हाथी पर निबंध | Essay On Elephant In Hindi

Essay On Elephant In Hindi हाथी पर निबंध: इस संसार में असंख्य प्राणियों की जनजातियाँ पाई जाती हैं, कुछ आकार में छोटे तो कुछ बड़े. हाथी Elephant संसार के जीवित प्राणियों में सबसे विशालकाय जानवर हैं. जो शेर चीता और भालू की भांति जंगलो में रहना पसंद करता हैं. पशूओ की विविधता और उनकी क्षमता के आधार पर भिन्न-भिन्न होते हैं, शेर को सबसे शक्तिशाली जानवर कहा जाता हैं, इसलिए उसे जंगल का राजा भी कहते हैं. मगर राजा शेर भी इस भीमकाय काया के धनी हाथी Elephant से पंगा नही लेता हैं. Essay On Elephant In Hindi जानते हैं. हाथी पर निबंध | Essay On Elephant In Hindi

हाथी पर निबंध | Essay On Elephant In Hindi Language

विश्व के सबसे विशालकाय जीव हाथी का वजन 8 से 10 हजार किलों तक होता हैं, विश्वभर में इनकी अलग-अलग प्रजातियाँ पाई जाती हैं, परन्तु सामान्य शारीरिक सरंचना में एक जैसे ही होते हैं. अफ़्रीकी हाथी इनकी पूर्वज माने जाते हैं.  धीरे-धीरे फिर इन्हे दुनियाँ के अन्य हिस्सों में ले जाया गया.

प्राय स्वच्छ विचरण करते हाथी किसी अभ्यारण्य या जंगल में एक झुण्ड में नजर आते हैं. इसका बच्चा 15 वर्ष तक का होने तक झुण्ड से अकेला कभी नही चलता हैं. झुण्ड में सयुक्त रूप से रहने वाले हाथी एक परिवार की तरह होते हैं. जिनका मुख्य नेता या मुख्या इनके झुण्ड का नेतृत्व करता हैं.

उसके पीछे पूरा हाथी परिवार. यदि दूसरा नर अथवा मादा हाथी नेता बनना चाहता हैं, तो उन्हें पूर्व नेता को युद्ध में पराजित करना होता हैं.

राजा-महाराजाओं के समय में हाथियों से युद्ध किये जाते थे. आकार में विशालकाय होने के कारण युद्ध, आखेट और यात्रा में एलिफेंट का बड़ा महत्व हैं. हमारे देश के कुछ क्षेत्रोँ में आज भी हाथी के साथ ही कुछ धार्मिक उत्सवो को मनाया जाता हैं, इनके बिना उस पर्व का महत्व अधुरा ही माना जाता हैं.

आज हाथी सर्कस में भिन्न-भिन्न करतब दिखाता देखा जा सकता हैं, फर्श पर गिरा सिक्का उठाना या ब्रश से अठखेलियाँ करता यह बेहद मनमोहक लगता हैं. ये बड़ी मात्रा में भार अथवा बोझा उठाने में समर्थ होता हैं. कहते हैं.हाथी के मस्तक में मणी होता हैं. विज्ञान की माने तो जब हाथी अपने सिर से मद को छूता हैं तो वह जबड़ो की झुरियो में जमा हो जाता हैं. सख्त होने पर लोग इसे मणी समझकर धारण कर लेते हैं.

हाथी पर निबंध Essay On Elephant In Hindi

आपने कभी हरी भरी प्रकृति और प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर जंगल की सैर की होगी. जंगल में अनेक प्रकार के जीवन जन्तु व जानवरों को देखना बहुत रोमांचक होता हैं. जंगल में शेर, हाथी, भालू, लोमड़ी, कंगारू, खरगोश, बन्दर आदि रहते हैं. हाथी सबसे शक्तिशाली और विशाल जानवर हैं.

यह उंचाई में 10 फीट से भी अधिक हो सकता हैं. यह मोटी कठोर चमड़ी के साथ गहरे स्लेटी रंग का होता हैं. कई देशों में सफेद रंग का हाथी भी पाया जाता हैं. यह अफ्रिका और एशिया में बहुतायत पाया जाता हैं. इसकी सूड विशेष आकर्षण का केंद्र होती हैं. क्योंकि हाथी अपनी सूंड का बहुत से कार्यों में उपयोग करता हैं. वह अपनी सूंड से पानी पीता है और सूंड में पानी भरकर न केवल स्वयं को स्वच्छ रखता हैं, बल्कि खेलने में भी उसका उपयोग करता हैं.

अपनी सूंड से ही वह पेड़ पौधों की पत्तियों को तोड़ता हैं. और अपना पेट भरता हैं. देखने में हाथी बहुत मोटा लगता हैं. लेकिन लेकिन इसके दौड़ने की गति भी बहुत तेज होती हैं. हाथियों का जीवन बहुत लम्बा होता है. इसका जीवन 150 से 200 साल तक होता हैं.

