विश्व मधुमेह दिवस 14 नवम्बर | vishwa madhumeha divas

विश्व मधुमेह दिवस-मधुमेह तेजी बढ़ रहा भयकर रोग हैं जो युवा से वृद किसी उम्र के व्यक्ति को हो सकता हैं| मधुमेह जिन्हें डायबिटीज भी कहा जाता हैं| आमजन में इसके प्रति जागरूकता बढाने के उद्देश्य से WHO और विश्व मधुमेह संघ की पहल पर 14 नवम्बर को प्रतिवर्ष vishwa madhumeha divas के रूप में मनाने का निर्णय किया| इस दिन विश्व के सभी देशो में इस रोग के प्रति जागरूकता बढाने और मधुमेह के सम्बन्ध में जानकारी देकर उन्हें शिक्षित किया जाए| आज के लेख में आपकों इस दिवस के इतिहास मनाने के कारण और इनके परिणामो पर सक्षिप्त चर्चा करेगे|

विश्व मधुमेह दिवस का इतिहास

यह विश्व मधुमेह दिवस आखिर 14 नवम्बर के दिन ही मनाना क्यों शुरू किया| आपकों बता दे प्रसिद्ध जीव विज्ञानी चाटर्रा बेन्टिंग का जन्मदिन हैं| चाटर्रा बेन्टिंग ने बेंट के साथ मिलकर कनाडा के एक शहर में वर्ष 1921 में इन्सुलिन हार्मोन की खोज की थी| उनके इस महान आविष्कार को याद रखने के लिए विश्व मधुमेह संघ ने इस दिन को मनाने के लिए इसी तारीख को चुना|

1991 में इस दिन को मनाने की शुरुआत हुई| जिस दिन इस बेहद खतरनाक बिमारी के बारे में लोगों को जाग्रत किया जाता हैं| पिछले 26 वर्षो से एक नए विषय और थीम के साथ विश्व मधुमेह दिवस का आयोजन विश्व के सभी देशो में किया जाता हैं|फ्रेडरिक बैटिंग एवं चार्ल्स बेस्ट की इस महत्वपूर्ण देंन के लिए इन्हे विज्ञान क्षेत्र में नोबल पुरुस्कार से भी सम्मानित किया गया| इस दिवस को मनाने के लिए आरम्भिक वर्षो में “यिन और याँग” प्रतीक के रूप में उपयोग किया गया हैं| जो चीनी संस्क्रति का अहम हिस्सा हैं तथा प्रकृति संतुलन की ओर इशारा करता हैं|

विश्व मधुमेह दिवस का प्रयोजन

आपकों बता दे पैनक्रियाज ग्रन्थि हमारे शरीर में ग्लूकोज बनाने और इसका निस्तारण करने का कार्य करती हैं| शरीर में ग्लूकोज की कमी से मधुमेह जिन्हें डायबीटीज रोग भी कहा जाता हैं| व्यक्ति इसकी सपेट में आ जाता हैं| इस समस्या से बचने के लिए वैज्ञानिको ने इन्सुलिन की खोज की जो इसके निस्तारण में मिल का पत्थर साबित हुआ हैं|यदि हम भारत में मधुमेह रोगियों की स्थति पर नजर डाले तो आकड़े बेहद भयानक और चौकाने वाले हैं| 1991 में भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या 2 करोड़ के आस-पास थी| जो अगले 15 वर्ष यानि 2006 में बढ़कर 4 करोड़ 20 लाख हो गईं| एक अनुमान के मुताबिक अगले 13 वर्षो में इनकी संख्या बढ़कर 9 करोड़ हो सकती हैं|

भारत मधुमेह के रोग से पीड़ित सबसे बड़ा देश हैं| यदि इससे प्रभावित लोगों के निवास स्थान पर गौर करे तो डायबिटीज के अधिकतर केस शहरी क्षेत्र से ही आते हैं| गाँवों में इसके रोगियों की संख्या बेहद कम रही हैं| जो अब बेहताशा रूप से बढ़ रही हैं|इस रोग के प्रभावों पर गौर करे तो आने वाले समय में यह भारत की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्या का रूप ले सकती हैं| विश्व मधुमेह दिवस पर अनेक संस्थाए इस विषय पर हमेशा से चौकन्ना रहने की बात करती हैं| इनकी बातो पर गौर करने की आवश्यकता हैं|

मधुमेह रोग के घातक प्रभाव

इस रोग के पुरे शरीर में फैलने पर इसका अटैक किसी भी अंग पर हो सकता हैं|

उच्च स्तर का मधुमेह आपकों विकलांग या किसी अंग से विच्छेद की समस्या को जन्म दे सकता हैं|

इसके बुरे प्रभाव से बड़ी संख्या में रोगियों के निम्न अंगो का विच्छेदन करना पड़ता हैं|

इसके कारण किडनी खराब हो सकती हैं, हार्ट अटैक आ सकता हैं|

पैरो की ग्रंथि खराब हो सकती हैं,

वर्तमान में बड़ी संख्या में लोगों के आँखों की रौशनी कम होना या चली जाने का कारण मधुमेह रोग ही हैं|

कम से कम हमे विश्व मधुमेह दिवस के सकारात्मक पहलुओ पर विचार कर उनमे सहयोग करना चाहिए|

क्युकि इससे सबसे बड़े पीड़ित तो हम ही हैं|

डायबिटीज रोग किसी भी उम्र के पड़ाव में हो सकता हैं|

अधिकतर यह 15 वर्ष के बाद ही आरम्भ होता है|

जिसकी समस्याए 35 वर्ष के बाद मोटे तौर पर नजर आने लगती हैं|

ये खर्चीली बिमारी हैं|

जिसके उपचार के लिए हमे लम्बे समय तक दवाइया लेनी पड़ती हैं|

डायबिटीज रोग के कारण हमारी खान-पान हमारी दिनचर्या और दिन भर आलसी बने रहने की जीवनशैली इसके मुख्य कारण हैं,

विश्व मधुमेह दिवस पर लोगों को इस रोग के बारे में अवेयरनेस सिखाए|

यदि किसी को भी इस रोग की तकलीफ या शंका हो तो

घर बैठे रहने की बजाय अच्छे चिकित्सक को दिखाए

और समय पर इलाज करवाकर इसके दुष्परिणाम से बचा जा सकता हैं|

यदि आपको विश्व मधुमेह दिवस पर यह जानकारी अच्छी लगी हो तो

प्लीज अपने मित्रो के साथ शेयर कर विश्व मधुमेह दिवस की जागरूकता को बढाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए|

 

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