1857 Revolt In Rajasthan | राजस्थान में 1857 का स्वतंत्रता संग्राम

1857 Revolt In Rajasthan | राजस्थान में 1857 का स्वतंत्रता संग्राम– आऊवा के ठाकुर खुशालसिंह अंग्रेजो के घोर विरोधी थे. उन्होंने अपने अंग्रेज विरोधी संघर्ष से जोधपुर राज्य एवं अंग्रेजी सेना को बुरी तरह पराजित किया. आऊवा के ठाकुर कुशालसिंह ने ब्रिटिश रेजिमेंट मैकमेसन का सिर धड़ से अलग कर दिया और और उसे आऊवा के लिए पर लटका दिया. 1857 Revolt In Rajasthan में राज्य में हुई इस तरह की अन्य गतिविधियों की जानकारी नीचे दी जा रही है.

Freedom Struggle Of 1857 And Rajasthan In Hindi | राजस्थान में 1857 का स्वतंत्रता संग्राम1857 Revolt In Rajasthan

thakur kushal singh in hindi– आऊवा के ठाकुर को मेवाड़ के सामंतों का जन समर्थन मिला था, लेकिन दूसरे ही वर्ष जोधपुर व अंग्रेजों की सेना ने ठाकुर खुशालसिंह पर आक्रमण कर दिया. किलेदार को रिश्वत देकर किले के दरवाजे खुलवा दिए एवं किले में प्रवेश कर गये.

28 मई 1857 को नसीराबाद के सैनिकों ने तोपखाने पर अधिकार कर लिया. खजाना लूट लिया, एक अंग्रेज अधिकारी के टुकड़े टुकड़े कर दिए. अंग्रेज अधिकारी वहां से प्राण बचाकर भाग निकले. यहाँ से दिल्ली कूच कर गये. तभी नसीराबाद क्रांति के समाचार नीमच पहुचे. नीमच में सैनिक शस्त्रागारों को लूट लिया गया. अंग्रेज अधिकारी उदयपुर की ओर भाग गये.

महाराणा ने उन्हें महलों में शरण दी, कोटा में भी अंग्रेजों के विरुद्ध आमजन और राजकीय सेना द्वारा संघर्ष किया गया. कोटा के महाराव को भी अंग्रेजों के प्रति सहयोग की निति के कारण क्रांतिकारियों के कोपभाजन का शिकार बनना पड़ा.

राजस्थान में अंग्रेज विरोधी भावना जागृत करने में जयदयाल, मेहराब खां, रतनलाल व जियाराम की महत्वपूर्ण भूमिका रही. कोटा के सम्पूर्ण प्रशासन पर क्रांतिकारियों का अधिकार हो गया. कोटा में इस दौरान लगभग 5 वर्षो तक जन शासन रहा.

कोटा में पोलिटिकल एजेंट बर्टन था. कोटा के क्रांतिकारियों ने मेजर बर्टन और उनके दो पुत्रों को मौत के घाट उतार दिया. यहाँ के शासक को क्रांतिकारियों ने महल में कैद कर दिया. 6 माह तक कोटा में क्रांतिकारियों का कब्जा रहा.

टोंक और शाहपुरा में अंग्रेजी सैनिकों के लिए द्वार बंद कर दिए लेकिन सर्वमान्य नेता के अभाव में अंग्रेजों ने अपने सैनिक बल के आधार पर इन क्रांतियों का दमन कर दिया.

तांत्या टोपे ने राजस्थान के झालावाड़ पर अधिकार कर लिया. यहाँ के शस्त्र भंडार पर क्रांतिकारियों ने अधिकार कर लिया. राजस्थान में तांत्या टोपे के आगमन से क्रांतिकारियों में नया जोश आ गया. सलूम्बर के रावते केसरीसिंह तथा कोठारिया के सामंत जोधसिंह ने तांत्या टोपे का पूरा सहयोग दिया. नरवर के शासक मानसिंह ने तांत्या टोपे को अंग्रेजों के हाथों पकड़वा दिया.

और 1859 में उसे फांसी दे दी गई, लेकिन फांसी देना सत्य नही है, क्रांति को कमजोर होता देखकर वह अज्ञातवास में चला गया था. इसके के साथ ही राजस्थान में  राजस्थान में 1857 का स्वतंत्रता संग्राम (1857 Revolt In Rajasthan) समाप्त हो गया.

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