वीर गोगाजी का इतिहास | Gogaji Maharaj History In Hindi

वीर गोगाजी का इतिहास | Gogaji Maharaj History In Hindi

Katha Jivani Biography & History Of Gogaji Maharaj  In Hindi गोगादे चौहान ददरेवा चुरू के निवासी थे. इनके पिता का नाम जेंह्वर तथा माता का नाम बाइल था. बाइल गोरखनाथ की भक्त थी. बाइल की सेवा से प्रसन्न होकर गोरखनाथ ने गूगल धूप से बना सर्प दिया और कहा कि इसे दूध में घोल कर पी जाना, परिणामस्वरूप गोगादे (गोगाजी) का जन्म हुआ. लोकदेवता गोगाजी का विवाह पाबूजी के बड़े भाई बुडौजी की पुत्री केमलदे से करना चाहते थे, लेकिन बूडोजी यह नही चाहते थे.GOGAJI

Gogaji Maharaj History

एक दिन गोगाजी ने सर्प का रूप धारण कर फूलों के बिच बैठ गये. केमलदे फूल लेने लगी, तब सांप से उसे डस लिया. अंत में गोगाजी के अभिमंत्रित धागे से केमलदे के बाँधने से वह ठीक हो गई और दोनों का विवाह हो गया.

गोगाजी ने दिल्ली के सुलतान फिरोजशाह से युद्ध किया. इस युद्ध में गोगाजी के दो मौसेरे भाई अरजन व सरजन भी बादशाह की ओर से लड़ रहे थे. वे दोनों मारे गये. अपने घर पर यह बात गोगा ने अपनी माता को बताई, वह बहुत नाराज हुई और गोगा को घर से चले जाने और मुहं नही दिखाने को कहा. गोगाजी को यह बहुत बुरा लगा और जीवित समाधि ले ली.

भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की नवमी को गोगा नवमी के रूप में मनाया जाता है. तथा लोकदेवता के रूप में गोगाजी की पूजा होती है. नौ गाठ वाली गोगा राखी हल चलाते समय हल व हाली दोनों के बाँधी जाती है. ददरेवा राजगढ़ चुरू रतनगढ़ आदि क्षेत्रों में गोगाजी के मेले लगते है. लोकदेवता गोगाजी के थान को गोगामेड़ी कहा जाता है.

जो इंद्रमानगढ़ किले में स्थित है. गोगाजी के भक्त हाथों में ऊँचे निशान लिए हुए ढोल नगाड़े, झांझर आदि बजाते हुए नृत्य करते है. रात्रि जागरण भी किया जाता है गोगामेड़ी के मेले में राजस्थान से बाहर के लोग भी आते है.

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