अफ्रीका में पाए जाने वाले हाथी भारत में पाए जाने वाले हाथियों से अलग होते हैं. उनके कान व सूंड बड़े होते हैं. हाथी हमेशा समूह बनाकर चलते हैं. उनमें एकता होती हैं. हाथी शाकाहारी होते हैं. ये घास फूस और वृक्षों की पत्तियों और फलों को खाते हैं. भारतीय हाथियों को गणना बहुत पसंद हैं.

हाथी बहुत ही बुद्धिमान होते हैं. इनकी याददाश्त बहुत तेज होती हैं. प्राचीन काल में हाथियों का उपयोग युद्ध में किया जाता था. हाथी भारी रथ को खीचने में सहायक होते थे. मानव हाथियों को प्रशिक्षित कर उनसे बहुत से काम लेता हैं. हाथी एक शांत जानवर हैं, लेकिन यदि इसे गुस्सा आ जाए तो यह सब कुछ तहस नहस कर देता हैं.

हाथी मनुष्य का मित्र भी होता हैं. हाथी का बच्चा प्रतिदिन 10 लीटर दूध पी सकता हैं. हाथियों को विलुप्त होने से बचाने के लिए इनकी देखभाल करना बहुत जरुरी हैं. और इनकी सुरक्षा के उपाय भी करने चाहिए. हाथी की सवारी भी की जाती हैं. आपने की हैं कभी हाथी की सवारी, नहीं तो देर किस बात की कीजिए न हाथी की सवारी. आपका तन मन प्रसन्नता से झूम उठेगा.

हाथी पर निबंध | Essay On Elephant In Hindi

एलिफेंट के पैर के तलवे (निचले भाग ) को सामान्य भाषा में तबक कहा जाता हैं, पैरो का यह निचला भाग की चमड़ी बेहद नरम होती हैं इस कारण कंकडो और पत्थरों व कठोर जगह पर चलने से छिल जाते हैं.

इसलिए यह मरुस्थलीय अथवा समतल भूमि पर चलना पसंद करता हैं.इसकी चाल आदमी की औसतन चाल से अधिक होती हैं. एलिफेंट एक मात्र ऐसा जानवर हैं जो छलांग नही लगा सकता और न ही टेडा चल पाता हैं. इस कारण शिकारी लोग हाथी की राह में गहरा गड्डा खोदकर इसे इसका शिकार करते हैं.

इस विशाल शरीर के जानवर को प्रशिक्षित कर आज्ञाकारी बनाया जाता हैं.महावत से गज को नियत्रित करता हैं, इसकी चाल में ढलान चढ़ान का कोई विशेष फर्क नही पड़ता हैं, अपनी ही रफ़्तार में चलना इन्हे पसंद होता हैं.इनके नाक के रूप में एक लम्बी सूड और लम्बे निकले हुए दांत होते हैं, हाथी के मरने के बाद इनके दांतों को कई उपयोग में लिया जाता हैं. दिन का अधिकतर समय इनके खाने में ही लगता हैं.

एक दिन में एक हाथी डेढ़ किवटल तक अनाज गन्ना अथवा घास खां सकता हैं.दो बड़ी आँखे और लम्बी नाक इस जानवर की पहचान हैं. इसके शरीर की लम्बाई सामान्यता 11 से 12 फिट और ऊचाई 9 फिट तक होती हैं. यह एक घंटे में 7 से 8 किलोमीटर की दुरी तय कर सकता हैं.

दुनियाँ में सर्वत्र पाए जाने वाले हाथियों की संख्या में लगातार कमी दर्ज की जा रही हैं, एशियन प्रजाति के गज खड़े-खड़े ही 24 घंटे में मात्र 5 से 6 घंटे तक नीद लेते हैं, मादा हाथी के गर्भावस्था का समय तक़रीबन 2 वर्ष का होता हैं, इसकी औसतन उम्र मनुष्य से अधिक 90 से 110 वर्ष तक होती हैं.

हाथी पर निबंध Short Essay On Elephant In Hindi Language

प्राचीन समय में गज को भेंट और उपहारों में दिया जाता था. इनके दांत का उपयोग चूड़ियां आभूषण और विभिन्न प्रकार के साज सज्जा के उपकरण बनाए जाते हैं. इसकी लीद का उपयोग कई प्रकार के बाल रोगों में सहायक हैं.

आज के समय में किसी के लिए हाथी के दर्शन भर पर्याप्त हैं. क्युकि इसको पालने का खर्चा हर कोई वहन नही कर सकता. पागल हाथी सबसे खतरनाक हो जाता हैं, तबाही का ताडव मचाने वाले इस यम के रूप से केवल अच्छा महावत ही नियंत्रित कर पाता हैं, पागल गज नुकसान की कई खबरे अक्सर हमे पढने को मिल जाती हैं.

