A Trip I Took Essay In English & Hindi Language | एक यात्रा जो मैंने की

A Trip I Took Essay In English & Hindi Language एक यात्रा जो मैंने की: I hope you guys are good. Today we have brought a field trip that your class took. Students of class 1,2,3, 6, 5, 6, 7 can remember this short essay, paragraph for preparing for the exam. Let us start reading an essay about a journey that I did.

A Trip I Took Essay In English

A Trip I Took Essay In English

Last Sunday, I undertook a trip to the Bharatpur bird sanctuary (Keoladeo ghana national park). it is situated in Bharatpur district of Rajasthan state in India.

the nearest access is the city Bharatpur. its coverage area is 29 square kilometers. more than 300 species of birds are found in this wildlife park.

there are sambhar, chital, nilgai, bear, and migratory birds. it vests indigenous waterbird as well as migratory waterbird and waterside birds.

it has a large lake. 11 square kilometers of its area is marshes. this wildlife habitat was created by a maharaja. its lake is the outcome o ajan dam.

the lake is the depression created by the extraction of soil. thus, it was a useful trip.

Keoladeo National Park is open throughout the year. August-October is the breeding season, so the birds are then left alone. The best season to visit this place is between October to February, when migratory birds from all over the world visit this park.

A Trip I Took Essay In Hindi Language एक यात्रा जो मैंने की

गत रविवार मैंने भरतपुर पक्षी अभयारण्य (केवलादेव घना पक्षी राष्ट्रीय उद्यान) की सैर की. यह भारत के राजस्थान राज्य के भरतपुर जिले में स्थित हैं.

समीपतम प्रमुख स्थल भरतपुर शहर हैं. इसका विस्तार क्षेत्रफल 29 वर्ग किलोमीटर हैं. इस छोटे से वन्यजीव उद्यान में 300 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं.

इसमें साभर, चीतल, नीलगाय, नर सूअर व प्रवासी पक्षी हैं. यह स्वदेशी जल पक्षी व प्रवासी जल पक्षी तथा जल के समीप रहने वाले पक्षियों को शरण देता हैं.

इसमें एक विशाल झील हैं. इसका ग्यारह किलोमीटर का क्षेत्रफल दलदल हैं. यह वन्यजीव आश्रयस्थल एक महाराजा द्वारा बनवाया गया था.

इसकी झील अजान बाँध से बनी हैं. मिट्टी निकालने से बना विशाल नीचा क्षेत्र झील बन गया. हमनें वहां बहुत से प्राकृतिक दृश्य देखे. इस प्रकार यह एक उपयोगी यात्रा थी.

केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान पूरे वर्ष खुला रहता है। अगस्त-अक्टूबर प्रजनन का मौसम है, इसलिए पक्षियों को तब अकेले छोड़ दिया जाता है। इस जगह पर जाने का सबसे अच्छा मौसम अक्टूबर से फरवरी के बीच होता है, जब प्रवासी पक्षी दुनिया भर से इस पार्क में घूमने आते हैं।

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