आतंकवाद की समस्या पर निबंध | Hindi Aatankwad Ki Samasya Essay

आतंकवाद की समस्या पर निबंध Hindi Aatankwad Ki Samasya Essay: पुलावामा हमले के बाद आतंकवाद की समस्या का एक नया रूप भारत व दुनियां ने देखा हैं. भीड़ वाले इलाकों में बम धमाके, लोगों को बंदी बनाना, निहत्थों पर वार कर उनकों मौत के घाट उतार देना आतंकवाद का स्वरूप हैं. Aatankwad Ki Samasya Essay में हम इस समस्या के बारे में विस्तार से जानेगे.

आतंकवाद की समस्या पर निबंध | Hindi Aatankwad Ki Samasya Essay

आतंकवाद की समस्या पर निबंध | Hindi Aatankwad Ki Samasya Essay

भारत में आतंकवाद की समस्या निबंध (Aatankwad Essay In Hindi pdf): आज सम्पूर्ण मानवता आतंकवाद की समस्या से त्रस्त है. पिछड़े और विकासशील देश तो इसकी गिरफ्त में है, सम्रद्ध व शक्तिशाली देश भी इस खतरे से अछूते नही है.

विधि सम्मत सरकार के विरुद्ध हिंसात्मक कार्यवाही करना तथा जनता को भयभीत करना आतंकवाद है. हिंसा की धमकी, व्यक्तिगत हिंसात्मक कृत्य और लोगों को आतंकित करना आतंकवाद  है. भारत सहित दक्षिण एशियाई देश तो इस समस्या से जूझ ही रहे है, अमेरिका भी इसका अपवाद नही है.

जम्मू कश्मीर तथा देश के अन्य भागों में विघटनकारी घटनाओं को अंजाम देने का कार्य यही आतंकवादी कर रहे है. दिसम्बर 2001 में भारतीय संसद पर जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए तोयबा के आतंकवादियों ने हमला कर दिया था.

विदेशी आतंकवादी संगठनों द्वारा प्रायोजित यह छाया युद्ध युद्ध भारत के लिए एक बड़ी समस्या है. आतंकवाद राज्य एवंम इसका राज्य प्रायोजित रूप अत्यंत भयावह है. इसके अंतर्गत विश्व के कई राज्य अपने स्वार्थी हितों की पूर्ति के लिए खुलेआम आतंकवाद और आतंकवादी संगठनों को शह एवं प्रश्रय दे रहे है.

इन आतंकवादी संगठनों के पास अत्याधुनिक हथियार, विस्फोटक, वित्त व अन्य सभी संसाधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है. अनगिनत वार्ताओं व सम्मेलनों में चर्चा के बावजूद आतंकवाद की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है. इससे प्रभावित देश में शांति और परस्पर विश्वास तो खंडित हुआ ही है. आर्थिक संसाधनों की बर्बादी हुई है.

अच्छा हो, आने वाला समय आतंकवादी गतिविधियों से मुक्त हो तथा इस अथाह धनराशी का प्रयोग जनता के विकास की ओर उन्मुख करने का मार्ग प्रशस्त हो.

आतंकवाद की समस्या का विस्तार (aatankwad ke karan)

आज दुनिया का लगभग हर देश आतंकवादी की समस्या को लेकर चिंतित है. यह सर्वविदित है, कि इस समस्या की जड़ पाकिस्तान से जुड़ी हुई है. पाक की ख़ुफ़िया एजेंसी isi को पालिसी हमेशा इन आतंकवादी संगठनो को प्रश्रय देने की रही है. कई टेरिरिस्ट ग्रुप्स और उनके लीडर जैसे हाफिज सईद पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में भारत की मांग पर कई देशों ने सहयोग किया.

पाकिस्तान व चीन आतंकवाद के मामले में भारत की राह का रोड़ा बनकर भविष्य में अपनी चुनौतियों को आमत्रित कर रहे है. इसका नतीजा पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान सहित्र कई इस्लामिक मुल्क भी भुगत रहे है.ईरान, सीरिया, नाइजीरिया, अफगानिस्तान में आतंकवाद पाकिस्तान की दुचाल का ही कारण है.

