हिन्दी कविता – मेरे गाँव के खेत में

मेरे गाँव के खेत में शीर्षक की यह हिन्दी कविता ग्रामीण जीवन शैली और इसके प्रति कवि के लगाव की काव्यात्मक अभिव्यक्ति हैं. गाँव के कुए रहट सुबह के माहौल और वर्षा के मौसम में किसानों के हल जोतने का इस कविता में सुंदर वर्णन किया गया हैं. यदि आप ग्रामीण इलाके में रहते हैं तो उम्मीद करते हैं. ग्रामीण प्रेम पर आधारित यह कविता आपकों पसंद आएगी. लीजिए बढ़ते हैं इस Hindi Poem पर..

मेरे गाँव के खेत में (हिन्दी कविता)

खुशहाली के गीत लिखे हैं,
मेरे गाँव के खेत में |
पायल संग कुदाली चलती,
मेरे गाँव के खेत में |

पानीदार कुओ पर चलते,
रहटो की आवाज जहा |
धानी-धरती के कणकण को,
धोरों की सौगात वहा
हरियाली ले फसल खड़ी हैं,
मेरे गाँव के खेत में |
खुशहाली के गीत लिखे हैं,
मेरे गाँव के खेत में |

बैलो ने कन्धो ने खिची,
हल की फाल जहाँ हर बार |
भर-भर छकड़े धान के लाए,
मुस्काए जिनसे घर द्वार |
रुनझुनकर रमझोले बजे हैं,
मेरे गाँव के खेत में |
खुशहाली के गीत लिखे हैं,
मेरे गाँव के खेत में |

जहाँ नीम की डाली बैठी,
चिड़ियाँ चहक-चहक कर गाती |
कभी धुल में नहां-नहां कर,
बादलों का संदेश सुनाती |
बया घास के महल बनाती,
मेरे गाँव के खेत में |
खुशहाली के गीत लिखे हैं,
मेरे गाँव के खेत में |

काली पिली, दोमट मिट्टी,
फसले कई उगाती हैं |
बिन बोए ही घास के रूप में,
अपना प्यार लुटाती हैं |
सन-सन हवा बहे मतवाली,
मेरे गाँव के खेत में |
खुशहाली के गीत लिखे हैं,
मेरे गाँव के खेत में |

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