15 अगस्त पर भाषण – 71वाँ स्वतंत्रता दिवस 2017

यह दिन हैं हमारे गौरव का हमारी आजादी का जब देशभर में देशभक्ति का जूनून उमड़ पड़ा हैं. हम बात कर रहे हैं हमारे 71वाँ स्वतंत्रता दिवस की. 15 अगस्त 2017 के दिन पूरा देश तिरंगे को सलामी देते हुए, एक बार फिर उन लोगों को उनके बलिदान को याद करेगे, जिनके कारण आज हम आजाद हैं. 15 अगस्त पर भाषण के इस लेख में सभी स्टूडेंट्स मित्रों के लिए सरल भाषा में हिंदी निबंध उपलब्ध करवा रहे हैं. जिन्हें आप स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम पर बोल सकते हैं/पढ़ सकते हैं.

15 अगस्त पर भाषण

(इंडिपेंडेंस डे स्पीच)

आदरणीय देवतुल्य गुरुजनों, अभिभावक गण और पिता तुल्य इस कार्यक्रम में पधारे ग्रामीणों . आज हम हमारे देश भारत के एक बहुत बड़े दिन को मनाने के लिए यहाँ पहुचे हैं.

यह दिन हमारे लिए गौरव और आनन्द का दिन हैं, आज ही दिन सन 1947 में हमारे स्वतन्त्रता सैनानियो के त्याग, बलिदान और देशभक्ति के परिनामस्वरूप 200 वर्षो के लम्बे सघर्ष के बाद आजादी मिली थी. अगर हम कहे 15 अगस्त के दिन हमने अंग्रेजो से आजादी छिनकर हासिल की, अथवा कीमत चुकाकर हासिल की तो कुछ भी गलत नही होगा.

आज का दिन हमारे लिए हर्ष और उल्लास का दिन तो हैं ही साथ ही साथ आज का दिन उन स्वतन्त्रता सैनानियो को याद करने का भी हैं. जिन्होंने अपने देश के लिए जान की बाजी लगा दी थी. उनमे वीर शहीद भगतसिंह,तात्या टौपे, सुभाषचन्द्र बोस, चन्द्रशेखर आजाद, लक्ष्मी बाई,खुदीराम बोस जैसे अनेक क्रांतिकारियों ने अपनी मातृभूमि की आजादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया था.

आज हम आजाद भारत के नागरिक हैं. तभी हम यह कल्पना भी नही कर सकते कि अंग्रेजो ने हमारे पूर्वजो पर किस तरह अत्याचारों की बाढ़ ला दी थी. एक लम्बे  समय तक की बंधी गुलामी की इन बेडियों को आज से 71 वर्ष पूर्व तोड़ा जा चूका हैं.आज हमे अपने भारत पर गर्व हैं, तो उन शहीदों की वजह से. एक गुलाम देश बुझदिल लोगों पर कोई गर्व नही करता. मगर हमारे जाबाजों ने अंग्रेजो की तोप गोलियां खाकर भी किसी को भारत की वीर भूमि पर यह संदेह पैदा नही होने दिया.

दूसरी तरफ यदि हमारे देश की वर्तमान स्थति पर नजर डाले तो शर्म से कहना पड़ता हैं, आज भी हम पूर्ण रूप से स्वतंत्र नही हैं, भले ही हमारे स्वतन्त्रता सेनानियों ने हमे गोरों से मुक्त कर दिया. मगर हमारे आलचीपन और अकर्तव्यपरायणता के कारण आज हम भ्रष्टाचार, गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, राजनीती का निम्न स्तर, सामाजिक बुराइयों में किसी न किसी तरह इनके गुलाम हैं, उसी का नतीजा हैं. आबादी के लिहाज से विश्व का दूसरा सबसे बड़ा देश होने के बावजूद ये हमारी ताकत नही बन पाई.

अपने देश को इन सभी समस्याओं से स्वतंत्र कराने के लिए सभी नागरिकों को आगे आना होगा, आज हम यह प्रतिज्ञा करे कि कोई भी ऐसा कार्य जिसमे हमारे देश समाज का अहित हो जैसे रिश्वत देना या लेना, गंदगी फैलाना, भेदभाव करना, असामाजिक प्रवर्ती के लोगों को सहयोग न तो करेगे, न ही किसी को करने देगे. क्युकि भगतसिंह, सुभाषचन्द्र बोस पराधीन भारत के सैनानी थे. मगर आज हमे आजाद भारत के सिपाही बनकर देश के भीतर रहते हुए प्रत्येक समस्या से हमे लड़ना होगा.

बंदूक के सहारे के बिना कई ऐसे हजारो कार्य हो सकते हैं, जिनके द्वारा हम अपने देश की उन्नति में योगदान कर सकते हैं, एक व्यक्ति बहुत कुछ कर सकता हैं गांधीजी भी तो अकेले थे. मगर उनके विचार और सोच का अनुसरण करने वालों की संख्या लाखों करोड़ों में थी. फिर क्यों न हम कुछ ऐसा कर जाएं जिससे देश और समाज में एक नई मिशाल के तौर पर ऐसे लोगों का मार्गदर्शन कर सकते हैं.

इन्ही शब्दों के साथ मै अपने 15 अगस्त पर भाषण यही विराम देना चाहुगा. ये लेख आपकों अच्छा लगा हो तो अपने मित्रो के साथ शेयर जरुर करे. 71वाँ स्वतंत्रता दिवस की सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ

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