आतंकवाद की समस्या के समाधान के उपाय (aatankwad ki samasya ka samadhan)

आतंकवाद को नियंत्रित करने के हर संभव प्रयास पिछले कुछ सालों से किये जा रहे है. लेकिन कुछ देशों में अभी भी गुप्त रूप से टेररिस्ट ट्रेनिंग के कैम्प खुलेआम चल रहे है. धार्मिक फंड के नाम पर कई बड़े देश इन्हें चोरी छिपे फंडिग कर रहे है. इससे आतंकवादियों के हौसलें बुलंद है.

यह कितने खतरनाक साबित हो सकते है. इस बात का अनुमान लगाने के लिए आप समझ सकते है, आज के परमाणु युग में जो तकनीक कई विकसित राष्ट्रों के पास नही है, वो आज इन आतंकवादी संगठनो के पास है. धर्म के नाम पर चल रहा aatankwad का यह खुनी खेल दुनिया को तबाह कर रख देगा. यदि दुनिया के शक्तिशाली देश समय रहते इसके विरोध में नही आए तो इसके भयंकर परिणाम भुगतने पड़ सकते है.

आतंकवाद पर निबन्ध | Aatankwad Ki Samasya Essay In Hindi

आतंकवाद की समस्या, कारण और समाधान short essay on aatankwad in hindi: बमों के धमाके, गोलियों की तड़तड़ाहट, असुरक्षित जन जीवन, असुरक्षित धर्म स्थान, निर्दोषों का बहता लहूँ, निराश्रितों के बढ़ते शरणस्थल, यह तस्वीर है हमारे आधुनिक जगत की. कोई भी कही भी सुरक्षित नही हैं. समाचार पत्र आतंकवादी कृत्यों के समाचारों से भरे रहते हैं.

आतंकवाद क्या हैं- आतंकवाद बल प्रयोग द्वारा तथा आतंक फैलाकर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का बर्बर तरीका हैं.

आतंकवाद का विश्वव्यापी रूप– आतंकवाद एक विश्वव्यापी समस्या हैं. ओसाबा बिन लादेन के नेतृत्व में अलकायदा अफगानिस्तान के तालिबान, पड़ोस में पल फूल रहे जेहादी तथा भारत एवं नेपाल में सक्रिय माओवादी और नक्सलवादी आतंकवाद के सहारे ही अपना अधिकार जमाना चाहते हैं.

भारत में आतंकवादी गतिविधियाँ एवं दुष्परिणाम– स्वतंत्र भारत में आतंकवाद का प्रारम्भ पूर्वी सीमान्त से हुआ. नागालैंड, त्रिपुरा, असम आदि प्रदेशों में विदेशी शक्तियों के षड्यंत्र से आतंकवादी गतिविधियाँ काफी समय से चलती हैं. 

भारत में स्वर्गीय प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या से लेकर, विमान अपहरण, निर्दोष लोगों की हत्याएं, जगह जगह धमाके, यहाँ तक कि घात लगाकर सेना पर हमला, अक्षरधाम और संसद भवन पर हमला आदि आतंकवाद के ही उदहारण हैं. जयपुर में बम ब्लास्ट तथा मुंबई में हुए हमले में सैकड़ो लोगो की जान चली गई. 

पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टों की आतंकवादी हमले में हत्या कर दी गई. आतंकवाद को प्रोत्साहित करने वाला देश स्वयं आतंकवाद की चपेट में आ गया हैं. यह घटना संदेश देती हैं कि आतंकवाद बढ़ाकर किसी समस्या का समाधान नही हो सकता.

मुक्ति के उपाय- आतंकवाद के विरुद्ध संसार का हर सभ्य और समझदार देश आवाज उठा रहा हैं. किन्तु यह रोग बढ़ता ही जा रहा हैं. आतंकवादी गतिविधियों का कठोरता से सामना करके ही सफलता मिल सकती हैं.

उपसंहार- आज आतंकवाद को रोकने के लिए हमे अपनी सेना को नवीनतम सैन्य उपकरणों से सुसज्जित करना होगा और सारी गुप्तचर एजेंसियों को अधिक चुस्त और सावधान बनाना होगा. तभी हम आतंकवाद की इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं.

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