विश्व हाथी दिवस 12 अगस्त

विश्व हाथी दिवस की शुरुआत कनाडा की फिल्म निर्माता पेक्ट्रिका सिम्स, केनाजवेस्ट पिक्चर्स के श्री माइकल क्लार्क थाईलैंड के एलिफेंट री इंट्रोडक्शन फाउंडेशन के महासचिव सिवापोर्न दर्दारेन्दा द्वारा वर्ष 2011 में की गई थी. अधिकारिक रूप से इस का शुभारम्भ 12 अगस्त 2012 को सुश्री सिम्स और एलिफेंट री इंट्रोडक्शन फाउंडेशन ने किया.

यह दिवस हाथियों के संरक्षण, गैर कानूनी शिकार और तस्करी को रोकने, उनके बेहतर ईलाज और पकड़े गये हाथियों को अभ्यारण्यों में भेजे जाने के लिए जागरूकता प्रदान करने के लिए मनाया जाता हैं. इसके अतिरिक्त इस दिवस के आयोजन का उद्देश्य जंगली हाथियों की संख्या, उनकी बेहतरी और प्रबंधन के बारे में जानकारी मुहैया कराना हैं. आईएनएसयू की रेड लिस्ट में अफ्रीकन हाथी कमजोर हाथी एवं एशियन हाथी लुप्तप्राय श्रेणी में दिखाए गये हैं.

अखिल भारतीय हाथी गणना 2017

पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 12 अगस्त 2017 को अखिल भारतीय सिंक्रोनाइसड हाथी गणना के आंकड़े जारी किये गये. इस गणना में डायरेक्ट ब्लॉक काउंट मेथड काम लिया गया. इसके अनुसार एशियाई हाथियों की संख्या 27312 हैं. यह संख्या 2012 की गणना के मुकाबले कम हैं.

हाथियों की गणना 2017 में पिछली 2012 में की गई गणना के मुकाबले 11 प्रतिशत की कमी आई. हाथियों की सर्वाधिक कमी क्रमशः तमिलनाडु व कर्नाटक में आई हैं.

हाथियों की सर्वाधिक संख्या क्रमशः कर्नाटक, आसाम व केरल हैं. सर्वाधिक हाथी घनत्व क्रमशः कर्नाटक, उत्तराखंड व नागालैण्ड, आसाम तथा केरल में हैं. यह गणना 1.10 वर्ग किमी क्षेत्र कवर किया गया तथा निम्न क्षेत्र शामिल किये गये.

  • उत्तरी पूर्व क्षेत्र– आसाम, अरुणाचल प्रदेश, उत्तरी बंगाल, मेघालय, नागालैण्ड, त्रिपुरा, मिजोरम व मणिपुर.
  • पूर्वी मध्यक्षेत्र– ओडिशा, झारखंड, बिहार, दक्षिण बंगाल व छतीसगढ़
  • दक्षिणी क्षेत्र– कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र तथा अंडमान व निकोबार
  • उत्तरी क्षेत्र– उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, हरियाणा व हिमाचल प्रदेश.

गज यात्रा- 12 अगस्त 2017 को गज यात्रा का उद्घाटन किया गया. गज यात्रा अभियान का मुख्य उद्देश्य हाथियों का संरक्षण करना हैं. यह अभियान हाथियों की बहुलता वाले 12 राज्यों में चलाया जाएगा. मंत्रालय द्वारा 2012 में जारी किया गया गज शुभंकर हाथी इस अभियान में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा. यह अभियान वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया द्वारा चलाया जाएगा.

हाथी परियोजना

हाथियों की मौजूदा आबादी को उनके प्राकृतिक आवास स्थलों में दीर्घकालिक जीवन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त संख्या में हाथियों की संख्या की आबादी रखने वाले राज्यों को सहायता करने के लिए फरवरी 1992 में यह केंद्र प्रवर्तित योजना प्रारम्भ की गई थी.

हाथी परियोजना के उद्देश्य

  • हाथियों के पुनर्वास और गलियारों का संरक्षण करना
  • मानव पशु संघर्ष सम्बन्धी मुद्दों का समाधान करना
  • पालतू हाथियों का कल्याण

हाथी परियोजना की सहायता से देश का पहला हाथी पुनर्वास केंद्र हरियाणा में स्थापित किया गया. वर्तमान में ओडिशा, हरियाणा, केरल तमिलनाडु व कर्नाटक में हाथी पुनर्वास केंद्र स्थापित हैं. देश का सबसे प्राचीन हाथी रिजर्व मयुरभंज हाथी रिजर्व, ओडिशा, देश का नवीनतम हाथी रिजर्व दांड़ोली हाथी रिजर्व तथा देश का सबसे बड़ा हाथी रिजर्व मैसूर का हाथी रिजर्व है जो कर्नाटक में स्थित हैं.

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