15 अगस्त पर निबंध : सर फरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं

15 august speech in hindi– 71वें स्वतन्त्रता दिवस सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामना. हमारे इस राष्ट्र्पर्व पर दिल्ली के राजपथ चौराहे पर राष्ट्रिय कार्यकम आयोजित किया जाना हैं. हम क्यों मनाते हैं. 15 अगस्त, आजादी का क्या अर्थ होता हैं, क्या महत्व हैं. इस निबंध में हम विस्तार से अध्ययन करने जा रहे हैं.

बहरहाल पूरा देश आजादी के जश्न समारोह की तैयारियों में जुटा हैं, इस कार्यक्रम में एक विदेशी मेहमान मुख्य अतिथि के रूप में शरीक होंगे. देश की आन बान और शान यानि भारतीय सेना के तीनों अंगो की शानदार परेड का आयोजन और माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी के जोशीले भाषण दिल को मंत्रमुग्ध कर जाते हैं, यहाँ आपकों स्वतन्त्रता दिवस (indian independence day) पर हिंदी में निबंध उपलब्ध करवा रहे हैं, जिन्हें आप अपने स्कुल के कार्यक्रम में बोल सकते हैं.

15 अगस्त 2017 पर निबंध

गुलामी और परतन्त्रता का महत्व वही समझ पाते हैं, जिन्होंने इसे भोग हैं अथवा इसकी खातिर बलिदान दिया हैं.

यातनाए सही हैं. आज हम स्वतंत्र हैं, जो चाहे वो कर सकते हैं जिधर चाहे जा सकते हैं. न्याय के लिए अदालत जा सकते हैं, संतुष्टि ना होने पर उपरी अदालत में अपील कर सकते हैं. मगर कल्पना कीजिए, काश यही स्थति पूर्ण विपरीत हो जाए कानून, न्याय और प्रशासन किसी एक वर्ग की पैठू बन जाए तो क्या होगा.

वही होगा जो सतावर्ग चाहेगा.

15 अगस्त का दिन भारत के इतिहास का महत्वपूर्ण दिन हैं. वर्ष 1947 में इसी दिन हमे 200 वर्षो तक की गोरों की गुलामी से निजात मिली थी. इसी उपलक्ष्य में हम प्रतिवर्ष 15 अगस्त को आजादी दिवस मनाते हैं. 71वें स्वतन्त्रता दिवस के इस अवसर पर उन हजारों स्वतन्त्रता सैनानियो को श्रदांजली अर्पित करते हैं. जिन्होंने भारत की स्वतन्त्रता की खातिर हसते-हसते अपने बलिदान दे दिया था. ऐसें वीर शहीदों को देश शत-शत नमन करता हैं.

भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम जिन्हें 1857 की क्रांति भी कहा जाता हैं,

मंगल पांडे की चिंगारी से 14 अगस्त के भारत-विभाजन के बिच की 100 वर्षो की अवधि का संघर्ष का ही नतीजा हैं, आज हम स्वतंत्र हैं. आजादी का अर्थ होता हैं- पूर्ण स्वतन्त्रता. यह व्यक्ति का प्राथमिक अधिकार समझा जाता हैं. मगर कुछ शक्तिशाली अथवा शातिर लोगों के समूह द्वारा अपनी शक्ति का नाजायज उपयोग कर किसी कमजोर राष्ट्र को अपना उपनिवेश बनाकर उनका आर्थिक राजनितिक और सांस्कृतिक शोषण की परिपाटी की शुरुआत यूरोप से हुई.

जिनके चंगुल में भारत सहित विश्व के कई देश वर्षो तक फसे रहे.

भारत का स्वतंत्रता दिवस निबंध- 2

भगतसिंह, सुभाषचन्द्र बोस, चन्द्रशेखर आजाद, तात्या टोपे, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई जैसे हजारो शहीद देशभक्तों की वीरतापूर्ण कहानी और पराक्रम के बल पर ही भारत को आजादी में मिल सकी थी. वे माताए धन्य हैं, जिन्होंने ऐसे वीर सपूतों को जन्म दिया. अपने घर-परिवार की परवाह किये बिना.

स्वतन्त्रता आन्दोलन का साथ थामा और मौत को गले लगाने से नही हिचके.

सर फरोश की तमन्ना अब हमारे दिल मैं हैं ,दिखना हैं जोर कितना बाजुए कातिल में जैसी प्रेरणादायक पक्तियाँ प्रत्येक नवयुवक का खून उबाल देती थी. 29 मार्च, 1857 के दिन भारत के पहला स्वतन्त्रता सेनानी मंगल पांडे को ब्रिटिश सरकार ने राजद्रोह के आरोप में फांसी की सजा दे दी गईं थी. इसी घटना के प्रतिरोध और अन्य सामाजिक राजनितिक कारणों के फलस्वरूप 1857 की क्रांति की शुरुआत हुई थी. गोरी सरकार की दमनकारी निति ने इस आन्दोलन को एक साल के भीतर पूरी तरह दबाने में तो सफल रही. मगर आजादी की इस चिंगारी ने प्रत्येक भारतीय के मन में इस सरकार के विरुद्ध आक्रोश और देशप्रेम की भावना पैदा कर दी.

भारत की स्वतंत्रता के पीछे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का महत्वपूर्ण योगदान रहा.

उन्हें सत्य और अहिंसा पर आधारित असहयोग आन्दोलन, भारत छोड़ो आन्दोलन, नमक सत्याग्रह, चम्पारण खेड़ा का आन्दोलन के परिणाम स्वरूप अंग्रेज सरकार को मजबूर होकर भारत की स्वतन्त्रता की घोषणा करनी पड़ी.

200 वर्षो तक सता पर काबिज अंग्रेज सरकार को भारत से भगाने की बड़ी कीमत इस देश के लोगों ने चुकाई,

जिनमे कठोर कारावास, काले पानी की सजा, अमानवीय यातनाए और हजारों नवयुवको को फांसी की सजा दी गईं थी. जलियावाला बांग हत्याकांड, लाहौर में लाठीचार्ज लालाजी की हत्या, भगतसिंह को फांसी, भारत-पाकिस्तान का विभाजन, 1946-47 में हिन्दू मुस्लिम दंगे जैसे जख्म हिंदुस्तान हमेशा याद रखेगा.

15 अगस्त पर हमारा योगदान

आज हम स्वतंत्र हैं, हमें अपने भारत को फिर से सोने की चिड़िया और विश्वगुरु बनाना हैं.

ब्रिटेन में 20 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं. यह वक्त हैं हमारे उत्पीडन के बदले का वक्त बदल चूका हैं. हमे मानसिक रूप से उन कातिलों से बदला लेना हैं जिन्होंने हमे 200 वर्षो तक गुलाम बनाए रखा. आजादी के 71 साल बाद भी हमारे देश की अधिकतर आबादी अपनी बुनियादी वस्तुओं की पहुच से दूर हैं, इस सच्चाई को छुपाकर हम कैसे कह सकते हैं. कि भारत एक सुपर पॉवर हैं. हमे अपने वतन को उस मुकाम तक पहुचाने में माननीय प्रधानमन्त्री कों समर्थन देना चाहिए. एक भारतीय होने के नाते हमे अपने देश के विकास कार्यो में सहयोग के लिए समय पर टैक्स का भुगतान कर, सरकारी योजनाओं में सहयोग करके, भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ने में हमे आगे आना होगा.

जय हिन्द. जय भारत

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