)

भारत में वन्य जीव संरक्षण के लिए अब तक 565 वन्य जीव अभ्यारण्यों तथा 89 राष्ट्रीय उद्यानों की स्थापना की गई है. देश के दो राष्ट्रीय उद्यानों काजीरंगा (असम) तथा केवलादेव (राजस्थान) को प्रथम बार विश्व विरासत स्थल बनाया गया है.

देश के प्रमुख महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उद्यान निम्न है. जिम कार्बेट (उतराखंड), कान्हा (मध्यप्रदेश), काजीरंगा (असम), बांदीपुर (कर्नाटक), पलामू (बिहार), दाचीगाम (जम्मू कश्मीर), सुंदरवन (पश्चिम बंगाल), शांत घाटी (केरल), नन्दनकानन (उड़ीसा), केवलादेव (राजस्थान), काइबुल लम्जाओं (मणिपुर), अन्नामलाई (तमिलनाडु) आदि.

विभिन्न संकटपन्न वन्य जीवों जैसे बाघ, चीता, हाथी, गिर-सिंह, घड़ियाल, गेंडा, कस्तुरी म्रग आदि हेतु विशेष परियोजनाएं चलाई जा रही है.

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आशा करता हूँ दोस्तों भारत की वन नीति एवं वन्य जीव संरक्षण का यह लेख आपकों पसंद आया होगा. राष्ट्रीय वन नीति क्या हैं, वन नीति कब बनी, भारत की राष्ट्रीय वन नीति की जानकारी निबंध इतिहास में दी गई जानकारी आपकों पसंद आई होगी.

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