आदर्श विद्यालय पर निबंध – Adarsh Vidyalaya Essay In Hindi

Adarsh Vidyalaya Essay In Hindi : आप सभी का हार्दिक स्वागत हैं आदर्श विद्यालय पर निबंध में आज हम my ideal school essay in hindi का आर्टिकल निबंध भाषण यहाँ बता रहे हैं. कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7,8,9,10 के स्टूडेंट्स के लिए हिंदी लैंग्वेज में आदर्श विद्यालय का निबंध यहाँ 100, 200, 250, 300, 400 और 500 शब्दों में दिया गया हैं.

आदर्श विद्यालय पर निबंध Adarsh Vidyalaya Essay In Hindi

आदर्श विद्यालय पर निबंध Adarsh Vidyalaya Essay In Hindi

पाठशाला अथवा विद्यालय वह स्थान होता हैं जहाँ देश के भावी कर्णधार नन्हे मुन्हे बच्चें शिक्षा ज्ञान पाने के लिए नित्य सवेरे जाते हैं, हमारी संस्कृति में स्कूल को मन्दिर की तरह महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हैं. विद्यालय में पढाने वाले शिक्षकों को गुरु का दर्जा दिया जाता हैं. वे ही बालकों के अज्ञान को दूर कर उन्हें ज्ञान रुपी प्रकाश से प्रकाशित करते हैं.

आजादी के समय हमारे देश में शिक्षा के नाम पर कोई विशेष सुविधाएं नहीं थी. गाँवों के बच्चों के पढ़ने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी, मगर आज गाँव गाँव में आदर्श विद्यालय खुल गये हैं जहाँ अपने ही घर के पास बालक अपनी स्कूली शिक्षा को पूर्ण कर पाते हैं नर्सरी से 12 वीं तक के स्कूल को आज आदर्श विद्यालय की श्रेणी में गिना जाता हैं.

शिक्षा के अधिकार ने तो भारत में शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति ला दी हैं. लड़के व लड़कियों को समावेशी शिक्षा दी जा रही हैं. छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं के माध्यम से बच्चों को निरंतर विद्यालयों से जोड़ा जा रहा हैं. एक आदर्श विद्यालय सभी आधुनिक सुख सुविधाओं से सम्पन्न होता हैं. जहाँ लाइब्रेरी, वाचनालय, लैब, कंप्यूटर, खेल मैदान, हवादार कमरे, श्यामपट तथा शिक्षक के लिए स्टेंड व बच्चों के लिए बैठने की अच्छी व्यवस्था होती हैं.

छात्र छात्राओं के लिए अलग से टॉयलेट तथा आवासीय हॉस्टल, सभी खेलों के साधन तथा अच्छा मैदान एक आदर्श विद्यालय की विशेषता हैं. एक आदर्श विद्यालय में न सिर्फ पढ़ने में होशियार बच्चों के लिए अच्छे शिक्षण का प्रबंध होता हैं बल्कि पिछड़े बालकों के लिए भी अलग से कक्षाएं आयोजित की जाती हैं. आदर्श विद्यालयों में बच्चों को समस्त तरह की आधुनिक सुख सुविधाओं का माहौल प्रदान किया जाता हैं.

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एक आदर्श स्कूल में शिक्षक व शिक्षिकाओं की व्यवस्था होती हैं जो अपने अपने विषय की पूर्ण जानकार होती हैं तथा रोचक अंदाज से बच्चों को अध्ययन करवाती हैं. बालकों के शैक्षिक स्तर के अनुसार उनके शिक्षण के तरीकों में बदलाव लाकर उन्हें शिक्षा के महत्व लाभ से लाभान्वित करता हैं. एक आदर्श विद्यालय के निर्माण की जिम्मेदारी छात्र, शिक्षक, प्रधानाचार्य तथा अभिभावकों की जिम्मेदारी होती हैं.

एक आदर्श विद्यालय के स्टूडेंट्स को भी आदर्श बनना पड़ता हैं शिक्षक को भी एक आदर्श की भूमिका के रूप में बच्चों के समक्ष प्रस्तुत होना होता हैं. केवल अच्छे एवं आधुनिक सुविधाओं से युक्त भवन से ही आदर्श विद्यालय नहीं बनते हैं, इसके लिए स्कूल में सदाचार, शिष्टाचार तथा अनुशासन के नियमों का कठोरता से पालन करना चाहिए. जागरूकता के दम पर ही छात्र आदर्श विद्यालय का अंग बन सकता हैं.

एक आदर्श विद्यालय में शिक्षण की उचित व्यवस्था के साथ ही प्रयोग तथा शोध की पर्याप्त साधन उपलब्ध होते हैं. विज्ञान संकाय के छात्र छात्राओं के लिए प्रयोगशाला तथा इतिहास तथा साहित्य के विद्यार्थियों के लिए अतीत से जुड़े ग्रंथ तथा दस्तावेजों की उपलब्धता होनी चाहिए. बच्चों को प्रैक्टिकल के साधन तथा स्वय द्वारा खोज के विषयों में गहन अध्ययन के अवसर उपलब्ध करवाएं जाते हैं.

बदलते वक्त के साथ आधुनिक डिजिटल शिक्षा तथा विषयों के प्रोफेसरों के व्याख्यानों को इन्टरनेट की मदद से सुनाया जाए, बच्चों को कंप्यूटर की बेसिक जानकारी तथा सोशल मिडिया तथा गूगल की उन्नत तकनीकों को बच्चों को अवगत करवाया जाता हैं. तभी सही मायनों में एक आदर्श विद्यालय बनाया जा सकता हैं.

स्कूल में खेल सम्बन्धी उचित व्यवस्था की जानी चाहिए. बच्चों के संतुलित विकास के लिए पढ़ाई के साथ साथ खेल की भी पर्याप्त व्यवस्था की जानी चाहिए. एक आदर्श विद्यालय में बच्चों के खेल के लिए अच्छे मैदान तथा समस्त खेलों की खेल सामग्री की व्यवस्था भी होती हैं. बालक बालिकाओं के लिए अलग से टॉयलेट की सुविधा कराई जानी चाहिए.

एक अच्छे विद्यालय का उद्देश्य बालकों में सच्चाई, ईमानदारी, शिष्टाचार तथा अनुशासन के गुणों के विकास होता हैं. क्योंकि एक सच्चे इन्सान का निर्माण विद्यालय में शिक्षक ही करते हैं. यदि बालपन में बच्चों को ऐसे संस्कार तथा नैतिक गुण विकसित किये जाते तो निश्चय ही उस देश की तरक्की सम्भव हैं. आदर्श विद्यालय का वातावरण बच्चों को असत्य, हिंसा, कुकर्म, बेईमानी जैसे दुर्गुणों से दूर रखने में मदद करता हैं.

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